बिलासपुर हाईकोर्ट  : व्हाट्सएप चैट और

blog-img

बिलासपुर हाईकोर्ट  : व्हाट्सएप चैट और
कॉल रिकॉर्डिंग सबूत के रूप में मान्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के आपसी झगड़ों और तलाक के मामलों को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब वैवाहिक विवादों में व्हाट्सएप (WhatsApp) चैट और फोन की कॉल रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मोबाइल का डेटा सच्चाई सामने लाने में मददगार हो सकता है। 

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला रायपुर के एक जोड़े से जुड़ा है। पति ने अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी दी थी। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी के किसी और के साथ संबंध हैं और इसे साबित करने के लिए उसने कोर्ट में पत्नी के व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग पेश करने की इजाजत मांगी। पत्नी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पति ने उसका फोन हैक करके ये सब निकाला है, जो उसकी 'प्राइवेसी' (निजता) का उल्लंघन है। इसके बाद जब फैमिली कोर्ट ने पति की बात मान ली, तो पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 

ये भी पढ़िए ....

राजस्थान हाईकोर्ट : अब विदेश से भी VC के जरिए हो सकेगी तलाक मामले में गवाही

जयपुर फैमिली कोर्ट : सोशल मीडिया पर व्यवहार बना मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

निजता और निष्पक्ष सुनवाई में संतुलन

हाईकोर्ट ने इस मामले में बहुत ही व्यावहारिक रुख अपनाया। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार (Right to Privacy) की महत्ता को स्वीकार किया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका हवाला देकर जरूरी सबूतों को ही रोक दिया जाए। अदालत का मानना है कि 'निष्पक्ष सुनवाई' का हक भी उतना ही जरूरी है। अगर सच जानने के लिए मोबाइल के मैसेज या कॉल रिकॉर्डिंग जरूरी हैं, तो उन्हें केवल प्राइवेसी के नाम पर खारिज नहीं किया जा सकता। 

फैमिली कोर्ट के पास है विशेष पावर

अदालत ने यह भी साफ किया कि फैमिली कोर्ट के पास कुछ खास कानून (धारा 14) के तहत यह पावर होती है कि वह किसी भी ऐसी चीज को सबूत मान सकता है, जो केस सुलझाने में मदद करे। भले ही उस सबूत को जुटाने का तरीका तकनीकी रूप से पूरी तरह सही न हो, लेकिन अगर वह सच के करीब ले जाता है, तो कोर्ट उसे स्वीकार कर सकता है। 

क्यों खास है यह फैसला?

आज के डिजिटल दौर में यह फैसला बहुत मायने रखता है। कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि मोबाइल डेटा अब आपसी विवादों में सबसे बड़ा गवाह बन चुका है। इसलिए प्राइवेसी के अधिकार और न्याय पाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि अगर डिजिटल सबूत सीधे तौर पर केस से जुड़े हैं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है। अब इस फैसले के बाद आने वाले समय में वैवाहिक मुकदमों में डिजिटल सबूतों की भूमिका और भी अहम हो जाएगी।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



अहमदाबाद फैमिली कोर्ट: पति की सहमति के
अदालती फैसले

अहमदाबाद फैमिली कोर्ट: पति की सहमति के , बिना 'खुला' के जरिए तलाक की इजाजत,

अदालत ने एक दंपती की शादी को खत्म घोषित कर दिया है. इसके साथ ही नाबालिग बेटे की कस्टडी मां को सौंप दी गई है.

जयपुर फैमिली कोर्ट : सोशल मीडिया पर व्यवहार बना
अदालती फैसले

जयपुर फैमिली कोर्ट : सोशल मीडिया पर व्यवहार बना , मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

जयपुर फैमिली कोर्ट ने एक मामले में पत्नी के सोशल मीडिया व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति को तलाक की डिक्री प्रदान...

सरकारी पैनलों में महिला वकीलों को 30%
अदालती फैसले

सरकारी पैनलों में महिला वकीलों को 30% , आरक्षण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सरकारी कानूनी पैनलों और लॉ ऑफिसर पदों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और र...

“पत्नी को छोड़ना जिम्मेदारी से भागने का बहाना”: कलकत्ता हाईकोर्ट
अदालती फैसले

“पत्नी को छोड़ना जिम्मेदारी से भागने का बहाना”: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिव्यांग महिला को पुलिस सुरक्षा में ससुराल भेजने का आदेश देते हुए कहा कि पति पत्नी की बीमारी का बहान...

उड़ीसा हाईकोर्ट : शिक्षित और सक्षम पति
अदालती फैसले

उड़ीसा हाईकोर्ट : शिक्षित और सक्षम पति , पत्नी के भरण-पोषण से नहीं बच सकता

कोर्ट ने कहा कि केवल financial problem या बेरोजगारी का दावा कर कानूनी जिम्मेदारी से बचना स्वीकार नहीं किया जा सकता।