सामाजिक संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति: शोभिता

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सामाजिक संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति: शोभिता
ठाकुर की पहली लघु फिल्म ‘खिलावड़ी’

भोपाल। मध्यप्रदेश की युवा फिल्मकार शोभिता ठाकुर की पहली लघु फिल्म ‘खिलावड़ी’ सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है। बांछड़ा समुदाय की उन लड़कियों के संघर्ष को उजागर करती यह फिल्म जाति आधारित देह-व्यापार की परंपरा, सामाजिक दबावों और सीमित अवसरों के बीच सम्मानजनक जीवन और अपने सपनों के लिए जूझती महिलाओं की मार्मिक कहानी प्रस्तुत करती है। वास्तविक घटनाओं और सामाजिक शोध पर आधारित इस फिल्म को देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में सराहना और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं साथ ही दर्शकों और समीक्षकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।

‘खिलावड़ी’ का प्रीमियर कनाडा के प्रतिष्ठित फासिनएशियन फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसे कैलगरी में ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड तथा एडमंटन में बेस्ट शॉर्ट फिल्म अवॉर्ड और बिल्डिंग ब्रिजेस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा फिल्म को पुणे के बुद्धा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय यात्रा लगातार जारी है और इसे इटली के प्रतिष्ठित इस्किया ग्लोबल फिल्म एंड म्यूजिक फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया जा चुका है।

‘खिलावड़ी’ के माध्यम से शोभिता ठाकुर ने यह साबित किया है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के भीतर मौजूद जटिल प्रश्नों को सामने लाने और संवाद की नई संभावनाएं पैदा करने का सशक्त मंच भी हो सकता है।

भोपाल में पली-बढ़ी शोभिता ठाकुर नई पीढ़ी की उन फिल्मकारों में शामिल हैं, जो समाज के हाशिए पर मौजूद समुदायों, महिलाओं, जातिगत असमानताओं और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को अपनी फिल्मों और लेखन का केंद्र बनाती हैं। प्रतिष्ठित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पुणे से फिल्म संपादन का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली शोभिता ठाकुर ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजन खोसा के साथ सहायक निर्देशक के रूप में की। इसके बाद उन्होंने चर्चित फिल्मकार अनुराग बसु के साथ विज्ञापन फिल्मों में कार्य करते हुए दृश्यात्मक कहानी कहने की अपनी क्षमता को और विकसित किया।

उन्होंने नेटफ्लिक्स के साथ फ्रीलांस एडिटोरियल क्रिएटिव के रूप में भी कार्य किया है तथा कई प्रतिष्ठित विज्ञापन फिल्म निर्माण संस्थाओं के साथ सहायक निर्देशक की भूमिका निभाई है।

फिल्म निर्माण के साथ-साथ शोभिता ठाकुर एक सक्रिय लेखिका भी हैं। उनके लेख और कहानियां राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके लेखन में पहचान, स्मृति, लैंगिकता, सत्ता, कला और सामाजिक संरचनाओं जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं।

कम समय में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली शोभिता ठाकुर का मानना है कि सिनेमा समाज के अनदेखे और अनसुने पक्षों को सामने लाने का माध्यम है। इसी सोच के साथ वे लगातार ऐसे विषयों पर काम कर रही हैं, जो सामाजिक चेतना को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

सन्दर्भ स्रोत/छाया : शोभिता ठाकुर

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