जुनून, जिद और जिम्मेदारी इन तीन शब्दों में फुटबॉल कोच परम आशावर की प्रेरणादायक कहानी समाई है। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और गांव की बेटियों को फुटबॉल के मैदान तक पहुंचाने का सपना साकार किया।
12 लाख के कर्ज से खड़ी की टीम
टीम तैयार करने के लिए परम आशावर ने पहले 10 लाख रुपए का लोन लिया। इसके बाद भी जब पैसों की कमी बनी रही तो उन्होंने अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रखकर 2 लाख रुपए का अतिरिक्त कर्ज लिया। इस तरह कुल 12 लाख रुपए की व्यवस्था कर उन्होंने टीम के प्रशिक्षण, किट, यात्रा और रहने-खाने का खर्च खुद उठाया।
इंडियन वीमेंस लीग में मप्र को दिलाया तीसरा स्थान
परम आशावर ने सबसे पहले रायसेन डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल क्लब की टीम तैयार की। कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर टीम ने इंडियन वीमेंस लीग (टियर-2) में शानदार प्रदर्शन किया और मप्र को पॉइंट टेबल में तीसरा स्थान दिलाया। टीम ने मजबूत मानी जाने वाली ओडिशा फुटबॉल क्लब को हराकर सबको चौंका दिया।
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं मानी हार
टीम में शामिल अधिकांश खिलाड़ी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थीं और देश के अलग-अलग हिस्सों से आई थीं। किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता न मिलने के बावजूद खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
ग्रामीण बेटियों की प्रतिभा को दिया राष्ट्रीय मंच
परम आशावर का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती, जरूरत केवल सही अवसर और मार्गदर्शन की होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने टीम को तैयार किया और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
टीटी नगर स्टेडियम में हुआ फाइनल चयन कैंप
फाइनल टीम चयन के लिए टीटी नगर स्टेडियम में कैंप आयोजित किया गया, जिसमें 30 खिलाड़ियों में से 22 का चयन किया गया। मार्च में बेंगलुरु में खेले गए मुकाबलों में 22 खिलाड़ियों और 4 अधिकारियों सहित कुल 26 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया। टीम ने रूट्स फुटबॉल क्लब बेंगलुरु को हराकर प्रतियोगिता में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : दैनिक भास्कर



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