संतोष चौहान : पैरों से लिखकर रची सफलता की कहानी

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संतोष चौहान : पैरों से लिखकर रची सफलता की कहानी

संतोष चौहान (Santosh Chauhan)  ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी बाधा इंसान को रोक नहीं सकती। बिना हाथों के भी उन्होंने अपने पैरों से लिखकर पढ़ाई पूरी की और आज एक सफल आंगनवाड़ी सुपरवाइजर हैं। मध्य प्रदेश के Rajgarh district में रहने वाली संतोष चौहान जब सिर्फ 8 साल की थीं, तब एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। बिजली का करंट लगने से उनके दोनों हाथ काटने पड़े। इस घटना के बाद लोगों ने मान लिया था कि अब वह पढ़ाई नहीं कर पाएंगी, लेकिन संतोष ने हार नहीं मानी।

 पैरों से लिखकर सीखी जिंदगी

उनके शिक्षक B L Potter ने उन्हें पैरों से लिखना सिखाया। धीरे-धीरे उन्होंने लिखना और पढ़ना सीखा। हर दिन अभ्यास किया। खुद को कभी कमजोर नहीं माना अंततः यही मेहनत आगे चलकर उनकी ताकत बन गई। संतोष ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और बीए फाइनल तक शिक्षा पूरी की। उनका मानना है  “महिलाएं किसी से कम नहीं हैं, बस आत्मविश्वास होना चाहिए। कभी हार मत मानो, हालात चाहे जैसे भी हों” 

आंगनवाड़ी सुपरवाइजर बनकर बनाई पहचान

आज Santosh Chauhan, राजगढ़ के खिलचीपुर विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। उन पर 128 आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी है। 2 सेक्टर की निगरानी करने के साथ ही वे  बच्चों की शिक्षा में योगदान तथा  महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सबसे खास बात वह अपने सभी काम पैरों से करती हैं।

 

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समाज के लिए बनी प्रेरणा

संतोष चौहान को कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। Gwalior में भी उन्हें सम्मान मिला, जहां उनकी मेहनत और हिम्मत की सराहना की गई। उनकी कहानी आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

परिवार का मिला पूरा साथ

संतोष की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है। बड़ी बहन और जीजा ने हमेशा उनका साथ दिया। किसान पिता ने कठिन हालात में भी पढ़ाई नहीं रुकने दी। परिवार का यही समर्थन उनकी ताकत बना।

सन्दर्भ स्रोत/छाया : किसान तक डॉट इन

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