8 पेटेंट हासिल कर चुकीं सविता दीक्षित को और 3 का है इंतज़ार

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8 पेटेंट हासिल कर चुकीं सविता दीक्षित को और 3 का है इंतज़ार

छाया: स्वसंप्रेषित

सारिका ठाकुर

प्लास्टिक का आविष्कार धातु और लकड़ी इत्यादि के विकल्प के तौर पर हुआ था, लेकिन इसका उपयोग इतना बढ़ता चला गया कि यह पर्यावरण के लिए खतरा बन गया। मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के रसायनशास्त्र की प्रोफ़ेसर डॉ. सविता दीक्षित इस समस्या से निपटने के तरीकों पर लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने ‘पॉलीमर’ में अलग-अलग प्राकृतिक तत्व मिलाकर लकड़ी, इंधन सहित कई वस्तुओं के विकल्प प्रस्तुत किए हैं और उनका पेटेंट भी हासिल कर लिया है।

सविता जी का जन्म 31 मार्च 1963 को उज्जैन में हुआ। उनके पिता श्री बाबूलाल शर्मा हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रधानाचार्य थे और उनकी माँ श्रीमती भगवती देवी शर्मा गृहणी थीं। चार भाई बहनों में वे तीसरे स्थान पर थीं। सविता जी और भाई-बहनों में उम्र का फ़र्क ज़्यादा था। बड़े भाई उनसे 12साल बड़े, छोटे भाई 8 साल बड़े और बहन 3 साल छोटी है। हालाँकि इस फ़र्क का असर उनके बचपन पर नहीं पड़ा, क्योंकि उनके पिता उनसे बहुत प्यार करते थे। प्रधानाध्यापक होने के कारण घर में सोना, जागना, पढ़नाऔर खेलना हर काम में समय की पाबन्दी थी लेकिन बच्चों को प्यार-दुलार देने में कभी उन्होंने कंजूसी नहीं की। नाते रिश्तेदार अक्सर उन पर लड़कियों को बिगाड़ने का आरोप लगाते, लेकिन उन्होंने कभी किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया।

आमतौर पर बचपन में ही माता पिता बच्चों को सीधे और उल्टे हाथों का इस्तेमाल करना सिखाते हैं। सविता जी के मामले यह मुश्किल भरा काम था क्योंकि वह अपने दोनों हाथों का उपयोग सहज रूप से करती थीं। लेकिन खाना खाने के समय उनके उल्टे हाथ को बांध दिया जाता था। दोनों हाथों से काम करना उभय उपांग कौशल (ambidextrous) कहा जाता है जिसका पर्यायवाची ‘सव्यसाची’ है। महाभारत में अर्जुन को सव्यसाची कहा गया है क्योंकि वह दोनों हाथों से तीरंदाजी कर सकते थे। सौ में एक ही इस तरह के लोग होते हैं। सविता जी भी मुश्किल से मुश्किल काम दोनों हाथों से कर सकती हैं।

सविता जी की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर में हुई। उसके बाद विजया राजे सिंधिया हायर सेकेंडरी स्कूल, उज्जैन से 1977 में उन्होंने हायर सेकेंडरी किया। इस बीच उन्होंने स्वतंत्र छात्रा के रूप में संस्कृत विषय में कुछ उपाधियां हासिल कीं, जैसे - बाल बोधिनी, संस्कृत प्रारंभ, संस्कृत प्रवेश, संस्कृत परिचय और कोविद। उनके पिता ने महज भाषा ज्ञान देने के लिए संस्कृत पढ़ने के लिए उन्हें उत्साहित किया था । साथ ही साथ ड्राइंग की मुंबई से एलीमेंट्री एवं इंटरमीडिएट परीक्षाएं डिस्टेंस लर्निंग से उत्तीर्ण की। हालाँकि पढ़ने में शुरू से अव्वल रहीं सविता विज्ञान और गणित विषयमें भी सहज थीं। लिहाजा विज्ञान विषय लेकर ही शासकीय कन्या डिग्री कॉलेज, उज्जैन से उन्होंने 1980 बीएससी और 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन से एमएससी कर लिया। उस समय उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी। उनके परिवार में वह पहली पीढ़ी थी जिसमें लडकियां पढ़ने के लिए बाहर निकली थीं। यह वह दौर भी था जब माता-पिता लड़कियों की परवरिश के लिए नए मानक भी गढ़ रहे थे। इन्हीं मानकों के तहत सविता जी एक ओर पढ़ाई में आगे बढ़ रही थी तो दूसरी ओर उन्हें उनकी मां के द्वारा घर का काम-काज भी सिखाया जा रहा था। उन्हें सिलाई, बुनाई, कढ़ाई और बाकी घरेलू कामकाज में पूरी तरह दक्ष किया गया। 

उनकी माँ एवं पिता कहते थे, हमें लड़की से नौकरी नहीं करवानी है लेकिन वह इस काबिल ज़रुर बन जाए कि जरुरत पड़ने पर अपने पाँव पर खड़ी हो सके। ऐसे में वह 19 वर्षीया मेधावी छात्रा एक पारिभाषित ‘अच्छी लड़की’थी जिसे कम से कम उस समय तक तो पता नहीं था कि आगे क्या करना है। उम्र कम होने की वजह से उनके पिता अब भी उनकी शादी के खिलाफ थे। इसलिए उसी वर्ष एम.फिल. करने के लिए पंजीयन करवा लिया। वर्ष 1983 में एम. फिल करते ही पीएचडी के लिए वजीफा मिलने लगा। वर्ष 1986 में शोध कार्य समाप्त हुआ और 87 में डॉक्टरेट भी उन्हें हासिल हो गई। सविता जी के यहाँ तक की जीवन यात्रा उनके भीतर छिपी प्रतिभा के अंकुरण का काल था। कुछ ही समय बाद सविता जी की शादी डॉ. गजेन्द्र दीक्षित से हो गई जो उस समय मैनिट में सहायक व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। ससुराल में संयुक्त परिवार में तालमेल बिठाते हुए सविता जी श्री सत्यसाईं कन्या महाविद्यालय में रसायन शास्त्र की व्याख्याता बन गईं। तब तक उनके लगभग 20 शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके थे। लगभग 6 साल वहाँ काम करने के बाद 1994 में उनकी भी नियुक्ति मैनिट में हो गई। यहां आने के बाद सविता जी को कुछ नया करने का भरपूर अवसर और समय मिला।

पिछले पंद्रह सालों में वे अपने 7 अनुसंधानों का पेटेंट करवा चुकी हैं। उनके सभी अनुसंधान लोकहित में होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। वे कहती हैं, पुराने जमाने में माता-पिता अपने बच्चों के लिए संपत्ति (मकान, दुकान,चौपहिया वाहन और नकद) छोड़कर जाते थे। लेकिन कोविड-19 महामारी ने यह अच्छी तरह समझा दिया कि इन चीजों का कोई मतलब नहीं है। अगर कुछ जरुरी है तो वह है स्वच्छ पर्यावरण और शरीर में मजबूत रोग प्रतिरोधी क्षमता।उनके सभी अनुसंधानों को देखें तो उनके कहने का अभिप्राय और भी स्पष्ट हो जाता है।

सविता दीक्षित के वे अनुसंधान जिनका उन्हें पेटेंट हासिल हो चुका है –

• पेट्रोल और डीजल का विकल्प: पुराने टब और बाल्टी के टुकड़ों को उच्च तापमान पर गर्म करके उसमें प्राकृतिक वस्तुओं  को  डाला फिर उसे संघटित करके प्राप्त हुए तरल पदार्थ को पेट्रोल और डीजल के साथ 20: 80 के अनुपात में मिलाकर उपयोग किया गया। इसे मिलाने से वायु प्रदूषण कम होता है और खर्च भी 30 प्रतिशत तक कम होता है। इस अनुसन्धान में डॉ. सविता दीक्षित के साथ डॉ. गजेन्द्र दीक्षित और विजेश वर्मा भी शामिल थे इसलिए नवम्बर 2020 में इसका पेटेंट तीनों वैज्ञानिकों के नाम दर्ज हुआ।  

• कैंसर प्रतिरोधी पेय: नीम, श्यामा, तुलसी बीड,  ग्रास,एलोवेरा और गिलोय के मिश्रण एक ऐसे पेय पदार्थ का निर्माण। इसका प्रयोग एक ऐसे चूहे पर किया गया, जिसमें ट्यूमर पाए गए थे।  इन पर इस ख़ास मिश्रण के उपयोग के बाद देखा गया कि ट्यूमर की कोशिकाएं कम होने लगीं। भारत सरकार से उन्हें अपने इस अनुसंधान पर 31 जुलाई 2020 में पेटेंट प्राप्त हुआ।

• प्लाईवुड का विकल्प: गोबर में पॉलीथीन और प्राकृतिक रेशे मिलाए और कुछ अनुपयोगी वस्तुएं मिलाकर कम्पोजिट पदार्थ  (मिश्रण) बनाया। इसे प्लाईवुड के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ख़ास बात यह है कि गोबर मिलाने पर पॉलीमर में 60 प्रतिशत तक बायोडिग्रेडिबिलिटी पायी गई। यानि यह सामान्य प्लास्टिक की तरह नष्ट होने में सौ-दो सौ साल का वक्त नहीं लेगा।

• यह आविष्कार एक प्राकृतिक फाइबर आधारित सम्मिश्रण से संबंधित है। लगभग 70% की मात्रा मेंएपॉक्सी पॉलीमर है, सुदृढ़ीकरणसामग्री में 5% से 25% नारियल के रेशे, अकार्बनिक मूल, TiO2 (टाइटेनियम डाइऑक्साइड) नैनो पार्टिकल 2% से  5%से की सीमा में हैं। इस आविष्कार का सम्मिश्रण पर्यावरण के अनुकूल और 50 % बायोडिग्रेडेबल है क्योंकि यह अनिवार्य रूप से प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होता है और इस प्रकार यह लकड़ी और फर्निशिंग उद्योग के लिए एक हरित समाधान है। प्राप्त समग्र सामग्री में एक उच्च विशिष्ट मापांक और शक्ति भी होती है।  

• लकड़ी के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक रेशों से पॉलीमर कम्पोजिट: यह 5वांअनुसंधान डॉ. सविता दीक्षित ने अपने पति डॉ. डॉ. गजेन्द्र दीक्षित के साथ मिल कर किया था और भारत सरकार द्वारा यह पेटेंट दोनों के नाम से दर्ज हुआ। इस फाइबर के निर्माण में सभी सामग्रियों को प्राकृतिक रूप में ही इस्तेमाल किया गया है। यह खोज लकड़ी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे वृक्षों की कटाई कोरोकने में मदद मिलेगी। इसमें बांस के रेशे, नारियल के रेशेऔर गोबर इस्तेमाल किया गया। यह 80 प्रतिशत तक समयानुसार नष्ट हो सकता है।

• अपशिष्ट पदार्थों से बनी ईंटे: भारत सरकार द्वारायह 6वां पेटेंट दीक्षित दम्पति को संयुक्त रूप से मिला है। इस ख़ास तरह की ईंटों को सीमेंट, सिलिका,फाइबर, जीजीबीएस, मार्बल पाउडर आदि की मदद से एक कंक्रीट जैसी संरचना तैयार कर उन्हें ईंटों का रूप दिया गया। प्रयोगशाला में हुई जांच के अनुसार ये सीमेंट की तरह ही मजबूत और और टिकाऊ हैं। सीमेंट को 10 % तक कम कर के उसमे इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट  का मिश्रण मिलाया गया है।

• पेवर ब्लॉक्स: 500 मिली फ्लाई ऐश (Fly Ash) और 37.5 ग्राम जियो पॉलीमर में 125 मि.ली. पानी  लगभग 20–25 मिनट तक मिश्रित करने के बाद उसके ब्लॉक्स बनाए, फिर उन्हें 60°C तापमानपर ओवन (Oven) में 24 घंटे तक रखा गया, और फिर 7 दिनों तक धूप में, ताकि उनमें मजबूती आए। इन ब्लॉक्स का उपयोग हम फुटपाथ (Footpath), रूफटॉप (Rooftop) इत्यादि जगहों पर कर सकते हैं।

इसके अलावा सविता जी अपने 3 और पेटेंट्स का इंतज़ार कर रही हैं। उनके लिए मैनिट एक ऐसा आसमान साबित हुआ जहां उन्होंने पंख पूरे फैलाकर उड़ान भरी। वे रसायन विज्ञान की विशेषज्ञता रखने के साथ भाषा, संस्कृति और समाज सेवा में भी गहरी रूचि रखती हैं। छात्रों की मदद से उन्होंने महाविद्यालय के अंतर्गत ही  8-10 क्लबों की स्थापना की, जिसमें तूर्यनाद क्लब की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। वे इसके माध्यम से राजभाषा का प्रचार-प्रसार करती है। प्रयास सामाजिक सेवा सेल के माध्यम से  वे छात्रों को लेकर वृद्धाश्रम और अनाथालय जैसी जगह लेकर जाती हैं ताकि उनमें मानवीय संवेदना बनी रहे। इंस्पायर क्लब विधार्थियों मैअध्यात्मिक एवं मूल्यों से सम्बंधित ज्ञान विकसित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। बीच बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रम,वाद-विवाद, नुक्कड़ नाटक, लेख प्रतियोगिता, कविता प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी वे करवाती हैं।

दरअसल ये ऐसी गतिविधियां हैं जो उनके पिता बचपन में बच्चों को साथ लेकर करवाते थे। अपनी गृहस्थी में वही बीजारोपण उन्होंने अपने बच्चों में किया और कॉलेज के बच्चों के संपर्क में आईं तो उनके साथ बांटा। सविता जी के बड़े बेटे श्लोक एटलांटा में माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर हैं और छोटे संकल्प,  न्यू जर्सी में मैकेनिकल इंजीनियर हैं।

• महत्वपूर्ण प्रकाशन 

अब तक डॉ. सविता दीक्षित के ढाई सौ से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, इसके अलावा प्रतिष्ठित प्रकाशनों से उनकी छः पुस्तकें प्रकाशित हैं-

1- ए ग्रीन अप्रोच टू बायोडीजल प्रोडक्शन फ्रॉम फ्लेक्स सीड आयल- कैम्ब्रिज स्कॉलर्स पब्लिशिंग प्रा.लिट. (A Green Approach to Biodiesel Production from Flaxseed Oil: Cambridge Scholars Publishing Limited)

2- हर्बलिज्म: ए रिव्यु - कैम्ब्रिज स्कॉलर्स पब्लिशिंग प्रा.लिट.(Herbalism: A Review: Cambridge Scholars Publishing Limited)

3- रेडिएशनल इंडियन हर्ब्स क्योरिंग कैंसर –लैप लैम्बर्ट एकेडमिक पब्लिशिंग लिमिटेड (Radiational Indian Herbs curing cancer: Lap Lambert Academic Publishing Limited)

4- एलीमेंट्री आईडिया ऑफ़ कोम्पोजिट मटेरियल- लैप लम्बर्ट एकेडमिकपब्लिशिंग लिमिटेड (Elementaryidea of Composite material: Lap Lambert Academic Publishing Limited)

5- स्टडी एंड अनालिसिस ऑफ़ रॉ वाटर ऑफ़ रिजर्वायर एंड लेक्स (Study and Analysis of Raw water ofreservoir and Lakes:LapLambert Academic Publishing Limited)  

6- कंप्रेंसिव रिव्यूव ऑफ़ हर्बलिज्म    (Book international publication Cambridge)

पुरस्कार  एवं सम्मान

• बेस्ट पेपर अवार्ड एनवायरनमेंटल एनालिसिस एमपीसीएसटी 2007

• बेस्ट पेपर अवार्ड मूर्ति विसर्जन MPCST 2009

• राजभाषा रत्न गौहाटी 20124.  राजभाषा कार्यान्वयन एवं प्रशिक्षण अवार्ड  पोर्ट ब्लेयर  2013

• कल्पतरु IIFM-नुक्कड़ नाटक -2014

• नारी सशक्तिकरण पुरस्कार,फिक्की सभागार, नई दिल्ली, 28 फरवरी 2016

• अक्टूबर 2016 को मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा 'विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान' (हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा मध्य प्रदेश राज्य स्तर)

• जैन समाज श्री विद्यासागर जी अक्टूबर 2016 द्वारा तूर्यनाद-सम्मान

• पंजाब विश्वविद्यालय HETIS 2016 में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार

• 15 से 16 दिसंबर 2016 के बीच ओरिएंटल कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल, भारत में आयोजित इंजीनियरिंग रिसर्च एंड एप्लीकेशन (आईसीएईआरए-2016) में प्रगति पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार

• बेस्ट पेपर अवार्ड IIM अहमदाबाद ICMRP एंटीडायबिटिक ड्रग, दिसंबर 2016

• कादम्बिनी द्वारा समाज सेवा पुरस्कार 'अभिनंदन पत्र' कादम्बिनी अवम के नए लक्ष्य उत्सव में शिक्षा एवं समाज कल्याण सेवा समिति (म.प्र.) 2016

• करियर कॉलेज भोपाल में करियर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में प्रथम पुरस्कार, 2017

• जीरो माइल अवार्ड-शिक्षा रत्न 2019, नागपुर

• शीर्ष 51 प्रभावशाली महिलाएं- नारी शक्ति को प्रणाम (बृजभूमि फाउंडेशन)- पीपुल्स कॉलेज,भोपाल

• आरिणी अलंकरण महोत्सव-विशिष्ट सेवा सम्मान 2019, गांधी भवन  

• प्रांतभूषण अवार्ड द्वारा ‘मोस्ट इनोवेटिव प्रोफेसर ऑफ द ईयर 2023’    

संदर्भ स्रोत: स्वसंप्रेषित और सारिका ठाकुर से सविता दीक्षित की बातचीत पर आधारित

© मीडियाटिक

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