मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला की गरिमा उसके आश्रय और रहने के अधिकार से गहराई से जुड़ी होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीवन जीने और सुरक्षित आवास का अधिकार भी शामिल है।
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें वी. मलार नाम की महिला ने आरोप लगाया कि मदुरै जिले के उसिलमपट्टी क्षेत्र में उसकी जमीन पर अतिक्रमण कर उसका घर अवैध रूप से तोड़ दिया गया। महिला ने बताया कि उसने पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने माना कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह अवैध थी और किसी भी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखल नहीं किया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि विवाद की जानकारी होने के बावजूद शांति बनाए रखने और संपत्ति की सुरक्षा करना पुलिस का दायित्व था, जिसे निभाने में विफलता हुई।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इस पर अदालत ने जांच को चार सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों को पीड़ित महिला को उचित मुआवजा देना होगा और उसके घर का तत्काल पुनर्निर्माण भी करना होगा। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई केवल संपत्ति का नुकसान नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।



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