भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पहली बार देश में एक साथ चार महिला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस कार्यरत हैं। इसे महिला प्रतिनिधित्व, लैंगिक संतुलन और न्यायिक नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि जस्टिस मीनाक्षी मदन राय को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने के बाद दर्ज हुई। इसके साथ ही देश के विभिन्न हाईकोर्टों में चार महिलाएं शीर्ष न्यायिक पद पर पहुंच गई हैं।
वर्तमान में देश की चार महिला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस हैं— जस्टिस मीनाक्षी मदन राय (पटना हाईकोर्ट), जस्टिस सुनीता अग्रवाल (गुजरात हाईकोर्ट), जस्टिस रेवती मोहिते डेरे (मेघालय हाईकोर्ट) और जस्टिस लिसा गिल (आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट)।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल मूल रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट से हैं और 23 जुलाई 2023 से गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत हैं। वहीं जस्टिस रेवती मोहिते डेरे को 10 जनवरी 2026 को मेघालय हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था।
इसके अलावा जस्टिस लिसा गिल ने 25 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पदभार संभाला। वह इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से संबद्ध रही हैं।
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न्यायपालिका में बढ़े महिलाओं का प्रतिनिधित्व : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
संसद में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 तक देश के विभिन्न हाईकोर्टों में कार्यरत 781 न्यायाधीशों में से 116 महिलाएं थीं। यह कुल न्यायाधीशों की संख्या का लगभग 14.85 प्रतिशत है। यह आंकड़ा न्यायपालिका में महिला भागीदारी के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।
इससे पहले देश में एक समय में अधिकतम तीन स्थायी महिला चीफ जस्टिस ही कार्यरत रही थीं। वर्ष 2018 में चार महिलाओं ने हाईकोर्टों का नेतृत्व किया था लेकिन उनमें से एक एक्टिंग चीफ जस्टिस थीं। उस समय जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस मंजुला चेल्लूर और जस्टिस जी रोहिणी विभिन्न हाईकोर्टों की चीफ जस्टिस थीं जबकि जस्टिस निशिता निर्मल म्हात्रे कलकत्ता हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत थीं।
एक साथ चार महिला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस का पद पर होना भारतीय न्यायपालिका में महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व में समान अवसर और लैंगिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : लाइव लॉ



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