ज्योति रात्रे: एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज महिला

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ज्योति रात्रे: एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज महिला

चित्रांकन : ज़ेहरा कागज़ी

खिलाड़ी - पर्वतारोही

• सीमा चौबे 

ज़िद, जुनून और जज़्बा हो तो कोई भी ताकत हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती - यह बात ज्योति रात्रे पर एकदम सटीक बैठती है। ज्योति ने न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के कई दूसरे देशों की ऊँची पहाड़ियों पर चढ़ाई कर पर्वतारोही के रूप में अपनी ख़ास पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की है। देश की सबसे ज़्यादा उम्र की पर्वतारोही का ख़िताब पाने वाली ज्योति उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो 50 की होते न होते खुद को कमज़ोर समझने लगती हैं।

16 फरवरी को महू में जन्मी ज्योति के पिता श्री एम.एल.टाले, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में इंजीनियर थे और माता श्रीमती जमुना टाले गृहिणी। बचपन में लड़कों के साथ उन्हीं के खेल खेलना लोगों को नागवार लगता था, लेकिन टाले दंपत्ति ने अपनी दोनों बेटियों को कभी लड़कों से कमतर नहीं आंका। पिता ने उन्हें शुरू से ही बेटों की तरह शिक्षा देकर अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। बेटियों को पढ़ने-बढ़ने से रोकने जैसा कोई बंधन नहीं था। दो बेटियों के बावजूद जब उनके पिता ने परिवार और आगे न बढ़ाने का फ़ैसला किया, तब परिवार में इसका बहुत विरोध हुआ। सभी चाहते थे कि घर में लड़के के रूप में एक संतान और हो, लेकिन उनके पिता यह कहते हुए अपने निर्णय पर अडिग रहे कि मेरी बेटियां मेरे लिए लड़कों से कम नहीं हैं।

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ज्योति बताती हैं उस समय जब गाँव में गिने चुने लड़कों के पास ही साइकल हुआ करती थी, पिताजी ने हम दोनों बहनों को साइकल लाकर दी। पिता के साथ-साथ ज्योति का सपना भी था कि वे डॉक्टर बनें इसलिए उन्होंने विज्ञान विषय के साथ बीएससी किया। विज्ञान विषय लेनी वाली ज्योति उस समय अपने परिवार में पहली लड़की थीं, लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि वर्ष 1987 में हरदा निवासी श्री कृष्ण कुमार रात्रे (जूनियर इंजीनियर- विद्युत मंडल, इंदौर) से उनका विवाह हो गया। महज 18 साल की उम्र में हुई इस शादी के कारण ज्योति का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया।  विवाह के बाद वे इंदौर आ गईं। लीक से हटकर कुछ अलग करने की सोच रखने वाली ज्योति को मैथमेटिकल इकोनॉमिक्स से एम.ए. करने में काफी पापड़ बेलने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने मनपसंद विषय के साथ स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करके ही दम लिया। वर्ष 1991 में ज्योति भोपाल आ गईं। तब तक इनकी बेटी का जन्म भी हो चुका था। अपने नाम के साथ डॉक्टर लगाने का सपना पाले बैठी ज्योति ने मैथमेटिकल इकोनॉमिक्स में पीएचडी करने का काफी प्रयास किया, लेकिन भोपाल यूनिवर्सिटी में यह विषय न होने से उनका डॉक्टर बनने का ख्वाब दूसरी बार भी अधूरा रह गया। लेकिन कहावत है कि एक दरवाज़ा बंद होता है तो दूसरा खुल जाता है।

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अपना हौसला बरक़रार रखते हुए ज्योति ने सिले-सिलाए कपड़ों का कारोबार शुरू कर दिया। इसके पीछे की कहानी भी कम रोचक नहीं है। ज्योति बताती हैं कि उनकी बेटी बचपन में बहुत गोल-मटोल थी,उसके नाप के कपड़े आसानी से नहीं मिलते थे। इससे परेशान होकर ज्योति ने खुद ही बेटी के कपड़े सिलने शुरू कर दिए। लोगों को उनके बनाए कपड़े पसंद आने लगे तो उन्होंने सोचा क्यूं न यही काम शुरू किया जाए। उस समय ज्योति श्री उत्तम गुर्जर से ऑटोकैड सीखने जाया करती थी, उन्हीं की प्रेरणा से फ़ैशन डिज़ाइनिंग का कोर्स किया और वर्ष 1994-95 में घर से अकेले ही स्कूल यूनिफॉर्म्स सिलने का कार्य शुरू किया। काम का विस्तार होने पर 97-98  में ‘परफेक्ट ड्रेस कलेक्शन’ नाम से बुटीक खोलकर काम को गति देने में जुट गईं। केवल डेढ़ हज़ार रुपयों से शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय आज ढाई करोड़ के टर्न ओवर तक पहुँच गया है।

ज्योति का यह कारोबार चल ही रहा था कि 2017 में रोटरी क्लब के यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत उन्हें कुछ युवाओं के साथ मनाली में एक ट्रेक (3500 मी.) पर जाने का मौका मिला। यहाँ मिले रोमांचकारी अनुभव के बाद उन्होंने ठान लिया कि अब ऐसा ही कुछ करना है, जो कुछ अलग हो। इसके बाद उन्होंने दुनिया की अलग-अलग पर्वतमालाओं की चोटियों पर चढ़ने का मन बना लिया। लेकिन यह सफर इतना भी आसान नहीं था। ट्रेकिंग से वापस आने के बाद शरीर में सूजन के साथ-साथ अन्य शारीरिक दिक्कतें भी आ गईं। डॉक्टर ने सेहत का हवाला देते हुए सख्त हिदायत दी कि पहाड़ों पर चढ़ना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन तब तक ज्योति के दिमाग में एवरेस्ट आ गया था। आगे कई दिक्कतें आने वाली है, इस  बात से ज्योति अच्छी तरह वाकिफ़ थी। जब पति को अपना इरादा बताया तो उनका एक ही वाक्य था - 'अपनी फिटनेस देखी है तुमने?' इस पर पति से बिना कोई बहस किए ज्योति आगे की रणनीति बनाने में जुट गईं।

पर्वतारोही बनने के लिए ज्योति को पेशेवर प्रशिक्षण की ज़रूरत थी। 48 की उम्र में अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए वे जिम गईं तो प्रशिक्षक ने इस उम्र में जोखिम लेने से मना कर दिया। उन्होंने देश के अलग-अलग  प्रशिक्षण केन्द्रों में बात की, लेकिन सभी ने यह कहकर मना कर दिया कि 40 की उम्र के बाद इस तरह का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। हर तरफ़ से मायूस होने के बाद उन्होंने खुद ही अपना प्रशिक्षक बनने का फ़ैसला किया। इंटरनेट के माध्यम से जानकारियां जुटाई और अपने आपको पहाड़ों का सामना करने के काबिल बनाने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने एक जैकेट बनाई और नियमित कसरत करने लगीं, इसके साथ ही भोपाल के आसपास छोटी-छोटी ट्रेकिंग पर जाना शुरू किया। भोपाल के मनुआभान की टेकरी पर 8 से 10 किलो वज़न के साथ चढ़ाई करना, दौड़ना, साइकिलिंग, वेट ट्रेनिंग आदि के साथ शारीरिक क्षमता विकसित की। वे घर का काम भी 10 किलो वजनी जैकेट पहनकर और पैरों में 2 किलो वज़न बांधकर करती, ताकि पहाड़ों की उंचाई नापने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। उनके इस जूनून को देखते हुए आखिर उनके पति ने सेहत का ध्यान रखने की हिदायत के साथ ट्रैकिंग की रजामंदी दे दी।

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ज्योति की पहली ट्रैकिंग वर्ष 2017 में लाहौल-स्पीति स्थित सूरज ताल (4950 मी.) से शुरु हुई। हौसला मिला तो दूसरा ट्रैक मनाली स्थित देव टिब्बा (6001) सफलतापूर्वक कर लिया। 2019 में अमरनाथ यात्रा 2 दिन में पूरी करने के बाद इरादे और मजबूत हुए और यहीं से एल्ब्रस फतह करने की तैयारी शुरू कर दी। 2020 में जब कोरोना आया तो लगा कि एल्ब्रस तक पहुँचने का सपना अधूरा रह जाएगा, लेकिन वे अपनी फिटनेस और प्रेक्टिस पर ध्यान देती रहीं। 8 जुलाई 2021 को यूरोप का सबसे ऊँचा पहाड़ (5692 मी.) एल्ब्रस फतह कर भारत की सबसे उम्रदराज (52 साल) महिला होने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी किलिमंजारो (5895 मी.) पर 15 अगस्त 2021 को तिरंगा फहरा कर 39 दिन में दो पर्वतों पर चढ़ने वाली भारत की पहली महिला बनकर दूसरा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।  वर्ष  2023 में आस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट कोजिअस्को को (महज 2 घंटे बाद 2,228 मीटर)  फतह किया।

ज्योति का मानना है सपने पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। महिलाएं किसी भी उम्र में अपने सपने पूरे कर सकती हैं। बस जरूरत है हिम्मत, लगन और कड़ी मेहनत करने की। परिस्थितियां अपने आप अनुकूल होती जाती हैं क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। अब उनका सपना विश्व के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची पर्वत चोटियों को फतह करने का है। इसमें से दो तो वे कर ही चुकी हैं। अगले लक्ष्य एवरेस्ट  फतह करना करने के उद्देश्य के तहत 26 जनवरी 2022 को उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा फहराया। आखिरकार 19 मई 2024 को 8848.86 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चोटी भी फ़तेह कर ली। 

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सामाजिक कार्यों में सक्रिय ज्योति प्रकृति प्रेमी भी हैं। उन्हें बागवानी का शौक है तो पशु पक्षियों से भी बहुत प्रेम है। वे आसपास के लोगों को पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संदेश भी देती हैं। ज्योति के पति मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के गोविंदपुरा स्थित मुख्यालय में महाप्रबंधक (मानव संसाधन) के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी बेटी प्रांशु ने अमेरिका से भूगर्भ विज्ञान में पीएचडी की है और विवाह के बाद वहीं निवासरत है। 

उपलब्धियां/सम्मान
• वर्ष 2015 : भोपाल स्टाइल फैशन वीक में देश के नामी फैशन डिजाइनर के साथ फैशन शो में भागीदारी 
• वर्ष 2021 : ड्रीम कैचर्स संस्था नई दिल्ली  द्वारा डॉ. किरण बेदी के करकमलों से ‘इंडिया इंस्पिरेशनल वूमन अवार्ड’
• वर्ष 2022 : राष्ट्रीय नारी सशक्तिकरण संघ  द्वारा डॉ. प्रभुराम चौधरी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मप्र के हाथों प्रदेश गौरव रत्न सम्मान
• वर्ष 2022 : भारतीय जीवन बीमा निगम, मध्य क्षेत्र भोपाल द्वारा भोपाल रत्न अवार्ड

सन्दर्भ स्रोत : ज्योति रात्रे  से सीमा चौबे की बातचीत पर आधारित 

© मीडियाटिक

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