मालवी बोली और संस्कृति को सहेजने में लगी भोली बेन (हेमलता शर्मा)

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मालवी बोली और संस्कृति को सहेजने में लगी भोली बेन (हेमलता शर्मा)

छाया: हेमलता शर्मा के फेसबुक काउंट से

प्रमुख लेखिका 

• सीमा चौबे

मालवा-निमाड़ की लोक संस्कृति और साहित्य में ‘भोली बेनका नाम अनजाना नहीं है। एक छोटे कस्बे के साधारण परिवार की इस लड़की ने बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में न सिर्फ अपना अस्तित्व बनाए रखा, बल्कि अपने बलबूते पर अलग पहचान बनाकर समाज में अपने आपको स्थापित भी किया। जिस तरह से उसने खुद को गढ़ा और अपने सपनों को साकार किया, वह न सिर्फ उनके परिवार की महिलाओं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। विलक्षण प्रतिभा की धनी 'भोली बेन' यानी हेमलता शर्मा, मध्यप्रदेश की दो लोक भाषाओं - मालवी और निमाड़ी के उन्नयन के लिए सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने साहित्य और रंगकर्म के क्षेत्र में भी ख़ासी लोकप्रियता हासिल की है।

19 दिसम्बर 1977 को आगर मालवा में श्रीमती इंदिरा शर्मा और श्री कृष्ण शर्मा के यहां जन्मी हेमलता का बचपन अभावों और संघर्षों में बीता। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और धीरे-धीरे अपना मक़ाम बनाया, हालांकि ऐसा करना उनके लिए आसान नहीं था। तीन पीढ़ियों बाद परिवार में हेमलता के रूप में लड़की का जन्म हुआ, लेकिन खुशियां मनाने के बजाय उनके जन्म की खबर सुनते ही घर में मायूसी छा गई। उनके पिता तो घर छोड़कर ही चले गए। बचपन से ही उन्हें लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। पूरे परिवार में केवल उनकी दादी ही थीं, जिनका स्नेह-दुलार और साथ उन्हें मिलता रहा। माँ भले ही परिवार में रुढ़िवादी मानसिकता का विरोध नहीं कर पाती थी, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी के साथ कभी भेदभाव नहीं किया।

तीन भाई-बहनों में दूसरे नम्बर की हेमलता को शिक्षा हासिल करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें दो मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़नी थी एक तरफ आर्थिक संकट, दूसरा उनका लड़की होना। चूंकि पिताजी घर छोड़कर चले गए थे, ऐसे में माँ के सामने बच्चों का लालन-पालन एक विकट समस्या थी। परिवार में रोज़ किसी न किसी बात पर जद्दोजहद बनी रहती। ऐसे समय में उनकी दादी उनके साथ खड़ी रहीं और जैसे-तैसे उन्होंने हेमलता का दाखिला गाँव के ही स्कूल में करवा दिया। जब वे आठ बरस की थीं, तब अचानक उनके पिताजी लौटकर घर आ गए और दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम करने लगे। अब बेटी के प्रति उनका रवैया थोड़ा नरम हो गया था। कुशाग्र बुद्धि की हेमलता शुरु से ही पढ़ाई में होशियार थीं तो कक्षा 6वीं से उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद उठाने लगीं। यह कमाई उनके घर के लिए भी बहुत मददगार साबित हुई।

हेमलता इंजीनियर बनना चाहती थीं, इसलिए जब 11वीं में उन्होंने गणित और विज्ञान विषय लिए तो घर में बड़ा बवाल हुआ, लेकिन हेमलता अपने फैसले पर अड़ी रहीं और अव्वल दर्जे के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद जब आगे की पढ़ाई की बात आई तो कहा गया प्रायवेट बी.ए. कर लो, हम इंजीनियरिंग की पढ़ाई की इजाजत तो बिलकुल नहीं देंगे। उनके परिवार में उस समय तक लड़कियों को कॉलेज में पढ़ाना अच्छा नहीं माना जाता था। दरअसल आगर-मालवा में एक ही कॉलेज था वह भी सहशिक्षा वाला। घर वाले तो पहले से ही उनकी पढ़ाई के ख़िलाफ़ थे, ऊपर से को-एड कॉलेज में उन्हें भेजना, दूर-दूर तक मुमकिन नहीं था। हेमलता अपना प्रिय विषय - गणित छोड़ना नहीं चाहती थीं, बीए उन्हें करना नहीं था, इसीलिए उन्होंने बीच का रास्ता निकाला और बी.कॉम के लिए घरवालों को राजी कर लिया।

उन्होंने कॉलेज में दाखिला तो ले लिया लेकिन उनकी परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी। कॉमर्स पढ़ने वाली अपनी कक्षा में वे अकेली लड़की थीं। कक्षा में जिस ओर वे बैठती, सारे लड़के उनकी विपरीत दिशा में बैठते और उनसे कोई बात नहीं करता। ऊंच-नीच के डर से पिताजी स्वयं उन्हें साइकिल से कॉलेज छोड़ने जाते। यह संयोग ही था कि कॉलेज के एक शिक्षक - जो उनके परिवार से अच्छी तरह से परिचित थे, ने हेमलता को मुफ़्त  ट्यूशन देने की हामी भर ली। लेकिन उनके यहां पढ़ाने के लिए एक ही कमरा था और वहां भी केवल लड़के ही आते थे। ऐसे में उन्होंने कमरे के बाहर दरवाज़े पर एक स्टूल लगाकर हेमलता को बैठा दिया और कहा यहां से जितना समझ आए, समझ लेना, इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं कर सकता। पैसे देकर पढ़ने की हैसियत थी नहीं, इसीलिए हेमलता ने इसी तरह ट्यूशन पढ़ना शुरू किया।

बिला नागा कॉलेज जाने वाली हेमलता को यही शिक्षक 'बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर' कहते और यह सच भी था। जब परीक्षा परिणाम आए तो सभी चौंक उठे, क्यूंकि हेमलता अकेली थीं जिन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया था। ट्यूशन देने वाले शिक्षक महोदय हेमलता की प्रतिभा के कायल हो गए और अगले साल से उन्होंने उन्हें अंदर बैठ कर पढ़ने की इजाज़त दे दी। इतना ही नहीं, अब जब भी शिक्षक महोदय  छुट्टी पर होते तो छात्रों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी हेमलता की होती। अपनी बेटी के लिए भी हेमलता को ट्यूटर रख लिया। बी.कॉम आख़िरी साल में एक बार फिर हेमलता अव्वल रहीं। कॉलेज में जब उन्हें मेडल मिला तो हेमलता की ज़िद के चलते उनके पिता ने इसे ग्रहण किया। यहां बेटी की प्रतिभा के गुणगान सुनने के बाद उनकी सोच में बदलाव आना शुरू हुआ। इस तरह 1999 में  हेमलता ने ग्रेजुएशन किया और 2001 में समाजशास्त्र में एमए (प्रायवेट) की डिग्री हासिल की।

उनके पिता जी बहुत अच्छे कवि और वक्ता थे। भाषण, कविता लिखने-बोलने के गुण उन्हें अपने पिताजी से ही मिले। हेमलता स्कूल-कॉलेज में भाषण-निबंध, कविता, नाटक, फैंसी ड्रेस आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेती थीं। इन सब बातों के प्रति उनके पिताजी की भी रुचि थी, तो उन्होंने इन चीजों के लिए कभी मना नहीं किया। नाच-गाने से जरूर उन्हें परहेज था, तो नृत्य प्रतियोगिताओं में कभी हिस्सा नहीं लिया। कॉलेज के समय में उन्हें शेरो-शायरी करने का शौक चढ़ा। वे घर वालों को बताये बिना 'हर्ष' नाम से ये काम करने लगीं। अलबत्ता लेख और कविताएं खुद के नाम से ही लिखती थीं। ये सिलसिला 1993 से अब तक चला आ रहा है। अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख एवं कविताएं, व्यंग्य, कहानियां, लघुकथा एवं मालवी रचनाएं निरंतर प्रकाशित हो रही हैं।

हेमलता के प्रशासनिक अधिकारी बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है। एक अफ़सर के भरोसे ने उनका हौसला बढ़ाया और वे पीएससी की तैयारी में जुट गईं। हेमलता बताती हैं कि कॉलेज में जब वे छात्रसंघ की अध्यक्ष थीं, तब एक ज्ञापन देने के सिलसिले में उनका एसडीएम तापस कुमार बनर्जी से मिलना हुआ। प्रशासनिक अधिकारी का रूतबा देख यह बात उनके दिमाग में बैठ गयी कि अगर इंजीनियर नहीं बन पाई तो क्या प्रशासनिक अधिकारी तो बन ही सकती हूं। बनर्जी भी हेमलता की प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए। उस समय तहसील में संविदा का नकल नवीस की एक जगह खाली थी, उन्होंने हेमलता को तहसील में ही उस जगह भर्ती कर लिया। वे राज्य लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए भी हेमलता को प्रोत्साहित करते रहे। यहां हेमलता को चार घंटे ही काम करना होता था। वे सुबह 8 से 11 कॉलेज जातीं और उसके बाद 12 से 4 तहसील में सेवाएं देतीं। अब हेमलता ने पीएससी को ही अपना लक्ष्य बना लिया और तहसील की नौकरी छोड़ पीएससी की कोचिंग के लिए वर्ष 2001 में इंदौर आ गईं।

वर्ष 2003 में उनका पटवारी पद के लिए चयन हो गया और वे शाजापुर जिले की पहली महिला पटवारी बन गईं। सपना तो अभी भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का ही था तो पीएससी की तैयारी वे करती रहीं। आखिरकार नौ बार लिखित परीक्षा और सात बार इंटरव्यू देने के बाद वर्ष 2016 में सहायक निदेशक-जनसंपर्क के पद पर खंडवा में इनकी पहली नियुक्ति हुई। बुरहानपुर के जिला जनसंपर्क अधिकारी का कार्यभार भी इन्हें सौंप दिया गया। इस प्रकार वे द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी बन गईं। वर्ष 2017 में वित्त विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बनीं और नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सक्रिय सहभागिता कर योगा, कैरम, शतरंज जैसे खेलों में प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त कर पदक जीते। 2019 में उनकी पदस्थापना इंदौर हो गई।

हेमलता बताती हैं कि वित्त विभाग में पदस्थापना से पूर्व प्रशासन अकादमी भोपाल में प्रशिक्षण के दौरान मिले खाली समय का सदुपयोग उन्होंने पठन-पाठन के लिए किया। उन्होंने पूर्व में लिखी अपनी मालवी कविताओं को संकलित किया और वर्ष 2018 में मालवी भाषा में उनका पहला कविता संग्रह मालवी डब्ल्योनाम से प्रकाशित हुआ। इसके पूर्व 2015 में उनका मेरी हिन्दी कविताएंकाव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका था। इंदौर में पदस्थापना के बाद उन्होंने मालवी भाषा के प्रचार-प्रसार का बीड़ा उठाया। आने वाली नई पीढ़ी में मालवी बोली और मालवा के संस्कार बने रहे इस उद्देश्य के साथ वे मालवी लोकभाषा, मालवी साहित्य और लोक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कार्य करते हुए मालवी में लेखन के अलावा सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार कर कर रही हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने अपणो मालवोसंस्था की स्थापना की। यह संकल्पना दो करोड़ मालवा वासियों को अपने में समाहित करती है। मालवी भाषा से विशेष लगाव होने से भोली बेन के अपणो मालवोके अनेक भाग प्रकाशित हो चुके हैं। वे मालवी-निमाड़ी संघर्ष समितिके बैनर तले मालवी-निमाड़ी अकादमी के गठन की मांग को लेकर एक हस्ताक्षर अभियान भी चला रही हैं। ये हस्ताक्षर अभियान एक आंदोलन बन चुका है जिसे इंडिया स्टोरी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।

भोली बेन नाम कैसे पड़ा ? इस पर हेमलता बताती हैं कि वे संजा पर्व पर फेसबुक पर गीत लिखा करती थी। फेसबुक पर मालवी भाषा में बात करना लोगों को इतना पसंद आया कि उन्होंने मेरा नाम ही 'मालवा की भोली बेन' रख दिया। 'मालवा की शान' की उपाधि भी दी। इसके बाद हेमलता ने भोली बेननाम से फेसबुक पर एक पेज भी बनाया। आज लोग उन्हें असली नाम से अधिक भोली बेन के नाम से पहचानते हैं।  स्कूल कालेज में प्राप्त पुरस्कारों की तो गिनती ही नहीं है लेकिन हेमलता बताती है कि 156 प्रमाण पत्र उनके पास फाईल में लगे हैं। इसी प्रकार साहित्यिक क्षेत्र में लगभग 35 से अधिक सम्मान प्राप्त करने वाली विलक्षण प्रतिभा की धनी भोली बेन 'मां का आंचल' पुस्तक (साझा संकलन में 'मां' पर 100 से अधिक कविताएं हैं)  के लिए विश्व रिकॉर्ड भी बना चुकी हैं। उनके निर्देशन में लगभग 30 मालवी लघु फिल्म बनाई और प्रदर्शित की जा चुकी हैं। उन्होंने मालवी बोली में अनेक वीडियो बनाकर लोगों को मालवी भाषा के प्रति खूब लुभाया।

हेमलता ने कई प्रसिद्ध रचनाओं का मालवी में अनुवाद किया है। वे मालवांचल में प्रचलित लोकगीतों, लोक कथाओं आदि का संकलन भी कर रही हैं, जिन्हें जल्द ही किताब की शक्ल दी जाएगी। फेसबुक पर आज को  ज्ञान ' शीर्षक से पोस्ट चार साल से जारी है और मालवो की सीरिज के अंतर्गत आज को ज्ञानपर एक पुस्तक प्रकाशन पर भी कार्य चल रहा है। एक ई - पुस्तक भी उन्होंने सोशल मीडिया पर उपलब्ध कराई है। उन्होंने 78 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों को मालवी भाषा ऑनलाइन, वह भी निशुल्क सिखाई है। स्कूलों में अपनी किताबों का वे नि:शुल्क वितरण करती हैं।

वर्तमान में सहायक संचालक वित्त, कोष एवं लेखा के पद पर इंदौर में द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत हेमलता जी अविवाहित हैं और उनका पूरा परिवार अभी भी आगर मालवा में रह रहा है।

• प्रकाशन

1. कविताएं (काव्य संग्रह)  
2. मालवी डबल्यो (मालवी काव्य संग्रह)
3. मालवी लोकोक्तियां एवं मुहावरे (अपणो मालवो भाग- एक)
4. किनारा की खोज (अपणो मालवो भाग-2) (हरिशंकर परसाई जी के उपन्यास तट की खोज का मालवी रूपांतरण)
5. संजा पर्व- एक मालवी लोक परम्परा (अपणो मालवो भाग-4)
6. मालवी-हिन्दी लघुकथाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।

7. मां का आंचल (इस साझा संकलन पुस्तक के नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज है इसमें मां पर 100 से अधिक कविताएं हैं)
   
• प्रकाशनाधीन  पुस्तकें

1. मालवी शब्दकोश (अपणो मालवो- भाग-3) मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
2. भोली बेन की 251 लघुकथाएं (हिंदी में)
3. भोली सब कर लेगी (उपन्यास- हिंदी में)


• साझा संकलन

1. मां का आंचल (विश्व रिकॉर्ड)
2. कोरोना विशेषांक
3. पितृ दिवस विशेषांक
4. गुरु महिमा विशेषांक
5. वर्षा ऋतु विशेषांक
6. शहीदों को नमन विशेषांक,
7. 21
जून योग दिवस विशेषांक
8. झोल की भिंडी विशेषांक, 9-साहित्य मंजरी विशेषांक
9. मातृ स्नेह का सैलाब (काव्य संकलन)
10. मुक्ता माणिक (लघु कथा संकलन)
11. जीवन संध्या (वृद्धावस्था विशेषांक)
12. पिता का स्नेह सुमन (पद्य-गद्य संग्रह)
13. सफरनामा (भारत के यात्रा वृतांत)
14. मेरी पाठशाला (संस्मरण)
15. आंसू (काव्य संकलन)
16. लाडो (काव्य संकलन)
17. दीपोत्सव (दीपावली विशेषांक) 19- मनभावन (लघुकथा संग्रह)
18. होली विशेषांक
19. 26 जनवरी (काव्य संकलन)

•  सम्मान/पुरस्कार

1. राष्ट्रीय सुरभि साहित्य संस्कृति अकादमी खंडवा द्वारा उत्कृष्ट कवयित्री सम्मान (2017)
2.
मंगलम् जन जागरण सेवा समिति आगर मालवा द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह के तहत आगर गौरव सम्मान (2017)
3.
अग्रसर साहित्य मंच जयपुर राजस्थान से उत्कृष्ट लघुकथा समीक्षक सम्मान (2019)
4.
भारतीय विचार मंच, नागपुर (महा.) एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अक्षर वार्ता द्वारा उत्कृष्ट कवयित्री सम्मान (2019)
5.
मध्य प्रदेश राज्य आनंद संस्थान, भोपाल मध्य प्रदेश द्वारा पर्यावरण मित्र सम्मान (2020)
6.
हमरंग साहित्यिक मंच, पटना, बिहार द्वारा सर्वश्रेष्ठ कवयित्री सम्मान
7. साहित्य सुधा मंच असम द्वारा यशपाल साहित्य सम्मान (2020)
8.
अखण्ड सण्डे साहित्यिक- सामाजिक संस्था द्वारा स्व. श्री सज्जन जैन स्मृति साहित्यसेवी सम्मान (2020)
9.
जय किरण शोध संस्थान बड़नगर द्वारा शब्द के सोपान अलंकरण 2021 के तहत शिक्षाविद एवं समाजसेवी स्व. केसरसिंह पलवा स्मृति सम्मान (2021)
10.
राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, नागदा द्वारा जयपुर में मालव रत्न अलंकरण सम्मान (2021)
11.
अवनि सृजन साहित्य संस्था, इंदौर द्वारा लोक साहित्य रत्न सम्मान (2021)
12.
दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह द्वारा साहित्य शक्ति सम्मान (2021)
13.
भारत माता अभिनन्दन सम्मान (2021)
14.
भव्या इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा इण्डियन बेस्टिज अवार्ड (2021)
15.
अटलश्री काव्य सम्मान (2021)
16.
सतनामी साहित्य सेवा सम्मान (2021)
17.
राष्ट्रीय मालवी भाषा सम्मान (2021)
18.
मालव रत्न अलंकरण (2021)
19.
महारथी सम्मान (2022)
20.
संत कबीर स्मृति सम्मान (2022)
21.
साहित्य सारथी सम्मान (2022)
22.
मालवी संरक्षण सम्मान (2022)
23.
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच, मुंबई, महाराष्ट्र द्वारा साहित्य गौरव सम्मान
24. साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर द्वारा उत्कृष्ट कवयित्री सम्मान
25. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच, इंदौर मध्य प्रदेश से उत्कृष्ट मालवी-हिंदी कवयित्री सम्मान
26. शुभ संकल्प साहित्यिक मंच इंदौर द्वारा सम्मान
27. नर्मदेश्वरी सेवा संस्थान एवं नर्मदा प्रखर इंदौर, मध्य प्रदेश द्वारा सर्वश्रेष्ठ मालवी कवित्री सम्मान
28. वामा साहित्य मंच इंदौर द्वारा अखिल भारतीय महिला समागम में उत्कृष्ट काव्य पाठ हेतु कवयित्री सम्मान
29. आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबन्ध की अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा कैरम प्रतियोगिता महिला (विजेता) पुरस्कार
30. आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबन्ध की अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा योग प्रतियोगिता महिला (उपविजेता) पुरस्कार
31. आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबन्ध की अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा शतरंज प्रतियोगिता महिला (उपविजेता) पुरस्कार
32. शिवाजी योग नेचरोपैथी संस्था जयपुर द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में मातृशक्ति सम्मान
33. स्व. चन्द्रशेखर दुबे एवं स्व. पन्नालाल नायब स्मृति सम्मान उत्कृष्ट काव्य पाठ हेतु
34. सिविल जॉब्स अकेडमी फॉर पब्लिक सर्विस द्वारा सिविल सेवा गौरव सम्मान
35. मध्यप्रदेश शासन द्वारा उत्कृष्ट कार्य हेतु तीन बार सम्मानित किया गया।

सन्दर्भ स्रोत : हेमलता शर्मा से सीमा चौबे की बातचीत पर आधारित

©  मीडियाटिक

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