छाया : स्व सम्प्रेषित
• रुखसाना मिर्ज़ा
प्रियाणी वाणी जब कॉलेज में ही थीं तभी टीवी पर संगीत के रियलिटी शोज के जरिए उन्होंने संगीत प्रेमियों में अपनी पहचान बना ली थी। बाद के वर्षों में उन्होंने फिल्मों के लिए पार्श्व गायन भी किया। संगीत के प्राइवेट एल्बम भी रिलीज किए और अब वे एक नई भूमिका में आ गई हैं। वे स्टेज शो में फिल्मी गीतों के जरिए शास्त्रीय संगीत से अनजान श्रोताओं को रागों से परिचित करवा रही हैं। उनकी 'राग गीत' सीरीज देश के साथ ही विदेशों में लोकप्रिय हो रही है।
प्रियाणी का जन्म मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल के जिले बड़वानी में हुआ जहां उनके नाना- नानी का घर था। उनके माता- पिता झाबुआ के जिले के जोबट में रहते थे। जन्म के कुछ समय बाद ही परिवार जोबट से झाबुआ चला गया क्योंकि वहां उनकी मां गायत्री सरकारी स्कूल में शिक्षक बन गई थीं। पिता लवेश वाणी आरटीओ दफ़्तर में काम करते थे।
प्रियाणी की 10वीं कक्षा तक पढ़ाई झाबुआ में ही हुई। पिता को संगीत का बेहद शौक था। हालांकि उन्होंने संगीत सीखा नहीं था लेकिन पुरानी फिल्मों के गीत सुन-सुन कर गाया करते थे। साथ ही वे हिन्दी फिल्म संगीत के इनसाइक्लोपीडिया भी थे। कौन सा गीत किस फिल्म का है, वह कब रिलीज हुई थी, उसके गीतकार, संगीतकार के नाम के साथ ही वह किस पर फिल्माया गया है - यह तक उन्हें पता होता था। झाबुआ में स्थानीय कार्यक्रमों में, गणेश उत्सव आदि में वे स्टेज पर भी गाते थे। प्रियाणी ने पिता से प्रेरणा लेकर बहुत छोटी उम्र में ही गाना शुरु कर दिया था और महज 5 बरस की उम्र में पिता के साथ स्टेज पर भी गाया था। पिता ने प्रियाणी की प्रतिभा को पहचाना और वे उन्हें झाबुआ में ही संगीत शिक्षिका भारती सोनी के पास ले गए और वहां से उनकी संगीत की विधिवत तालीम शुरू हुई और शास्त्रीय संगीत से परिचय हुआ। भारती जी उन्हें क्षेत्र में होने वाली विभिन्न संगीत प्रतियोगिताओं में भी लेकर जातीं।
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संगीत के लिए आईं इंदौर
प्रियाणी पढ़ाई में भी तेज थीं वे 10 वीं में मेरिट होल्डर रहीं। 11वीं में प्रियाणी और उनके माता- पिता चाहते थे कि वे संगीत को विषय के रूप में पढ़ें लेकिन झाबुआ के किसी स्कूल में यह सुविधा नहीं थी। तब उनके पेरेंट्स ने इंदौर के मालव कन्या शासकीय स्कूल में उनका एडमिशन करवाया। एक निजी होस्टल में उनके रहने की व्यवस्था की गई और इस तरह प्रियाणी का संगीत का सफ़र शुरू हो गया। स्कूली पढ़ाई के बाद इंदौर के ही पुराने गर्ल्स डिग्री कॉलेज (Old GDC) से उन्होंने संगीत में बीए किया। जब कॉलेज में पढ़ाई शुरू हुई तो फिर पेरेंट्स भी इंदौर आकर कॉलेज के पास ही रहने लगे। ओल्ड जीडीसी के शिक्षक भी उन्हें पूरा सपोर्ट करते। खास तौर से सुवर्णा वाड मैडम ने बहुत प्रोत्साहित किया। कॉलेज के साथ ही शास्त्रीय गायक शशिकांत तांबे सर से भी तालीम ली। यही वह वक्त था जब टीवी के रियलिटी शोज़ के लिए ऑडिशन देने का सिलसिला शुरु हुआ। 2005 में जब वे एमए संगीत के फाइनल इयर में थीं तब सारेगामापा में सिलेक्शन हुआ और अंतिम 15 तक पहुंची। शो के लिए लंबे समय तक मुंबई में रहना पड़ा इसलिए एमए फाइनल की परीक्षा नहीं दे सकीं लेकिन अब उनके पिता ने उनके साथ मुंबई में ही रहने के फैसला किया तो प्रियाणी ने मुंबई के मशहूर एसएनडीटी कॉलेज में एमए म्यूज़िक में दाखिला ले लिया।
वॉइस ऑफ इंडिया ने दी पहचान
2006 में प्रियाणी का चयन 'वॉइस ऑफ इंडिया' शो में हुआ जहां वे फाइनल तक पहुंचने वाली अकेली फीमेल कंटेस्टेंट रहीं। इस शो ने प्रियाणी को देशभर में पहचान दिलाई और उन्हें स्टेज शो के प्रस्ताव मिलने लगे। कई इंटरनेशनल शोज में भी जाने को मौका मिला जिनमें श्रीलंका, सिंगापुर आदि के शो शामिल हैं। प्रियाणी ने मुंबई में एमए संगीत भी पूरा कर लिया साथ ही अपना संगीत का रियाज़ भी जारी रखा। यहां पर उस्ताद मुस्तफा खान के बेटे मुर्तजा खान साहब से भी तालीम ली और अभी सितार वादक पूर्वायन चटर्जी से भी सीख रही हैं।
प्रीतम ने दिया मौका
प्रियाणी को फिल्मों में ब्रेक दिया संगीतकार प्रीतम ने। प्रीतम ने 2010 में फिल्म थैंक्यू में एक गीत गवाया जो जावेद अली के साथ एक ड्यूएट था। उसके बाद 2011- 12 में फिल्म प्लेयर्स और फरारी की सवारी आदि के लिए भी गीत गाए।
पिता की मृत्यु ने कर दिया उदास
प्रियाणी के संगीत सफर में पिता का सबसे बड़ा योगदान है। संगीत की तालीम के लिए वही उन्हें इंदौर लेकर आए। रियलिटी शोज़ के दौरान तो वे अपनी नौकरी छोड़ कर मुंबई ही आ गए, जहां वे प्रियाणी को ऑडिशन के लिए लेकर जगह-जगह जाते और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाते रहते। 2011 में महज 51 साल की उम्र में उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अचानक हुए इस हादसे ने प्रियाणी को डिप्रेशन में ला दिया, जिसके कारण एक साल तक वे स्टेज शो आदि से दूर रहीं। हालांकि इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए उन्होंने सब टीवी के एक कॉमेडी सीरियल में अभिनय भी किया, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि एक्टिंग उनका क्षेत्र नहीं है। इसलिये वे फिर संगीत की दुनिया में लौट आईं। इस वापसी में उनके गीतकार पति आशीष पंडित का भी योगदान है। दोनों ने मिल कर कई सिंगल गीत यू ट्यूब पर लांच किए जो काफी लोकप्रिय भी हुए।
'राग गीत' की शुरुआत
फिल्मों में पार्श्व गायिका बनने का सपना तो प्रियाणी ने पूरा कर लिया लेकिन वहां रह कर अब उनका फिल्म संगीत से मोहभंग हो चुका है, क्योंकि अब वहां ऐसे गीत नहीं आ रहे हैं जो उनकी आवाज़ और मिजाज़ को सूट करें। तीन साल पहले उन्होंने स्टेज शो 'राग गीत' की शुरुआत की जो लगातार जारी है। इस प्रोग्राम में फिल्मी गीतों के जरिए शास्त्रीय रागों का परिचय बेहद दिलचस्प अंदाज में श्रोताओं को देती हैं। वे कहती हैं कि इस प्रोग्राम के बाद कई लोग रागों को गूगल पर सर्च करने लगे हैं। कई श्रोता कहते हैं कि उन्हें लगता था कि शास्त्रीय संगीत बेहद कठिन होता होगा लेकिन अब उन्हें राग समझ आने लगे हैं। यह शो देश के साथ ही अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर आदि में भी लोकप्रिय रहा है। शो के डायरेक्टर प्रियाणी के छोटे भाई गीत वाणी हैं और आशीष जी तो साथ में हैं ही। वे कहती हैं कि इस शो के जरिए अगर लोग शास्त्रीय संगीत की तरफ आते हैं तो यही मेरा उद्देश्य है। इसी बात से मुझे आत्मिक आनंद भी मिलता है। उनकी मां अभी झाबुआ में रहती हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं। प्रियाणी की 12 साल की बेटी है और उसे भी वे संगीत सिखा रही हैं। इसके साथ ही प्रियाणी संगीत शिक्षा की ऑनलाइन अकेडमी भी चलाती हैं।
संदर्भ स्रोत : प्रियाणी वाणी से रुखसाना मिर्ज़ा की बातचीत पर आधारित
© मीडियाटिक



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