बॉम्बेहाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी एक वर्ष की बेटी की कस्टडी अपनी अलग रह रही पत्नी को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्ची का सर्वाहित हित मां के साथ है क्योंकि वह अभी भी स्तनपान कर रही है। जस्टिस एसवी कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की पीठ ने आदेश में कहा कि महिला पर हमला होने के बाद उसे अपना ससुराल छोड़ना पड़ा।
चूंकि उसकी ननद ने उसकी बेटी को छीन लिया था, इसलिए वह बच्ची को अपने साथ नहीं ले जा सकी। हाईकोर्ट ने कहा, ''बच्ची स्तनपान के लिए कुछ हद तक मां पर निर्भर है। यह एक महत्वपूर्ण बात है।'' कोर्ट ने यह आदेश महिला द्वारा अपनी बेटी की कस्टडी की मांग करने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया गया।
पति के पास एक साल की बेटी
इसमें महिला ने कहा कि पिछले महीने उसके पति और ननद ने उससे मारपीट की थी, जिसके बाद उसे खुद को बचाने के लिए ससुराल छोड़ना पड़ा। तब से उसकी एक वर्ष की बेटी उसके पति के पास है। याचिका के मुताबिक, दंपती ने 2023 में विवाह किया था। उसके बाद से महिला के साथ शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक क्रूरता की गई।
उक्त व्यक्ति ने याचिका का विरोध किया और कहा कि उसकी पत्नी खुद ही घर छोड़कर चली गई है और उसके साथ रहने से इन्कार कर दिया है। बच्ची के लिए अच्छा यही होगा कि वह उसके साथ रहे क्योंकि वह कमा रहा है, जबकि उसकी पत्नी नहीं कमा रही है। कानून के मुताबिक पिता भी बच्ची का स्वाभाविक संरक्षक है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि वह काम कर रहा है, इसलिए वह बच्ची की देखभाल करने की स्थिति में नहीं होगा और अब अपने माता-पिता के साथ रह रही महिला बच्ची की बेहतर देखभाल कर सकेगी। कोर्ट ने उस व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को भेजे गए वाट्सएप मैसेज पर भी देखे, जिसमें उसने गाली-गलौज और गंदी भाषा का इस्तेमाल किया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि महिला के आरोपों में दम है कि उसे अपनी ससुराल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि वह अपनी सुरक्षा के प्रति चिंतित थी। बेटी को उसकी ननद ने छीन लिया था, उसने अपनी मर्जी से बच्ची को ससुराल में नहीं छोड़ा था। पीठ ने मुंबई पुलिस को बच्ची को पिता से लेकर उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया।



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