जयपुर फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी का सोशल मीडिया व्यवहार और आपत्तिजनक गतिविधियाँ मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आती हैं। इसी आधार पर अदालत ने पति को तलाक की डिक्री प्रदान कर दी।
सोशल मीडिया पोस्ट बना विवाद की वजह
मामले में पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने एक अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा कीं। अदालत ने माना कि इस प्रकार का व्यवहार वैवाहिक विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
ये भी पढ़िए ...
बॉम्बे हाईकोर्ट : पत्नी की व्हाट्सएप चैट क्रूरता साबित नहीं करती
बिलासपुर हाईकोर्ट : व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग सबूत के रूप में मान्य
गैर मर्दों से अश्लील चैट पति के साथ क्रूरता : मप्र हाईकोर्ट
मानसिक उत्पीड़न के अन्य कारण
कोर्ट ने यह भी पाया कि:
• पत्नी द्वारा पति पर माता-पिता से अलग रहने का दबाव
• पति और उसके परिवार के प्रति अपमानजनक भाषा
• पहले सहमति के बाद याचिका वापस लेना
इन सभी को मिलाकर मानसिक क्रूरता माना गया।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा नहीं होती, बल्कि यह व्यवहार, शब्दों और डिजिटल गतिविधियों से भी उत्पन्न हो सकती है।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवाह विच्छेद यानी तलाक की अनुमति दे दी।



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *