क्रिकेटर सौम्या : जिनकी जिद और जुनून

blog-img

क्रिकेटर सौम्या : जिनकी जिद और जुनून
ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

छाया : स्व सम्प्रेषित 

 

• लड़कों के साथ शुरू की थी प्रैक्टिस... अब अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उप कप्तान 

• भोपाल की पहली महिला क्रिकेटर, जिन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी


• सीमा चौबे

खुली आँखों से सपने देखो और उन्हें सच करने में जी-जान से जुट जाओ, तो मंजिल मिल ही जाती है। ये साबित किया है छोटी उम्र में बड़े कारनामे दिखाने वाली भोपाल की सौम्या तिवारी ने। उसने बचपन से ही क्रिकेटर बनने का सपना देखा और 11 साल की उम्र में शुरुआत कर पांच-छ: सालों में ही इतिहास रच डाला, जब उसने भारतीय क्रिकेट अंडर-19 महिला टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। सौम्या भोपाल की पहली महिला क्रिकेटर है, जिन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी है। अब वह भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम की उपकप्तान है।

अपने पिता को क्रिकेट खेलते देख क्रिकेटर बनने की जिद और जुनून के चलते भोपाल के अरेरा क्रिकेट अकादमी में कोच से मिले प्रशिक्षण और अपनी मेहनत से कम समय में ही सौम्या ने ये मुकाम हासिल किया है। 5 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलने का शौक रखने वाली सौम्या का जन्म 11 मार्च 2005 को भोपाल में हुआ। उनके पिता श्री मनीष तिवारी कलेक्ट्रेट ऑफिस में निर्वाचन शाखा में पदस्थ हैं, जबकि मां श्रीमती भारती तिवारी गृहिणी हैं। बड़ी बहन साक्षी बैंक में नौकरी करती हैं। सौम्या के पिता ख़ुद भी क्रिकेट खेलते थे, लेकिन एक हादसे के बाद उनका पेशेवर क्रिकेट खेलने का सपना टूट गया। दो संतानों में छोटी सौम्या ने जब बोलना और समझना शुरू किया, तभी से उसे क्रिकेट लुभाने लगा था। दरअसल घर में सभी क्रिकेट के दीवाने हैं, उस समय टीवी पर क्रिकेट देखकर बोलती थी ‘मैं भी क्रिकेट खेलूंगा।’ उनके पिता बताते हैं जब वे शाहजहांनाबाद में रहते थे उस समय मोहल्ला क्रिकेट में बच्चे सौम्या को यह कहकर अपने साथ नहीं खिलाते थे कि जितना बड़ा हमारा बैट है, उतना तो तुम्हारा वजन भी नहीं है। तब सौम्या ने घर में ही मोगरी से क्रिकेट खेलना शुरू किया। बाद में अपनी बहन और बच्चों के साथ मोहल्ले के मैदान में खेलने लगी।

वर्ष 2015 में शाहजहांनाबाद से गौतम नगर आने के बाद जब सौम्या को क्रिकेट खेलने के लिए कोई बेहतर जगह नहीं मिली तो उसने क्रिकेट अकादमी जाने की ज़िद की, जिसे पूरा किया उसकी बड़ी बहन साक्षी ने। साक्षी घर में बिना बताये सौम्या को लेकर भोपाल के अरेरा क्रिकेट अकादमी पहुंची और कोच श्री सुरेश चेनानी जी से मिली, लेकिन उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि यहां सब लड़के ही हैं, तुम्हारे लिए मुश्किल होगा। घर आकर फिर उसने अपनी बहन से ज़िद की, मुझे तो क्रिकेट ही खेलना है। बहन उसे दोबारा अकादमी लेकर पहुंची, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। दोनों बहनों ने हार नहीं मानी और बार-बार कोच के पास पहुंच जातीं और खूब आग्रह करती। आखिरकार साक्षी सौम्या का अकादमी में दाखिला करवाकर ही मानीं। कोच ने सौम्या को जूनियर ग्रुप में शामिल कर लिया। 15 दिनों बाद इसी मैदान पर अंडर-14 इंटर अकेडमी लड़कों का टूर्नामेंट होने वाला था। सौम्या ने इस मैच में उसे शामिल करने की इच्छा जाहिर की, लेकिन कोच ने यह कहते हुए मना कर दिया कि ये प्रैक्टिस नहीं, टूर्नामेंट मैच है और तुम तो अभी सीख ही रही हो। लेकिन सौम्या हार मानने वालों में से नहीं थी। वो लगातार कोच से मैच में शामिल करने का आग्रह करती रही। आखिरकार उसे इस मैच में फ़ील्डिंग करने का मौक़ा मिल गया और कोच की उम्मीदों के विपरीत उसने उस मैच में लड़कों से कहीं ज़्यादा अच्छी फील्डिंग की। इसके बाद श्री चेनानी ने इसे ऑफ़ स्पिनर के तौर पर तैयार किया। 

इसके बाद स्कूल नेशनल के लिए उसका चयन हुआ जिसे खेलने वह खंडवा गई। इसी दौरान भोपाल के मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में लड़कों के अंडर-14 टूर्नामेंट में सौम्या ने 6 ओवर में मात्र 18 रन देकर 6 विकेट लेकर सभी को आश्चर्य में डाल दिया। सौम्या के इस प्रदर्शन के बाद कोच ने गेंदबाजी के साथ-साथ उसकी बैटिंग पर भी ध्यान दिया और ऑल राउंडर के रूप में उसे तैयार किया। एक साल बाद ऑल सेंट्स कॉलेज में अंडर 14 टूर्नामेंट के पहले मैच में ही सौम्या ने सीहोर के खिलाफ 100 रनों की पारी खेली। भोपाल अंडर-19 टीम से संभाग स्तरीय टूर्नामेंट खेल के बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में माहिर सौम्या वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश अंडर-19 टीम में जगह बनाने में कामयाब हो गई। इसी वर्ष सीनियर टीम में शामिल होने के बाद उसने राज्य स्तरीय पहला मैच ग्वालियर में खेला, तब वह महज 12 साल की थी। स्टेट अंडर-19 टीम की कप्तानी करते हुए उसने चैलेंजर्स ट्रॉफी भी जिताई और इस तरह प्रोफेशनल क्रिकेट का सफर शुरू हुआ।

पांच सालों तक भोपाल और मध्यप्रदेश के लिए लगातार खेलने के बाद उसके प्रदर्शन पर वर्ष 2022 में नेशनल कोचिंग सेंटर (एनसीए) की नज़र पड़ी और वहां से सौम्या का करियर ट्रैक पर आ गया। वे नेशनल टीम के लिए चुन ली गईं। एनसीए के विभिन्न टूर्नामेंट में सौम्या ने अपने खेल से सभी को इतना प्रभावित कि श्रीलंका और वेस्टइंडीज के अलावा भारत ‘ए’ और भारत ‘बी’ के बीच खेले गए चतुष्कोणीय श्रृंखला में उन्हें भारत ‘ए’ का उपकप्‍तान बनाया गया। अपने पहले इंटरनेशनल मैच में ही सौम्या ने 52 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए भारत की विजय में अहम योगदान दिया। चार देशों की महिला अंडर-19 टी-20 की इस श्रृंखला सौम्या ने 102 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। इसके पहले न्यूजीलैंड के साथ 5 मैचों की श्रृंखला में भी उसने ढेर सारे रन बटोरे। वर्ष 2023 जनवरी में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए आईसीसी वूमंस अंडर 19 में वर्ल्ड वर्ल्ड कप जिताने में उनकी मुख्य भूमिका रही।

क्रिकेट और पढ़ाई को एक साथ मैनेज करने के सवाल पर सौम्या ने बताया कि जब आठवीं से क्रिकेट खेलना शुरू किया उस समय पढ़ाई और खेल में तालमेल बैठाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था, लेकिन धीरे-धीरे जब उन्होंने खेल में अच्छा प्रदर्शन किया तो स्कूल से सहयोग भी मिलने लगा। सौम्या अभी 12वीं क्लास में हैं। उन्होंने बताया कि अंडर-19 खेलते समय उन्हें 12वीं के नोट्स मिल गए थे। इसके अलावा टीचर्स भी ऑनलाइन क्लासेस करवा देते थे, जिससे उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं होती थी। सौम्या बताती है उनकी बहन और पापा ने उनके लिए बहुत मेहनत की है हर समय मेरा साथ देने के लिए मैं अपने माता-पिता और बड़ी बहन की शुक्रगुजार हूँ। वही मेरी इस कामयाबी में मेरे क्रिकेट गुरु श्री सुरेश चेनानी का अहम किरदार है।

'अगर क्रिकेटर नहीं होती तो क्या बनती' के सवाल पर सौम्या कहती है - 'खेल के ही किसी अन्य क्षेत्र में करियर बनाती'। ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के साथ ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाली सौम्या का पसंदीदा क्रिकेटर विराट कोहली है तो महिला क्रिकेट टीम में उसे स्मृति मंधाना काफी पसंद हैं। क्रिकेट के अलावा सौम्या को टेबल टेनिस, स्केचिंग, पेंटिंग का काफी ज्यादा शौक है। लिखने का भी शौक उसे है, जिसे पूरा करने के लिए वह एक पर्सनल डायरी लिखती है। सौम्या अपनी फिटनेस का भी खास ध्यान रखती हैं और हर दिन एक्सरसाइज करती हैं। वह कहती है मेरे दो सपने हैं - एक तो विराट कोहली से मिलना, दूसरा देश का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय सीनियर महिला क्रिकेट टीम की ओर से खेलना। 5 माह बाद ही घरेलू सीजन (सीनियर और अंडर 19 टूर्नामेंट) शुरू होने वाले हैं इसलिए पूरा फोकस अभी उसी पर है यहाँ अच्छा प्रदर्शन कर आगे जो टूर्नामेंट (चैलेंजर्स ट्रॉफी जोनल ट्रॉफी इसके बाद सीनियर इंडिया टीम) होंगे उसमें अपनी जगह पक्की करना है।

सौम्या के कोच सुरेश चेनानी सौम्या की प्रतिभा से बेहद संतुष्ट और खुश हैं। वे कहते हैं ‘पहले दिन से ही सौम्या ने साबित कर दिया था कि वो देश के लिए खेलेगी। हालांकि सौम्या जब पहली बार 2015 में मेरे पास क्रिकेट सीखने आई थी, उस समय मैंने उसे प्रशिक्षण देने से मना कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद वह कई दिनों तक लगातार आती रही। कई चक्कर लगाने के बाद  मैंने महसूस किया कि क्रिकेट को लेकर इसका जुनून यूं ही नहीं है। मैंने अपने सहायक को इसका खेल देखने के लिए कह दिया, जब सहायक ने बताया कि ये लड़की हमउम्र लड़कों के मुकाबले फील्डिंग बहुत अच्छी करती है, तब मुझे लगा इसके साथ मेहनत की जा सकती है। सौम्या ने जब छह साल पहले लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया था, उस समय प्रतिस्पर्धा करने के लिए वहां कोई लड़कियां नहीं थीं। लड़कों के साथ टूर्नामेंट खेलना बड़ी बात थी। महज 6 साल के प्रशिक्षण में सौम्या ऑलराउंडर बन गई हैं। वो ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के साथ ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करती है। इसने कई बार 5 और 6 विकेट लेकर खुद को साबित किया है। वे बताते हैं इसका खेल देख दूसरी एकेडमी वाले डरने लगे। एक बार तो टीम ने एक पारी के बाद सौम्या को खिलाने का विरोध कर दिया। मैं तो टीम का नाम टूर्नामेंट से वापस ले रहा था, लेकिन सौम्या ने खेल भावना दिखाकर मैच नहीं खेला। सौम्या ने स्कूल, डिस्ट्रिक्ट, डिवीजन से लेकर स्टेट लेवल पर हरफनमौला प्रदर्शन किया। अंडर-19 स्टेट टीम से जोन की टीम में नाम आया। 10 मैच खेलने के बाद NCA में कप्तानी मिली। यहां भी टीम चैंपियन बनी। अंडर-19 नेशनल टीम के लिए शॉर्टलिस्ट हो गई। बेंगलुरु में एक महीने तक ट्रेनिंग हुई और कैंप खत्म होने के टीम इंडिया के स्क्वॉड में उसका नाम आ गया। अभी वह अंडर 19 में खेल रही है, अगर वह अपनी निरंतरता जारी रखती है, तो सीनियर टीम में भी अपनी जगह बना लेगी। अरेरा क्लब से सौम्या के अलावा 2 और लड़के हैं जो इंडिया जूनियर टीम में शामिल हो चुके हैं।

उपलब्धियां

11 साल की उम्र में वर्ष  2016 में भोपाल डिवीजन-सीनियर टीम में चयन

13 साल की उम्र में मध्य प्रदेश अंडर-19 टीम तथा 14 साल की उम्र में मध्य प्रदेश अंडर- 23 आयु वर्ग टीम के लिए चयनित

15 साल की उम्र में मध्य प्रदेश सीनियर टीम में डेब्यू

मध्य प्रदेश जूनियर प्लेयर ऑफ द ईयर (2018)

वर्ष 2019 में (महिला -16 आयु वर्ग) सेंट्रल जोन का कप्तान बनाया गया. सौम्या की कप्तानी में सेंट्रल जोन चैंपियन बना। इस टूर्नामेंट में ऑल राउंडर प्रदर्शन की वजह से प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब प्राप्त

वर्ष 2021 में महिला- 19 आयु वर्ग में इंडिया सी टीम की तरफ से चैलेंजर ट्रॉफी खेलते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक जमाया

इसी वर्ष सीनियर महिला चैलेंजर ट्रॉफी (टी-20) में इंडिया बी टीम की सदस्य रही

एमपीसीए द्वारा बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर (2019-2020-2021)

वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश महिला (19 आयु वर्ग) टीम की कप्तान रहते हुए घरेलू क्रिकेट T20 टूर्नामेंट में मध्य प्रदेश को विजय दिलाते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमाया

इसी आधार पर बीसीसीआई ने भारत ‘ए’ टीम का कप्तान बनाया

मुंबई में भारत-न्यूजीलैंड से पांच मैचों की श्रृंखला में टीम की उपकप्तान बनाई गईं

12 जनवरी से 29 जनवरी 2023 में 16 देशों की टीमों का वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाते हुए इंडिया को वर्ल्ड कप दिलाने में अहम भूमिका निभाई

 एसीसी इमर्जिंग महिला एशिया कप में  इंडिया ए की उपकप्तानी (जून 2023 )

मध्य प्रदेश  खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा एकलव्य अवार्ड (2022)

सन्दर्भ स्रोत: सीमा चौबे से सौम्या तिवारी  की बातचीत पर आधारित 

© मीडियाटिक

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



निर्गुण की खुशबू बिखेर रही हैं गीता पराग
ज़िन्दगीनामा

निर्गुण की खुशबू बिखेर रही हैं गीता पराग

पुरुष प्रधान समाज की रुढ़िवादी सोच ने उन्हें  मंच पर गायन करने से कई बार रोका, लेकिन उन्होंने हर बार अपने लिए परिवार और...

शास्त्रीय संगीत में नये प्रयोगों से दिल जीत लेती हैं नीना 
ज़िन्दगीनामा

शास्त्रीय संगीत में नये प्रयोगों से दिल जीत लेती हैं नीना 

नीना जी जब उपशास्त्रीय संगीत में उत्तर प्रदेश की उपशास्त्रीय शैलियां झूला कजरी, बारहमासा, चैती इत्यादि गाती हैं तो श्रोत...

फातिमा बानो : मजहबी बंदिशों को तोड़ बनीं पहलवान
ज़िन्दगीनामा

फातिमा बानो : मजहबी बंदिशों को तोड़ बनीं पहलवान

घुटनों की चोट के चलते ओलम्पिक नहीं खेल पायीं फातिमा का सपना भविष्य में ऐसे खिलाड़ी तैयार करना है, जो उनके लिए ओलम्पिक खेल...

सितार-संतूर की जुगलबंदी का नाम 'वाहने सिस्टर्स'
ज़िन्दगीनामा

सितार-संतूर की जुगलबंदी का नाम 'वाहने सिस्टर्स'

सितार और संतूर की जुगलबंदी के खूबसूरत नमूने पेश करने वाली प्रकृति और संस्कृति मंच पर एक-दूसरे का भरपूर साथ देतीं हैं। वे...

बेसहारा  बुजुर्गों को  'अपना घर' देने वाली माधुरी मिश्रा
ज़िन्दगीनामा

बेसहारा बुजुर्गों को 'अपना घर' देने वाली माधुरी मिश्रा

माधुरी जी ने करीब 50 लोगों को काउंसलिंग कर उनके घर वापिस भी पहुंचाया है।

पूर्णिमा राजपुरा : वाद्ययंत्र ही बचपन में जिनके खिलौने थे
ज़िन्दगीनामा

पूर्णिमा राजपुरा : वाद्ययंत्र ही बचपन में जिनके खिलौने थे

पूर्णिमा हारमोनियम, तबला, कांगो, बांगो, ढोलक, माउथ ऑर्गन सहित 18 से 20 तरह के वाद्य बजा लेती हैं।