पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी करने वाली महिला अपने कथित दूसरे पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (धारा 498A) का मामला दर्ज नहीं कर सकती।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला फिरोजपुर के एक मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक महिला की शिकायत पर उसके कथित दूसरे पति के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि:
• उसका विवाह हरजिंदर सिंह से हुआ था
• विवाह के बाद दहेज के लिए दबाव बनाया गया
• डोली के समय कार की मांग की गई
• परिवार ने 3 लाख रुपये दिए
• इसके बाद भी लगातार मारपीट और उत्पीड़न हुआ
मजिस्ट्रेट ने इन आरोपों के आधार पर समन जारी कर दिए थे।
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हाईकोर्ट में क्या हुआ?
याचिकाकर्ता (कथित पति) ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि
• महिला का पहले से विवाह 2005 में गुरमीत सिंह से हुआ था
• 2013 में तलाक की याचिका दायर की गई, लेकिन खारिज हो गई
• महिला का एक और पूर्व विवाह भी सामने आया
• इन दोनों शादियों का कानूनी तलाक नहीं हुआ था
इसलिए महिला को उसकी वैध पत्नी नहीं माना जा सकता।
कोर्ट का स्पष्ट निर्णय
जस्टिस शालिनी नागपाल ने अपने फैसले में कहा कि IPC की धारा 498A केवल कानूनी रूप से वैध विवाह पर लागू होती है, 'पति' का अर्थ वही व्यक्ति है जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध रूप से विवाहित हो और बिना तलाक के किया गया दूसरा विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं होता।
अदालत ने कहा कि यदि पति या पत्नी बिना तलाक लिए किसी और से विवाह करते हैं, तो वह नया संबंध कानूनन वैध नहीं माना जाएगा।
क्या हुआ अंतिम फैसला?
हाईकोर्ट ने
• फिरोजपुर मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया
• महिला की शिकायत को कानूनी रूप से असंगत माना
क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय साफ करता है कि
• 498A का उपयोग केवल कानूनी वैवाहिक संबंध में ही किया जा सकता है
• अवैध या बिना तलाक के किए गए विवाह पर यह कानून लागू नहीं होगा
• इससे कानून के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी



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