पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : बुज़ुर्ग माँ को देना होगा गुजारा-भत्ता

blog-img

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : बुज़ुर्ग माँ को देना होगा गुजारा-भत्ता

Punjab and Haryana High Court ने एक अहम फैसले में दो बेटों को अपनी बुज़ुर्ग विधवा माँ को हर महीने ₹30,000 अंतरिम गुजारा-भत्ता देने के आदेश को सही ठहराया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यह राशि सीधे बेटों की सैलरी और बैंक अकाउंट से कटकर माँ के खाते में ट्रांसफर की जाए ताकि आदेश का सही पालन सुनिश्चित हो सके।

‘मातृ देवो भव’ का दिया संदेश

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Neerja Kalson ने कहा कि माता-पिता का पालन-पोषण करना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का मूल मूल्य है।

कोर्ट ने कहा:

• “मातृ देवो भव केवल एक उपदेश नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की बुनियाद है।”

• अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जो समाज अपने बुज़ुर्गों की उपेक्षा करता है, वह अपने भविष्य को कमजोर करता है। 

माँ को बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस माँ ने पूरी जिंदगी अपने बच्चों की परवरिश प्यार और त्याग के साथ की, उसे बुढ़ापे में अकेला और परेशान नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने कहा “जिन हाथों ने बच्चों को संभाला, बुढ़ापे में उन हाथों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।”

अदालत ने क्या कहा? 

कोर्ट ने माना कि कई मामलों में बुज़ुर्ग माता-पिता को भरण-पोषण पाने के लिए बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी होती है।

अदालत ने साफ कहा कि “कानून वहां हस्तक्षेप करता है जहां अंतरात्मा विफल हो जाती है।”

ये भी पढ़िए ...

सुप्रीम कोर्ट : बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल न करने पर संपत्ति से बेदखल हो सकते हैं बच्चे

सुप्रीम कोर्ट : जायदाद लेकर बुजुर्ग मां-बाप को छोड़ देने वाले बेटों को गंवानी पड़ सकती है संपत्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट : बुजुर्ग माता-पिता के प्रति क्रूरता उनके जीवन के मूल अधिकारों का उल्लंघन

 

क्या था पूरा मामला?

यह पुनर्विचार याचिका दो बेटों द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने भिवानी फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी विधवा माँ को CrPC की धारा 125 के तहत हर महीने ₹30,000 अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

माँ ने अदालत को बताया कि उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। उन्हें वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत ₹10,000 और वृद्धावस्था पेंशन के रूप में ₹2,500 मिलते हैं, लेकिन यह राशि इलाज और रोजमर्रा के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है।

बेटों की दलील कोर्ट ने खारिज की

बेटों ने अदालत में कहा कि उनकी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं, इसलिए भरण-पोषण की राशि कम की जाए। लेकिन हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात बेटों की आर्थिक क्षमता है, न कि उनकी व्यक्तिगत परेशानियां या विरासत।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



गुवाहाटी हाईकोर्ट : बच्चों की प्रताड़ना से तंग बुजुर्गों को
अदालती फैसले

गुवाहाटी हाईकोर्ट : बच्चों की प्रताड़ना से तंग बुजुर्गों को , बेदखली के अधिकार के लिए ‘कंगाल’ होना जरूरी नहीं

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने प्रताड़ित या उपेक्षा करने वाले बच्चों को घर से बेदखल करा...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : वैध पत्नी को
अदालती फैसले

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : वैध पत्नी को , ही मिलेगा फैमिली पेंशन अधिकार

हाईकोर्ट ने साफ किया कि फैमिली पेंशन का अधिकार केवल वैध पत्नी को ही मिलेगा और अवैध विवाह से कोई लाभ नहीं दिया जाएगा।

36 साल से अलग रह रहे दंपती के तलाक पर झारखंड हाईकोर्ट की मुहर
अदालती फैसले

36 साल से अलग रह रहे दंपती के तलाक पर झारखंड हाईकोर्ट की मुहर

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- अब यह रिश्ता ‘डेड वुड मैरिज’ बन चुका है. पत्नी का गुजारा भत्ता 10 लाख से बढ़ाकर 40 लाख

इलाहाबाद हाईकोर्ट : हर लव स्टोरी
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : हर लव स्टोरी , का अंत शादी हो, यह जरूरी नहीं

​​​​​​​ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हर प्रेम संबंध का अंत शादी में होना जरूरी नहीं है और सहमति से बने संबंध को केवल शादी...

छग  हाईकोर्ट : बालिग बेटी को भी मिलेगा पिता से गुजारा भत्ता
अदालती फैसले

छग हाईकोर्ट : बालिग बेटी को भी मिलेगा पिता से गुजारा भत्ता

हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि अविवाहित बालिग बेटी को भी पिता से भरण-पोषण पाने का अधिकार है और यह पिता की कानूनी व सामाजिक ज...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : अपनी पसंद से शादी करना मौलिक अधिकार
अदालती फैसले

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : अपनी पसंद से शादी करना मौलिक अधिकार

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत पसंद...