जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। Rajasthan High Court के जस्टिस अनूप कुमार ने कहा कि पीड़िता की निजी या अश्लील तस्वीरें और वीडियो खुले रूप में अदालत में दाखिल करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे उनकी गरिमा और गोपनीयता का उल्लंघन होता है।
वहीं, एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने Adarsh Credit Cooperative Society से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में सीईओ राजीव कुमार राणा को चार वर्ष पहले मिली डिफॉल्ट जमानत रद्द कर दी है।
सीलबंद लिफाफे में देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अलवर जेल में बंद आरोपी नवीन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि अक्सर आरोपी या उसके वकील बचाव में जांच अधिकारी और अदालत के समक्ष दंपति के निजी क्षणों को दर्शाने वाली तस्वीरें या वीडियो पेश कर देते हैं ताकि सहमति साबित की जा सके। लेकिन ऐसी सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल पीड़िता का अश्लील चित्रण करता है और उसकी गोपनीयता भंग करता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि “जब धन खो जाता है तो कुछ नहीं खोता, लेकिन जब सम्मान खो जाता है तो सब कुछ खो जाता है।” अदालत ने कहा कि महिला की गोपनीयता उसकी ढाल है और सम्मान उसकी आत्मा है। इनमें से किसी एक का भी हनन दूसरे को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
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महिला की गरिमा और आश्रय अधिकार पर मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने निर्देश दिया कि अब आरोपी, वकील, पुलिस अधिकारी या कोई भी पक्षकार पीड़िता की निजी या अश्लील तस्वीरें और वीडियो खुले रूप में याचिका, हलफनामे या चार्जशीट के साथ संलग्न नहीं कर सकेगा। ऐसी सभी सामग्री केवल सीलबंद लिफाफे में या पासकोड-सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही प्रस्तुत की जाएगी।
रजिस्ट्री और पुलिस को विशेष निर्देश
• अदालत ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों से संबंधित सभी याचिकाओं की सख्त जांच करने का निर्देश दिया है ताकि पीड़िता का नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया विवरण कहीं भी उजागर न हो।
• साथ ही, रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया गया है कि मामले को प्रशासनिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए, ताकि पूरे राज्य के लिए स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किए जा सकें।
• इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल, अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग के निदेशक को आदेश की प्रति भेजने तथा सभी थानों के एसएचओ को निर्देशित करने को कहा गया है कि पीड़िताओं से संबंधित अश्लील सामग्री खुले रूप में प्रस्तुत न की जाए।
निजी क्षणों की रिकॉर्डिंग पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने नैतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि दंपति के निजी क्षणों को फोटो या वीडियो में रिकॉर्ड करना नैतिक रूप से उचित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी सामग्री का उपयोग दूसरे पक्ष को सार्वजनिक रूप से बेनकाब करने के लिए करता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अदालत ने वर्तमान मामले में भी नाराजगी जताई कि पीड़िता की अश्लील तस्वीरें याचिका के साथ खुले रूप में पेश की गईं, जो उसकी गोपनीयता और सम्मान की अवहेलना है।
घोटाले के आरोपी की डिफॉल्ट जमानत रद्द
एक अन्य मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने Adarsh Credit Cooperative Society से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में सीईओ राजीव कुमार राणा को चार वर्ष पहले मिली डिफॉल्ट जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि निचली अदालत ने चार्जशीट को अधूरी मानकर गंभीर त्रुटि की थी। जांच केवल चार बिंदुओं पर लंबित थी, लेकिन इससे चार्जशीट अधूरी नहीं हो जाती।
अदालत ने यह भी कहा कि व्हाइट कॉलर अपराधों की जांच में समय लगता है और निचली अदालत ने आदेश पारित करते समय अपने न्यायिक विवेक का समुचित प्रयोग नहीं किया। इसलिए आरोपी को दी गई डिफॉल्ट जमानत रद्द की जाती है।
राज्य सरकार और आरोपी के तर्क
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विजय सिंह यादव ने कहा कि आरोपी को 13 अप्रैल 2022 को गिरफ्तार किया गया था और 8 जुलाई 2022 को चार्जशीट अदालत में पेश कर दी गई थी। इसके बावजूद एडीजे क्रम-6, जयपुर महानगर द्वितीय ने 23 नवंबर 2022 को चार्जशीट को अधूरी मानते हुए आरोपी को सीआरपीसी की धारा 167(2) के तहत डिफॉल्ट जमानत दे दी।
वहीं, आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि जमानत मिलने के लगभग चार वर्ष बाद उसे रद्द करने की याचिका दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। आरोपी करीब साढ़े तीन वर्ष जेल में रह चुका है और उसकी 93 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की डिफॉल्ट जमानत रद्द करने का आदेश पारित कर दिया।



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