छिंदवाड़ा के पांजरा गांव की ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनोखी पहल कर रही हैं। गांव की महिलाओं ने ऐसी सीड बॉल तैयार की है, जो बंजर जमीन को भी हरियाली में बदल सकती है। लगातार घटते जंगल और सूखती धरती को बचाने के लिए शुरू हुई यह पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है।
महिलाओं का कहना है कि इस काम से न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि भविष्य में रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
बिना लागत तैयार हो रही हैं सीड बॉल
ग्रामीण महिलाएं खेत की मिट्टी, चूल्हे की राख और गोबर की खाद को मिलाकर आटे की तरह गूंथती हैं। इसके बाद छोटे-छोटे लड्डू बनाकर उनमें अलग-अलग पेड़ों के बीज डाले जाते हैं। सूखने के बाद ये सीड बॉल तैयार हो जाती हैं।
गांव की महिला शांता बघेल बताती हैं कि इन सीड बॉल को बनाने में किसी तरह का खर्च नहीं आता। घर और खेतों में आसानी से मिलने वाली चीजों से इन्हें तैयार किया जाता है। उनका कहना है कि इससे धरती हरी-भरी होगी और लोगों को स्वच्छ हवा व बेहतर पर्यावरण मिलेगा।
सिर्फ देसी बीजों का इस्तेमाल
करीब दो महीने से इस काम में जुटी मीरा बघेल के अनुसार महिलाएं अपने घरों और खेतों के आसपास मिलने वाले देसी बीजों का उपयोग करती हैं। इनमें मुख्य रूप से इमली, अपराजिता, अमलतास और बबूल जैसे पौधों के बीज शामिल हैं। महिलाओं का मानना है कि स्थानीय जलवायु के अनुसार देसी बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और मजबूत पौधे बनते हैं। अब वे इन सीड बॉल को बाजार में बेचने की तैयारी भी कर रही हैं ताकि लोगों को खेतों और बंजर जमीन में पौधे लगाने का आसान विकल्प मिल सके।
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10 हजार से ज्यादा सीड बॉल तैयार
महिलाओं ने अब तक करीब 10 हजार सीड बॉल तैयार कर ली हैं। इनका उपयोग खेतों की फेंसिंग और खाली जमीन को हरा-भरा बनाने में किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य तौर पर पेड़ों के हजारों बीज जमीन पर गिरकर खराब हो जाते हैं, लेकिन सीड बॉल तकनीक से बीज सुरक्षित रहते हैं और पौधे बनने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
क्या हैं सीड बॉल के फायदे?
वनस्पति शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा के मुताबिक सीड बॉल तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद कारगर है।
सीड बॉल के प्रमुख फायदे
• बंजर, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में आसानी से पौधे उगाए जा सकते हैं।
• मिट्टी और गोबर की परत बीज को धूप, कीड़ों और पक्षियों से बचाती है।
• कम पानी में भी बीज अंकुरित होने की संभावना बढ़ जाती है।
• खेत की जुताई या खुदाई की जरूरत नहीं पड़ती।
• कटे जंगलों और सूखी जमीन को दोबारा हरा-भरा बनाने में मदद मिलती है।
• पेड़ अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर पर्यावरण शुद्ध करते हैं।
बारिश से पहले जमीन में डाली जाएंगी सीड बॉल
महिलाओं ने बताया कि बारिश शुरू होने से पहले इन सीड बॉल को खेतों और खाली जमीन पर फैला दिया जाएगा। पहली बारिश के बाद मिट्टी गीली होते ही बीज अंकुरित होकर पौधों में बदल जाएंगे।
उनका कहना है कि सीधे बीज डालने पर गर्मी और कीड़ों के कारण नुकसान होता है, जबकि सीड बॉल बीजों को सुरक्षित रखती है। साथ ही, जो पौधे अपनी जगह पर ही जड़ें बनाते हैं, वे ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक जीवित रहते हैं।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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