नेत्रदान-देहदान की अलख जगा

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नेत्रदान-देहदान की अलख जगा
रहीं भोपाल की डॉ. कविता कुमार  

छाया : डॉ. कविता कुमार के फेसबुक अकाउंट से

भोपाल की नेत्र रोग विशेषग्य डॉ. कविता कुमार अंधेरे जीवन को रोशनी बिखेर रहीं हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के नेत्र विभाग की एचओडी व स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन की कन्वीनर डॉ. कविता पिछले 35 वर्षों से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही हैं।

1989 में जीएमसी के नेत्र विभाग से पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान वे नेत्रदान और इसकी अहमियत से परिचित हुई और उन्होंने इस दिशा में जनजागरूकता फैलाने का निश्चय किया। वर्ष 2014 में जब उन्होंने जीएमसी के नेत्र विभाग की कमान संभाली तब साल भर में केवल 7 से 8 नेत्रदान ही होते थे, लेकिन डॉ. कविता के प्रयासों से आज यह संख्या 60 तक पहुंच गई हैं।

भोपाल ऑर्गन डोनेशन सोसाइटी समेत अन्य संगठन के साथ मिलकर 2014 के बाद उन्होंने अंगदान को लेकर प्रदेशभर में कार्यक्रम शुरू किए। इसके बाद साल 2016 में पहला कैडेवर डोनेशन हुआ। वहीं राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के अनुसार साल 2023 में 7 कैडेवर डोनेशन हुए। नेत्रहीनों के लिए उनकी मेहनत वरदान साबित हो रही है। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि आज भोपाल के सात अस्पतालों में ट्रांसप्लांट हो रहे हैं।

संदर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

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