नेत्रदान से हजारों जिंदगियों

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नेत्रदान से हजारों जिंदगियों
में रोशनी बिखेर रहीं उमा झंवर

 

इंदौर। शहर में नेत्रदान को जनआंदोलन का स्वरूप देने वाली उमा झंवर पिछले डेढ़ दशक से हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। एमके इंटरनेशनल आई बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सेंट्रल जोन एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन के रूप में वे जागरूकता और सेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं।

उमा को इस कार्य की प्रेरणा उनके चाचाजी सम्पत झंवर से मिली। उस समय शहर में आई बैंक नहीं था और डॉक्टरों को कॉर्निया की उपलब्धता के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। इसी समस्या को देखते हुए आई बैंक की स्थापना की गई और इसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर सेवा कार्य शुरू किया।

डॉ. कलाम से मिली नई प्रेरणा

साल 2009 में शुरू हुई इस यात्रा को नई दिशा तब मिली जब पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने आई बैंक का दौरा किया। उमा झंवर याद करती हैं कि डॉ. कलाम ने कहा था कि केवल बड़ा आई बैंक बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि लोगों को घर-घर जाकर नेत्रदान के लिए जागरूक करना भी जरूरी है। उनके ये शब्द आज भी संस्था के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

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पिछले वर्षों में उमा झंवर और उनकी टीम 1,500 से अधिक नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। यह कार्य मुरलीधर किशन गोपाल पारमार्थिक ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित किया जाता है।

15,540 से अधिक कॉर्निया कलेक्शन

आई बैंक अब तक 15,540 से अधिक कॉर्निया कलेक्शन कर चुका है। उमा झंवर का कहना है कि संस्था का लक्ष्य केवल कॉर्निया एकत्र करना नहीं बल्कि उसका सफल प्रत्यारोपण सुनिश्चित करना भी है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सहित देश के 19 राज्यों में जरूरतमंद मरीजों तक कॉर्निया पहुंचाए जा रहे हैं और उनके प्रत्यारोपण का नियमित फॉलोअप भी लिया जाता है। इस कार्य में एयर इंडिया द्वारा निःशुल्क परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

संस्था के माध्यम से एक वर्ष के बच्चे से लेकर 90 वर्ष तक के बुजुर्गों को नई दृष्टि मिल चुकी है।

हर व्यक्ति कर सकता है नेत्रदान

उमा झंवर बताती हैं कि चश्मा लगाने वाले व्यक्ति, मोतियाबिंद या कॉर्निया सर्जरी करा चुके लोग तथा मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। मृत्यु के बाद परिवार के दो सदस्यों की सहमति और केवल 10 से 15 मिनट का समय इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त होता है। घर, अस्पताल या श्मशान- किसी भी स्थान पर नेत्रदान किया जा सकता है।

नेत्रदान जागरूकता के क्षेत्र में संस्था ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। आठ घंटे में 27,870 आई डोनेशन फॉर्म भरवाने का रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

 

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