हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता

blog-img

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता
बच्चे के अधिकार नहीं छीन सकता

 शिमला। Himachal Pradesh High Court ने बच्चों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तलाक के समय माता-पिता के बीच हुआ कोई भी आपसी समझौता नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) के अधिकार को न तो सीमित कर सकता है और न ही समाप्त।

न्यायाधीश Vivek Singh Thakur और Ranjan Sharma की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के बीच हुआ समझौता बच्चे की स्वतंत्र सहमति से नहीं होता, इसलिए उससे बच्चे के कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं हो सकते।

ये भी पढ़िए---

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : तलाक के बाद भी बच्चों पर मां का अधिकार

दिल्ली हाईकोर्ट : बच्चों के भरण-पोषण पिता की जिम्मेदारी, चाहे मां ज्यादा क्‍यों न कमाती हो

हिमाचल हाइकोर्ट : पिता अपने बालिग बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य

अदालत ने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं और बच्चे की जरूरतें भी बढ़ती हैं। ऐसे में गुजारा भत्ते में पुनर्विचार और वृद्धि पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में तय की गई 1,500 रुपये की राशि वर्तमान समय में महंगाई और आवश्यक खर्चों के मुकाबले बेहद कम है, इसलिए बच्ची 2,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता पाने की हकदार है।

कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही और न्यायसंगत ठहराते हुए पिता तिलक राज की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने पहले आपसी सहमति से तलाक के दौरान तय राशि को बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा कि पिता अपनी बेटी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है , लिंग चयन, जांच कानून सख्त हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिंग चयन जैसी अवैध प्रथाएं अब भी जारी हैं। कोर्ट ने कहा- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं जर...

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला , टीचर्स को भी मिलेगी चाइल्ड केयर लीव

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल की महिला शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया

सुप्रीम कोर्ट : घरों की महिलाएँ सिर्फ घर
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : घरों की महिलाएँ सिर्फ घर , नहीं संभालतीं राष्ट्र-निर्माण भी करती हैं

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सड़क हादसे में गृहिणी की मौत के 25 साल बाद पति को 62.77 लाख रुपये मुआवजा, अन्य मामलों म...

पढ़ाई जारी रखने के अधिकार के लिए
अदालती फैसले

पढ़ाई जारी रखने के अधिकार के लिए , इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंची विवाहिता

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पढ़ाई जारी रखने की मांग करने वाली विवाहिता के मामले को मध्यस्थता केंद्र भेजते हुए अंतरिम सुरक्षा द...

दिल्ली हाईकोर्ट :  बेरोजगार बता बच्चे के खर्च से नहीं बच सकता पति
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट :  बेरोजगार बता बच्चे के खर्च से नहीं बच सकता पति

कोर्ट ने कहा, “अपने खर्चों का प्रबंधन करना प्रतिवादी यानी पति की जिम्मेदारी है।