सरकारी पैनलों में महिला वकीलों को 30%

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सरकारी पैनलों में महिला वकीलों को 30%
आरक्षण की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली। महिला वकीलों को सरकारी पैनलों और विधि अधिकारी पदों पर 30 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मुद्दे को न्याय व्यवस्था में बढ़ती लैंगिक असमानता से जुड़ा गंभीर विषय माना है।

चीफ जस्टिस Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi की पीठ ने ‘लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट’ की याचिका पर नोटिस जारी किया।

महिला वकीलों की कम भागीदारी पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता Vikas Singh ने अदालत में कहा कि महिला वकीलों की स्थिति पर किए गए सर्वेक्षण के बाद यह याचिका दायर की गई है। उनका कहना था कि सरकारी पैनलों में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना उनके संवैधानिक अधिकारों के लिए जरूरी है।

याचिका में बताया गया कि देश को आजादी मिले 75 साल से अधिक समय हो चुके हैं लेकिन अब तक कोई महिला अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल नहीं बनी है।

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न्यायपालिका में महिलाओं की स्थिति

वर्ष 1989 में M. Fathima Beevi देश की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज बनी थीं। इसके बाद 35 वर्षों में केवल 11 महिलाएं ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकी हैं।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या लगभग 5.88 प्रतिशत है जबकि हाई कोर्ट्स में यह आंकड़ा करीब 13.76 प्रतिशत बताया गया है।

सीजेआई ने साझा किया अनुभव

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने तेलंगाना के एक बार निकाय का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 19 हजार वकीलों में करीब 2 हजार महिला वकील हैं लेकिन नेतृत्व पदों पर महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है।

उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा

याचिका में कहा गया कि देश में 15.4 लाख नामांकित वकीलों में केवल 2.84 लाख महिलाएं हैं। बड़ी संख्या में छात्राएं लॉ कॉलेजों में दाखिला ले रही हैं लेकिन पेशेवर स्तर पर उन्हें अवसरों की कमी और व्यवस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट पैनलों सहित सभी सरकारी कानूनी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों में महिलाओं को कम से कम 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।

यह मांग संविधान के अनुच्छेद 14 15(3) 19(1)(जी) और 21 के तहत महिलाओं को समान अवसर और सम्मानजनक पेशेवर अधिकार दिलाने से जुड़ी बताई गई है।

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