जम्मू-कश्मीर–लद्दाख हाईकोर्ट: शादी के बाहर

blog-img

जम्मू-कश्मीर–लद्दाख हाईकोर्ट: शादी के बाहर
संबंध रखने वाली महिला रिश्तेदार नहीं

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पति के साथ विवाहेतर संबंध रखने वाली महिला को कानून की नजर में रिश्तेदार नहीं माना जा सकता। ऐसे में उस पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला ऊधमपुर के महिला पुलिस थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें पत्नी ने अपने पति, सास-ससुर और अन्य परिवार के सदस्यों पर दहेज मांगने, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। साथ ही, उसने एक अन्य महिला (आरती देवी) पर अपने पति के साथ अवैध संबंध रखने का आरोप भी लगाया और उसे भी इस मामले में आरोपी बनाया गया।

कोर्ट का फैसला क्यों अहम है?

हाईकोर्ट ने कहा कि:

• रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 498-A (जो IPC की धारा 498-A के समान है) केवल 'पति या उसके रिश्तेदारों' पर लागू होती है।

• कोई गर्लफ्रेंड या कथित रखैल 'रिश्तेदार' की श्रेणी में नहीं आती

• 'रिश्तेदार' शब्द का अर्थ एक कानूनी और सामाजिक दर्जा (Status) होता है, जो विवाह या खून के रिश्ते से जुड़ा होता है।

इसी आधार पर कोर्ट ने आरती देवी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

किन धाराओं के तहत मामला दर्ज था?

• RPC धारा 498-A – क्रूरता और दहेज उत्पीड़न

• RPC धारा 506 – आपराधिक धमकी

• याचिका दायर की गई थी CrPC की धारा 561-A (जो धारा 482 के समान है) के तहत

याचिकाकर्ताओं का पक्ष- याचिकाकर्ताओं (पति और उसके परिवार) ने अदालत में कहा कि पति ने पहले ही वर्ष 2016 में विवाह रद्द करने की याचिका दाखिल कर दी थी। पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी की शिकायत भी पहले दर्ज की जा चुकी थी। वर्तमान FIR केवल 'काउंटर ब्लास्ट' (जवाबी कार्रवाई) है।

शिकायतकर्ता का आरोप - पत्नी, जो पेशे से पुलिसकर्मी है, ने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ ही महीनों बाद ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग शुरू कर दी, उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पति का दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध है

कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि “किसी भी तरह से कोई गर्लफ्रेंड या यहां तक कि शाब्दिक अर्थ में कोई रखैल भी ‘रिश्तेदार’ नहीं मानी जा सकती।”

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



 पति जिम्मेदारी से नहीं बच सकता : गुजारा-भत्ता
अदालती फैसले

 पति जिम्मेदारी से नहीं बच सकता : गुजारा-भत्ता , पर मप्र हाईकोर्ट का फैसला

कम आय का बहाना नहीं चलेगा हाईकोर्ट ने पति को सुनाया बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट  : पिता बच्चे की अभिरक्षा
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : पिता बच्चे की अभिरक्षा , किसी को भी नहीं सौंप सकता

नाबालिग बच्चों की कस्टडी पर हाईकोर्ट सख्त, पिता के अधिकारों पर अहम टिप्पणी

विवाह से नहीं बदलती जाति, आरक्षण पर
अदालती फैसले

विवाह से नहीं बदलती जाति, आरक्षण पर , पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला

कहा - जाति जन्म से तय होती है, शादी से नहीं दूसरे राज्य में शादी करने पर नहीं मिलेगा OBC आरक्षण का लाभ

पति के पास बेवफाई के सबूत मप्र हाईकोर्ट ने तस्वीरों को माना सही
अदालती फैसले

पति के पास बेवफाई के सबूत मप्र हाईकोर्ट ने तस्वीरों को माना सही

एमपी हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक मामलों में 65-बी सर्टिफिकेट के बिना भी तस्वीरों को सबूत माना जा सकता है।