हिप्र मंडी कोर्ट : दूसरी पत्नी को भी मिलेगा पहली जैसा अधिकार

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हिप्र मंडी कोर्ट : दूसरी पत्नी को भी मिलेगा पहली जैसा अधिकार

हिमाचल प्रदेश में जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला किसी पुरुष के साथ शादी जैसी प्रकृति के रिश्ते में रहती है, तो वह घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भरण-पोषण की हकदार है। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए प्रतिवादी सोलन जिले के कसौली निवासी मान सिंह को आदेश दिया कि वह अपनी दूसरी पत्नी को 7,500 रुपये मासिक गुजारा भत्ता और 2,500 रुपये मकान किराया अदा करे।

पति के लापता होने पर कर लिया दूसरा विवाह

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता चंद्रवती का पहला पति वर्ष 1998 से लापता था, जिसे 2012 में कानूनी रूप से मृत घोषित कर दिया गया। इस बीच, वर्ष 2008 से वह मान सिंह के साथ रहने लगी और 2010 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। हालांकि, मान सिंह पहले से शादीशुदा था, फिर भी दोनों ने 2013 में मंदिर में विवाह कर लिया।

पिटाई कर घर से निकाल दिए

बाद में मान सिंह ने पत्नी और बच्चे को अपनाने से इन्कार कर दिया व पिटाई कर घर से निकाल दिया। इससे पहले, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने केवल बच्चे के लिए 6,000 रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया था, लेकिन महिला की याचिका को खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ चंद्रवती ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। 

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कोर्ट ने की टिप्पणी

उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद मामले की नए सिरे से सुनवाई हुई। सत्र न्यायाधीश पारस डोगर ने अपने निर्णय में कहा कि भले ही प्रतिवादी की पहली पत्नी जीवित होने के कारण यह विवाह कानूनी रूप से वैध न हो, लेकिन दोनों लंबे समय तक साथ रहे। घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत यह घरेलू संबंध की श्रेणी में आता है।

महिला के पक्ष में संरक्षण आदेश भी जारी 

न्यायालय ने प्रतिवादी को 23 मई 2018 से पत्नी को 7,500 रुपये प्रतिमाह देने, अलग रहने के लिए 2,500 रुपये प्रति माह किराया देने के आदेश दिए। कोर्ट ने महिला के पक्ष में संरक्षण आदेश भी जारी किया है। अदालत ने माना कि प्रतिवादी सेना से सेवानिवृत्त नायब सूबेदार है और उसकी आर्थिक स्थिति सक्षम है, इसलिए वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

 

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