दमयंती पाणी

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दमयंती पाणी

छाया : कृष्णकांत मिश्र

 सामाजिक कार्यकर्ता 

• शिवाशीष तिवारी 

दमयंती पाणी का जन्म 3 जनवरी 1971 को उड़ीसा के एक संपन्न परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में उच्च पद पर कार्यरत रहे और सन 1971 की जंग में शामिल होकर देश का प्रतिनिधित्व किया l दमयंती जी का पालन-पोषण जबलपुर में हुआ क्योंकि पिता के फौज में होने के कारण उनका परिवार जबलपुर में आ बसा था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जॉन्सन हायर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए रानी दुर्गावती वि.वि.का रुख किया और वहाँ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात इंदिरा कला संगीत वि.वि. से कमर्शियल आर्ट में स्नातकोत्तर और ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट से ‘सामाजिक कार्य’ में दोहरा स्नातकोत्तर किया। इसके बाद वर्धा के प्रतिष्ठित संस्थान गांधी विचार परिषद से ‘गांधी विचार’ में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया।

दमयंती जी को सरकारी नौकरियों और पारंपरिक जीवन शैली ने कभी आकर्षित नहीं किया लेकिन परिजनों का मन रखते हुए 1993 में वे नवोदय विद्यालय में शिक्षिका के रूप कार्य करने लगीं।  परंतु  ज्यादा दिनों तक वहाँ  रह नहीं पाई और उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। समाजसेवा में गहरी रूचि होने के कारण जल-जंगल-जमीन के मुद्दे को संजीदगी से समझती थीं। यह वही दौर था, जब नर्मदा बचाओ आन्दोलन तेजी से बढ़ रहा था। उसके उद्देश्यों से प्रभावित होकर वे भी  सन्-1994 के उत्तरार्ध में नर्मदा बचाओ आंदोलन में शामिल हो गईं और सक्रिय भागीदारी की। इसी दौरान दमयंती जी के मन पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचारों का इतना अधिक प्रभाव हुआ कि 1997 वे से बापू द्वारा स्थापित किए गए सेवाग्राम आश्रम में रहने लगीं। वहाँ रह कर उन्होंने गांधी के विचारों का अध्ययन किया और उनके द्वारा प्रतिपादित रचनात्मक कार्यक्रमों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

शादी-ब्याह और घर-गृहस्थी जैसे मुद्दो से हमेशा दूर रहने वाली दमयंती जी  के जीवन में अचानक संजय सिंह का आगमन हुआ, जो बंगाल के निवासी थे और वर्धा में गांधी विचार की शिक्षा ले रहे थे। कुछ वैचारिक साम्य ने दोनों को एक दूसरे के प्रति आकर्षित किया और सन 2000 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए। संजय सिंह वर्तमान में केन्द्रीय गांधी स्मारक निधि, राजघाट नई दिल्ली में सचिव पद पर सेवाएं दे रहे हैं। दोनों की एक बेटी ‘श्रेजा’ है जिसका जन्म 2005 में हुआ था।

सन 2006 से वर्तमान तक दमयंती जी बुंदेलखंड अंचल में रचनात्मक कार्य कर रही हैं। दमयंती जी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की उन चुनिंदा महिलाओं में से एक हैं, जो संपूर्ण प्राकृतिक तरीके से अर्थात् जैविक तरीके से एक बड़े कृषि फ़ार्म का संचालन कर रही हैं। यह फ़ार्म मप्र गांधी स्मारक निधि (गांधी आश्रम) का है। देसी बीजों को बचाने के लिए दमयंती लंबे समय से काम कर रही हैं। इसके साथ ही स्थानीय कृषि तकनीकों, देसी तकनीकों और पारंपरिक बीजों के संरक्षण हेतु,  गांधी आश्रम में विधिवत प्रक्रिया को भी उन्होंने प्रारंभ किया है। जल संरक्षण में उनके द्वारा किये गए काम की सराहना देश सहित दुनिया भर के लोगों ने की है। बुंदेलखंड में जल स्तर को सुधारने के लिए उनके द्वारा, जो अनोखे कार्य किए गए हैं, उनसे प्रेरणा लेकर देशभर में कई जगह पर युवा साथी, उनके प्रयोगों को आगे बढ़ा रहे हैं।

दमयंती पाणी ने गांधीवादी जीवन शैली को लेकर व्यावहारिक रूप में अनेक  प्रयोग किए, और इन सफल प्रयोगों के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ने का असाधारण कार्य किया है। छतरपुर के गांधी आश्रम में रहकर उन्होंने ऐसे कई प्रयोगों को अंजाम दिया है जैसे -वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक चिकित्सा, पारंपरिक खेती और गौ-पालन इत्यादि। वे कड़ी मेहनत करके देशज गौशाला का सफलतापूर्वक गांधी आश्रम से संचालन कर रही हैं। यह एक मात्र ऐसी गौशाला है इस क्षेत्र में, जो देसी गायों को बढ़ावे के साथ संरक्षण और संवर्धन प्रदान करती है, जिसमें उन्होंने कई नए प्रयोग भी किए हैं।

दमयंती जी ने बुंदेली भोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता दिलाने के लिए सुप्रसिद्ध खजुराहो नृत्योत्सव में  2013 से ‘बुन्देली फूड फेस्टिवल’  प्रारंभ किया और छतरपुर में अनगिनत कार्यशालाएं आयोजित कीं। न केवल छतरपुर में, बल्कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी कई कार्यशालाओं का आयोजन किया जिसमें देश-विदेश के सुविख्यात लोग सम्मिलित होते थे। इसके माध्यम से उन्होंने नये लोगों को बुंदेली अस्मिता से परिचय कराया।

दमयंती जी पर्यावरण, मानव अधिकारों, समानता तथा सांप्रदायिक सद्भाव के लिए रचनात्मक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय आंदोलनों में भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं और युवा वर्ग को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। उनके परिश्रमी व्यक्तित्व का अनुमान उनकी दिनचर्या देखकर लगाया जा सकता है जो सुबह 4 बजे प्रारंभ होकर रात्रि के 10 बजे समाप्त होता है। इस दौरान वह खेत, गौ-शाला, गांवों में प्रशिक्षण, स्कूल-कॉलेजों में संवाद, यात्रा-सम्मेलनों में सहभागिता और रसोई सहित कई काम करती हैं। साल-2017 से दमयंती गांधी स्मारक निधि (गांधी आश्रम) के सचिव पद को संभाल रही हैं। दुनिया भर के लोग आपके काम को सीखने और समझने के लिए यहां आते हैं।

लेखक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

© मीडियाटिक

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