47 दिन में रेत माफ़िया के 8 हमले झेले, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

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47 दिन में रेत माफ़िया के 8 हमले झेले, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

छाया : दैनिक भास्कर

• रजनीश दुबे

चंबल नदी से अवैध उत्खनन कर रेत निकालने वाले माफ़िया के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ कार्रवाई करने वाली वन विभाग की अफसर (एसडीओ) श्रद्धा पंद्रे इन दिनों चर्चा में हैं। पिछले 47 दिन में रेत माफिया के 8 हमले झेलने के बाद भी उनका ‘मिशन चंबल’ कमजोर नहीं पड़ा। इन हमलों में उन पर रेत माफ़िया ने 6 बार गोलियां चलाईं और दो बार ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलने की कोशिश की।

दो माह पहले बैतूल से स्थानांतरित होकर मुरैना आईं श्रद्धा ने 40 से ज्यादा अवैध रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर माफ़िया में खलबली मचा दी है। बालाघाट की मूल निवासी ये दबंग महिला अधिकारी आधी रात को सशस्त्र जवानों के साथ चंबल के उन घाटों पर छापा मारने पहुंचती हैं, जहां दिन में भी लोग जाने से डरते हैं। बंदूकों से लैस रेत माफिया से घिरने के बाद भी वे भागने के बजाए उनका न केवल सामना करती हैं बल्कि उन्हें आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर देती हैं। देवरी घड़ियाल केंद्र में पदस्थ श्रद्धा अपने डेढ़ साल के बेटे को केयर टेकर के भरोसे छोड़ ज्यादातर समय ड्यूटी पर रहती हैं।

श्रद्धा बताती हैं कि वे छह माह की थीं, तब मां का निधन हो गया। भाई-बहनों ने पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। जब मेरा तबादला मुरैना हुआ तो लोगों ने कहा कि वहां मत जाओ, वहां तो आईपीएस तक की हत्या कर दी जाती है। रेत माफिया दिनदहाड़े कुचल देता है। इतना कुछ सुनकर मुझे खुशी हुई, क्योंकि मुझे तो ऐसी ही चुनौतीपूर्ण जगह काम करना था। जो लोग दूसरे विभागों में नौकरी करते हैं, क्या वो नहीं मरते। लोग मुझे जितना डराएंगे, मैं उतनी ख़तरनाक होती जाऊंगी। पहले भी मेरे तबादले इसी कारण हुए। मुझ पर पुलिस का आरोप रहता है कि मैडम बिना बताए कार्रवाई के लिए जाती हैं, हम भी तो पुलिस से पूछ सकते हैं कि हमारी सूचना पर कार्रवाई के लिए पुलिस को इतनी देर क्यों लगती है।

साभार : दैनिक भास्कर

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