भोपाल के राजीव नगर की रहने वाली नेहा ममतानी ने हमेशा से समाज में बदलाव लाने का सपना देखा था। उनका उद्देश्य था कि गरीब और जरूरतमंद बच्चे भी अच्छी शिक्षा हासिल कर सकें और जीवन में बेहतर अवसरों की दिशा में कदम बढ़ा सकें। हालांकि पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वे कभी नौकरी नहीं कर पाई, लेकिन 2011 में उनके बेटे का चयन आईआईटी कानपुर में हुआ, जिससे उनकी सोच में बदलाव आया। वे सोचने लगीं कि अगर उनका बेटा इस बड़े संस्थान तक पहुंच सकता है, तो कितने ऐसे गरीब और प्रतिभाशाली बच्चे होंगे, जिन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर नहीं मिल पाते। यही सोच उनके जीवन की दिशा बदलने की वजह बनी और उन्होंने समाज के वंचित बच्चों के लिए काम करने का निर्णय लिया।
शुरुआत स्वास्थ्य से
नेहा ने अपनी यात्रा की शुरुआत उन बच्चों से की जो सड़कों पर भीख मांगते थे, नशे की लत में फंसे थे या स्कूल जाने में असमर्थ थे। शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 10 बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उनकी प्राथमिकता बच्चों की सेहत थी, क्योंकि उनकी स्थिति बहुत खराब थी। उन्होंने बच्चों को पौष्टिक आहार देने का प्रयास किया और विशेष रूप से लड़कियों को मासिक धर्म और स्वच्छता के बारे में जागरूक किया। उनका मानना था कि जब तक बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होगा, वह पूरी तरह से शिक्षा में ध्यान नहीं दे पाएगा।
समाज में सकारात्मक बदलाव
आज नेहा की मेहनत और समर्पण का परिणाम यह है कि अब तक 160 से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर अच्छे स्थानों पर पहुंच चुके हैं और लगभग 600 बच्चों का भविष्य संवर चुका है। वर्तमान में भी 62 बच्चे नियमित रूप से उनसे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। नेहा बच्चों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें विधानसभा, साइंस सेंटर और ट्राइबल म्यूजियम जैसी जगहों पर ले जाकर उन्हें व्यवहारिक ज्ञान भी देती हैं।
बेटे का मां के संघर्ष में सहयोग
चुनौतियों के बावजूद नेहा ने अपनी राह नहीं छोड़ी। शुरुआत में संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए छोटे कमरे किराए पर लिए, लेकिन कई बार जब पढ़ाई की जगह नहीं मिली, तो बच्चों को मंदिरों और बागों में भी पढ़ाया। लेकिन वहाँ भी कई बार उन्हें रोका गया। इन कठिन परिस्थितियों में उनके बेटे ने उनका साथ दिया और अपनी उच्च शिक्षा छोड़कर जल्दी नौकरी करने का फैसला किया, ताकि वह आर्थिक रूप से मां की मदद कर सके। 2012 में जवाहर सीनियर स्कूल की प्रोफेसर शारधा ने उनकी आर्थिक मदद की, जिससे कई अन्य समाजसेवी भी उनके साथ जुड़ने लगे।
नेहा का संघर्ष और उनकी मेहनत यह दर्शाती है कि अगर किसी के पास सच्ची नीयत और इरादा हो, तो वह किसी भी हालात में समाज में बदलाव ला सकता है। उनका यह कार्य लाखों बच्चों के लिए एक प्रेरणा है, जो यह सोचते हैं कि वे कभी आगे नहीं बढ़ सकते। आज, नेहा ममतानी की संस्था ने समाज में बदलाव की एक नई दिशा दिखाई है।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : नेहा ममतानी



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