महिलाओं को मौका मिले तो वो क्या कुछ नहीं कर सकती, इस बात को साबित कर दिखाया है मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की आशा कैथवास ने। कभी खेतों में मजदूरी करने वाली आशा आज न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि करीब 200 महिलाओं को रोजगार देकर उनके जीवन में भी बदलाव ला चुकी हैं।
आशा का बचपन और शुरुआती जीवन आर्थिक तंगी में गुजरा। शादी से पहले वह खेतों में मजदूरी किया करती थीं। लेकिन विवाह के बाद उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। पति और परिवार के सहयोग से उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया।
स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी
आशा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने सफर की शुरुआत की। यहां से उन्होंने केले के रेशे से उत्पाद बनाना सीखा और धीरे-धीरे इसे अपना व्यवसाय बना लिया। उनके उत्पादों को लोगों ने काफी पसंद किया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। केले के रेशे से बनाए गए उत्पादों ने आशा को एक अलग पहचान दिलाई। उनके बनाए उत्पाद बाजार में पसंद किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है।
200 से ज्यादा महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
आशा ने सिर्फ खुद तक सीमित न रहते हुए अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ाया। आज उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में करीब 20 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं, जिनसे 200 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं बकरी पालन, सिलाई, केले के रेशे से उत्पाद निर्माण और अन्य छोटे व्यवसायों के जरिए अपनी आजीविका चला रही हैं। आशा ने इन महिलाओं को बैंक से लोन दिलाने में भी मदद की, जिससे वे अपना काम शुरू कर सकें। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने लगभग 6 लाख रुपए का लोन भी प्राप्त किया।
अन्य कामों से लाखों की कमाई
आशा नल-जल योजना के तहत गांव में वसूली का काम भी करती हैं। इसके अलावा वह असीरगढ़ में ‘दीदी कैफे’ का संचालन भी करती हैं, जहां लोग उनके हाथ का बना खाना पसंद करते हैं। इन सभी कार्यों से वह सालाना 2 से 3 लाख रुपए तक की कमाई कर रही हैं। पिछले 10 वर्षों से लगातार मेहनत कर रही आशा आज गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी बदौलत कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और उन्हें अब ‘लखपति दीदी’ के नाम से भी जाना जाता है।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : न्यूज़ 18
संपादन : मीडियाटिक डेस्क



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