सागर की सारा रूस में लहराएंगी भारतीय संस्कृति का परचम

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सागर की सारा रूस में लहराएंगी भारतीय संस्कृति का परचम

सागर। डॉ हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी की एनसीसी कैडेट सारा पांडे रूस में भारतीय संस्कृति की खूबसूरती से वहां के रहवासियों को परिचित कराएंगी। एनसीसी के माध्यम से 7 देशों के बीच होने वाले यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत सारा को यह मौका हासिल हुआ है। खास बात यह है कि सारा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की अकेली एनसीसी कैडेट है, जिनका रूस जाने के लिए चयन हुआ है। यह सफलता इसलिए भी बड़ी हो जाती है कि पूरे देश के 17 एनसीसी निदेशालयों में काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद सिर्फ 10 कैडेट का चयन किया गया है, जिनमें से सारा एक है।

दिखाएंगी भारतीय संस्कृति की झलक

सारा मूल रूप से छत्तीसगढ़ बिलासपुर की रहने वाली है और बचपन से कत्थक नृत्य में प्रशिक्षण हासिल किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य भी जानती हैं और सागर यूनिवर्सिटी में बीएएलएलबी में प्रवेश लेने के बाद बुंदेली लोक नृत्य का भी प्रशिक्षण लिया है। 21 मई को उन्हें दिल्ली पहुंचना होगा। जहां 7 दिनों तक उन्हें रूस में यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा। 30 मई को सभी 10 एनसीसी कैडेट्स का दल अधिकारियों के साथ रूस के लिए रवाना होगा और 7 जून तक रूस में रहेगा। यहां पर भारत के कैडेट्स भारतीय संस्कृति के बारे में रूस में प्रेजेंटेशन देंगे और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा रूस की संस्कृति को जानेंगे समझेंगे।

सारा की हेमलता पांडे शास्त्रीय नृत्यांगना हैं उन्होंने बचपन से सारा को कथक का प्रशिक्षण दिया है। पिता विवेक पांडे स्कूल शिक्षा विभाग में लेक्चरर हैं। सारा रूस में कथक की प्रस्तुति देना चाहती हैं। हालांकि वह छत्तीसगढ़ी और बुंदेली लोक नृत्य और संगीत से भली भांति परिचित हैं और प्रशिक्षण भी ले रही हैं। उन्हें अगर मौका मिला, तो रूस में छत्तीसगढ़ी और बुंदेली लोक नृत्य का भी प्रदर्शन करेंगी।

मां के अधूरे सपने को पूरा करने का था जज़्बा

सारा की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी है। सारा अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें एनसीसी में जाने की प्रेरणा अपनी मां से मिली, जो खुद कभी एनसीसी का हिस्सा रही थीं। लेकिन उनका कुछ सपना अधूरा रह गया था। सारा पांडे ने  बताया - मैंने एनसीसी इसलिए जॉइन की क्योंकि मैं अपनी मां का अधूरा सपना पूरा करना चाहती थी। उन्हें देखकर ही मुझे प्रेरणा मिली और आज मैंने जो भी मुकाम हासिल किया है, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।

देश भर के कैडेट्स में होती है कड़ी प्रतिस्पर्धा

सारा बताती है कि "मैं जब एनसीसी के सेकंड ईयर में थी। एनसीसी कैडेट्स को यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम एग्जाम देने का मौका मिलता है। सबसे पहले हमारा भोपाल में टेस्ट हुआ था। जहां पर ड्रिल टेस्ट, लिखित परीक्षा और ग्रुप डिस्कशन हुआ। फिर मैं आरडीसी के लिए गई, तो वहां पर ऑल इंडिया लेवल पर लिखित परीक्षा ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू हुआ। हमारा इंटरव्यू एडीजी रैंक के अधिकारी ने लिया था। उसके बाद हमारा ड्रिल टेस्ट हुआ। फिर इसी नंबरों के आधार पर रैंक मिलती है और इस रैंक के आधार पर 10 कैडेट का चयन किया जाता है।"

यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम में चयन के लिए काफी कड़ी परीक्षा होती है। 7 एमपी गर्ल्स बटालियन से कई शैक्षणिक संस्थान जुड़े हैं। सबसे पहले यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए कैडेट्स की डिमांड की जाती है। पहले यूनिट स्तर पर फिर बटालियन के बीच में प्रतिस्पर्धा होती है, फिर भोपाल में इंटर ग्रुप चयन के लिए प्रतियोगिता होने के दौरान दो-तीन बार प्रक्रिया होती है। उसमें जब पहली प्रक्रिया में क्लियर कर लेते हैं, तो जो बी सर्टिफिकेट वाले क्रेडिट होते हैं, उनको यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का टेस्ट देने का मौका मिलता है। सारा ने बी सर्टिफिकेट का एग्जाम दिया था। उसके बाद उन्होंने यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम का टेस्ट दिया। जिसमें लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन, ड्रिल टेस्ट होता है। सभी मुकाबलों में सारा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और इसी का परिणाम है कि उनका आरडीसी में भी चयन हुआ।

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न बेबसाइट

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