ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बालिग दंपती की जान और स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि बालिग युवक-युवती ने अपनी स्वेच्छा से विवाह किया है, तो उनके जीवन और आजादी की रक्षा करना राज्य का दायित्व है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक जैन ने सानिया बानो एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले में पारित किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का दखल स्वीकार्य नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनकी उम्र क्रमशः 21 और 24 वर्ष है। दोनों एक ही धर्म से हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है, जिसका निकाहनामा रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया गया।
दंपती ने आरोप लगाया कि युवती के पिता इस विवाह का विरोध कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपने परिजनों से जान का खतरा महसूस हो रहा है। हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई शिकायत/प्रतिनिधित्व पर गंभीरता से विचार करें।
पुलिस को दंपती की उम्र और विवाह के तथ्य का सत्यापन कर कानून के अनुसार आवश्यक सुरक्षा और कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।



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