तलाक मामलों में डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अब विदेश में रह रहे दंपत्ति भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से गवाही दे सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
यह मामला आपसी सहमति से तलाक से जुड़ा है, जो हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13B के तहत दायर किया गया था। याचिकाकर्ता महिला आयरलैंड में रह रही है, जबकि उसका पति अमेरिका में निवास करता है। दोनों ने जोधपुर की फैमिली कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही देने की अनुमति मांगी थी।
फैमिली कोर्ट ने क्यों खारिज किया आवेदन
फैमिली कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम 2020 का हवाला देते हुए कहा कि विदेश में गवाही के लिए भारतीय दूतावास या उच्चायोग में कोऑर्डिनेटर की उपस्थिति जरूरी है। इसी आधार पर आवेदन खारिज कर दिया गया।
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हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस अरूण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल शामिल थे, ने इस फैसले को अत्यधिक तकनीकी बताया। कोर्ट ने कहा न्याय प्रक्रिया का उद्देश्य न्याय देना है, न कि उसे जटिल बनाना, अलग-अलग टाइम ज़ोन में रहने वाले पक्षकारों के लिए दूतावास में उपस्थित होना व्यावहारिक नहीं, नियमों में लचीलापन मौजूद है और उसका उपयोग किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने 4 फरवरी 2026 के फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्षकार अपने-अपने निवास स्थान से VC के माध्यम से गवाही दे सकते हैं। पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए प्रतिनिधि भी कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं। पहचान सत्यापन के लिए फैमिली कोर्ट आवश्यक शर्तें तय कर सकता है



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