कोमा में पति... दिल्ली हाईकोर्ट ने

blog-img

कोमा में पति... दिल्ली हाईकोर्ट ने
पत्नी को बनाया कानूनी अभिभावक

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की पत्नी को उसका कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है, जो फरवरी 2024 से गंभीर बीमारी के कारण वेजिटेटिव (कोमा जैसी) अवस्था में है। अदालत ने यह फैसला पैरेंस पैट्रिए सिद्धांत के तहत दिया, जिसके तहत अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करती है जहां पीड़ित स्वयं अपने अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ होता है। 

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें महिला ने बताया कि उसके पति को इंट्राक्रैनियल हेमरेज (खोपड़ी के भीतर रक्तस्राव) के बाद से स्थायी कोमा जैसी स्थिति है और वह कोई निर्णय लेने या गतिविधि करने में सक्षम नहीं है। 

महिला ने अपने पति की चल-अचल संपत्तियों, वित्तीय मामलों, सामाजिक सुरक्षा लाभों और इलाज से जुड़े खर्चों के प्रबंधन के लिए कानूनी अभिभावक नियुक्त करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों से स्पष्ट है कि पति 100 प्रतिशत अक्षम है और उसके हित व कल्याण के लिए कानूनी संरक्षक नियुक्त करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दंपति के दोनों बच्चों ने बिना किसी आपत्ति के अपनी मां के पक्ष में हलफनामे दाखिल किए हैं। उप-जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट ने भी याचिकाकर्ता के दावों की पुष्टि की। 

हाईकोर्ट ने पत्नी को पति के इलाज, देखभाल, दैनिक खर्च, वित्तीय प्रबंधन और उसकी संपत्ति से जुड़े मामलों में निर्णय लेने का अधिकार दे दिया है, ताकि उसके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : आत्महत्या की
अदालती फैसले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : आत्महत्या की , धमकी पति के लिए मानसिक क्रूरता

क्रूरता केवल शारीरिक नहीं होती, धर्म परिवर्तन के दबाव पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

केरल हाईकोर्ट: कस्टडी के फैसले जेंडर
अदालती फैसले

केरल हाईकोर्ट: कस्टडी के फैसले जेंडर , नहीं, बच्चे के सर्वोत्तम हित पर आधारित होंगे

बेंच ने कहा - कस्टडी विवाद मां बनाम पिता की लड़ाई नहीं होनी चाहिए

सुप्रीम' टिप्पणी : मुकदमेबाजी निजी बदला लेने का जरिया नहीं
अदालती फैसले

सुप्रीम' टिप्पणी : मुकदमेबाजी निजी बदला लेने का जरिया नहीं

 दहेज उत्पीड़न मामले में अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवाद में पति का पत्नी पर आर्थिक प्रभुत्व क्रूरता नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट : पीड़िता का स्वेच्छा से कमरे में
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : पीड़िता का स्वेच्छा से कमरे में , जाना, यौन उत्पीड़न की सहमति देने का आधार नहीं

पीठ ने कहा कि निश्चित रूप से किसी भी व्यक्ति को पीड़िता का यौन उत्पीड़न करने का अधिकार इस आधार पर नहीं है कि वह स्वेच्छा...

पत्नी ने नहीं मांगी एलिमनी, सास के कंगन तक
अदालती फैसले

पत्नी ने नहीं मांगी एलिमनी, सास के कंगन तक , लौटाए... सुप्रीम कोर्ट बोला- यह तलाक का दुर्लभ मामला

कोर्ट ने कहा कि यह उन दुर्लभ समझौतों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की मांग नहीं की गई है।