राजस्थान हाईकोर्ट : सरकारी नौकरी में

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राजस्थान हाईकोर्ट : सरकारी नौकरी में
अलग तैनाती तलाक का आधार नहीं

Rajasthan High Court ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकारी नौकरी में पति-पत्नी की अलग-अलग जगहों पर तैनाती होना सामान्य बात है। केवल अलग रहना अपने आप में परित्याग नहीं माना जा सकता और न ही यह तलाक का आधार बन सकता है।

हर विवाद को नहीं माना जा सकता क्रूरता

जस्टिस Arun Monga और जस्टिस Sandeep Shah की खंडपीठ ने कहा कि हर घरेलू झगड़ा या कटु शब्द क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। अदालत के अनुसार, क्रूरता इतनी गंभीर होनी चाहिए जिससे पीड़ित पक्ष को साथ रहना असुरक्षित लगे।

फैमिली कोर्ट के फैसले को दी मंजूरी

मामला उस अपील से जुड़ा था जिसमें पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा खारिज की गई तलाक याचिका को चुनौती दी थी। पति का दावा था कि पत्नी सरकारी नौकरी के कारण दूसरे स्थान पर तैनात थी और दोनों 27 वर्षों से अलग रह रहे थे।

दूसरी महिला से किया था नाता विवाह

पति ने अदालत को बताया कि पत्नी की सहमति से उसने दूसरी महिला के साथ नाता विवाह कर लिया था। उसने यह भी कहा कि उसने वैवाहिक संबंध सुधारने की कोशिश की लेकिन पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया।

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अदालत ने पति के तर्क खारिज किए

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर कहा कि इस पूरे मामले में गलती स्वयं पति की थी। अदालत ने कहा कि पति अपने ही गलत आचरण का लाभ उठाकर तलाक मांग रहा है।

दूसरी शादी के बाद पत्नी की प्रतिक्रिया स्वाभाविक

अदालत ने स्पष्ट कहा कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना और फिर उसी स्थिति को तलाक का आधार बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दूसरी शादी के बाद पत्नी का विरोध करना और साथ रहने से इनकार करना स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।

पत्नी की शिकायत को नहीं माना क्रूरता

कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पुलिस में शिकायत करना या पति के साथ रहने से इनकार करना पति के अपने व्यवहार का परिणाम था। इसलिए इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक याचिका

इन टिप्पणियों के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की तलाक याचिका खारिज कर दी।

 

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