शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय से लगा हुआ है विचारपुर गांव। जिसकी पहचान मिनी ब्राजील के नाम से होती है। अब तो ये गांव दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। विचारपुर गांव को फुटबॉल खिलाड़ियों की नर्सरी भी कहा जाता है। इसी गांव की रहने वाली है सानिया कुंडे, जो नन्ही उम्र में ही फुटबॉल के ऐसे बड़े-बड़े कारनामे कर रही है जो सबका ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
कमाल की है सानिया
विचारपुर गांव के फुटबॉल मैदान में सुबह शाम छोटे से लेकर बड़े फुटबॉल खिलाड़ियों का जमावड़ा लगता है। इस गांव के गली मोहल्ले में आपको फुटबॉल खेलते बड़े बुजुर्ग और बच्चे मिल जाएंगे। इन्हीं में से एक खिलाड़ी है सानिया कुंडे जो पिछले कई सालों से लगातार फुटबॉल खेल रही हैं। सानिया कुंडे को फुटबॉल एक नई पहचान दे रहा है, जिसे लेकर वो काफी क्रेजी भी हैं और कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं। बेस्ट स्ट्राइकर के रूप में भारतीय फुटबॉल टीम में शामिल होना उनका सपना है।
स्ट्राइकर हैं सानिया
फुटबॉल के खेल में स्ट्राइकर का बहुत बड़ा रोल होता है। क्योंकि स्ट्राइकर ही वह खिलाड़ी होता है जो विरोधी टीम के गोल पोस्ट के सबसे करीब खेलता है। अपनी टीम से सबसे आगे की ओर खेलता है। एक तरह से कहें तो स्ट्राइकर को 'गोल मशीन' भी कहा जा सकता है। क्योंकि विरोधी टीम के नेट में फुटबॉल को पहुंचाने का काम स्ट्राइकर ही करता है। सानिया कुंडे भी अपनी टीम से स्ट्राइकर की पोजीशन पर खेलती हैं। उनका सपना है कि वो एक बेस्ट भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी बने और भारतीय महिला फुटबॉल टीम की स्ट्राइकर बनकर दनादन गोल दाग कर देश को मैच जितवा सकें।
तीन नेशनल खेल चुकी
सानिया की उम्र अभी 15 साल है और वो कक्षा नवमीं में पढ़ती हैं। फुटबॉल के खेल में वो तीन नेशनल खेल चुकी हैं। पिछले कई पीढियों से इनका परिवार फुटबॉल खेल रहा है, इनके दादाजी सुरेश कुंडे जिन्हें विचारपुर गांव में फुटबॉल का जनक माना जाता है, वो भी एक अच्छे फुटबॉलर हैं। इनके पिता और चाचा भी अच्छे फुटबॉलर हैं। अब सानिया कुंडे भी उस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। अपने खेल के दम पर अपनी छाप जर्मनी तक छोड़ चुकी हैं।
जर्मनी जा चुकी हैं सानिया
अभी कुछ महीने पहले ही शहडोल जिले के विचार पुर गांव के पांच खिलाड़ी और एक कोच ट्रेनिंग के लिए जर्मनी गए थे। जिसमें दो लड़कियां और तीन लड़के शामिल थे। उन्हें जर्मन फुटबॉल कोच डाइटमार बियर्सडॉर्फर ने बुलाया था। जिसमें कोच के तौर पर लक्ष्मी सहीस, गर्ल्स खिलाड़ियों में सुहानी कोल और सानिया कुंडे और लड़कों में वीरेंद्र बैगा, प्रीतम कुमार और मनीष घंसिया शामिल थे। 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक उनकी ट्रेनिंग हुई । सानिया कुंडे के खेल को देखकर हर कोई उनसे प्रभावित था। इन खिलाड़ियों ने जर्मनी के फुटबॉल क्लब FC Ingolstadt 04 फुटबॉल क्लब में एडवांस ट्रेनिंग हासिल की।
सानिया अपने जमर्नी दौरे को याद करते हुए कहती हैं कि, ''जर्मनी को लेकर उनका अनुभव बहुत ही अच्छा था। जर्मनी में बहुत सारी चीजें उन्हें सीखने को मिली।'' वहां के कोच उनके खेल को लेकर क्या कहते थे? इसे लेकर वो बताती हैं कि, ''वो तो यही कहते थे कि अगर यहां जैसी सुविधाएं वहां इन खिलाड़ियों को मिल पाती तो इनमें से कई खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल तक खेल सकते थे।''
सुनील क्षेत्री हैं आदर्श
सुनील छेत्री फुटबॉल में भारत का बहुत बड़ा नाम हैं, जिसने दुनिया भर में अपनी खास पहचान बनाई है। फुटबॉल खिलाड़ी सानिया कुंडे के रोल मॉडल भी सुनील छेत्री ही हैं। सानिया कुंडे कहती हैं कि, ''उन्हें सुनील छेत्री का खेल बहुत पसंद है, अक्सर वो उनके खेल को देखती हैं और इसीलिए वो भी स्ट्राइकर के पोजीशन पर खेलती हैं। वह भी सुनील छेत्री की तरह ही भारतीय महिला टीम में सेलेक्ट होकर भारतीय महिला फुटबॉल टीम को मैच जितवाना चाहती हैं। इसके लिए वो लगातार मेहनत कर रही हैं, और फुटबॉल के नए-नए ट्रिक सीख रही हैं।''
सानिया इन दिनों विचारपुर गांव में स्थित 'खेलो इंडिया स्माल सेंटर' में ट्रेनिंग कर रही हैं। वहां उन्हें लक्ष्मी सहीस कोचिंग दे रही हैं। कोच लक्ष्मी सहीस बताती हैं कि, ''सानिया कुंडे पिछले कई सालों से यहां प्रैक्टिस कर रही हैं। उनमें फुटबॉल को लेकर एक अलग ही जुनून है। सानिया कुंडे के परिवार में कई पीढ़ी से लोग फुटबॉल खेल रहे हैं। उसके अंदर उम्र के साथ बहुत अच्छी इंप्रूवमेंट है और वह एक बहुत अच्छी प्लेयर बन सकती है।
जर्मनी में ट्रेनिंग के दौरान जितने भी कोच मिले उन्होंने उनका गेम देखकर यही कहा कि इतनी कम उम्र में इतना अच्छा खेलती है, आगे अच्छा कर सकती है, बस उसे कंटीन्यू रखना होगा।'' कोच लक्ष्मी सहीस बताती हैं कि, ''सानिया तीन नेशनल खेल चुकी है, जिसमें जम्मू कश्मीर, चेन्नई और नागालैंड जैसी जगहों पर अपने खेल का जौहर दिखा चुकी हैं। अगर वो इसी तरह लगातार कड़ी मेहनत करती रही तो बहुत आगे तक जा सकती हैं।''
गांव में गर्ल्स के बीच फुटबॉल का क्रेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार अपने मन की बात में इस गांव का जिक्र कर चुके हैं। जिसके बाद से इस गांव की पहचान मिनी ब्राजील के नाम से होने लगी है। एक बार अमेरिकन पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिनी ब्राजील का जिक्र किया था, जिसे सुनकर जर्मन कोच डाइटमार ने यहां के कुछ खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने की पेशकश की थी। जिसके बाद से यह खिलाड़ी जर्मनी ट्रेनिंग के लिए कुछ दिन के लिए पहुंचे हुए थे, उसके बाद जर्मन कोच भी यहां आ चुके हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां फुटबॉल में लड़के तो कमाल कर ही रहे हैं कई नेशनल खेल चुके लेकिन फुटबॉल में यहां की लड़कियां भी कमाल कर चुकी हैं।
सन्दर्भ स्रोत एवं छाया : ईटीवी भारत



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