चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि सैनिक की तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता भले ही तलाक मां की मृत्यु के बाद हुआ हो। कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि बेटी मां पर आश्रित थी तो तलाक के समय से कोई फर्क नहीं पड़ता। नियमों के अनुसार तलाकशुदा आश्रित बेटी पेंशन की हकदार है।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने यह आदेश केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज करते हुए दिए जिसमें आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) चंडीगढ़ के आदेश को चुनौती दी गई थी। एएफटी ने 26 जुलाई 2023 को रीता शर्मा को उनकी मां मोतिया देवी की मृत्यु के बाद आश्रित पेंशन देने का आदेश दिया था।
रीटा शर्मा के पिता 30 अक्टूबर 1946 को सेना में भर्ती हुए थे और 17 मई 1965 को सेवा से मुक्त कर दिए गए थे। उन्हें विकलांगता पेंशन भी मिली थी। उनकी मृत्यु 14 फरवरी 1986 को हुई। इसके बाद उनकी पत्नी मोतिया देवी को पारिवारिक पेंशन दी गई। लेकिन उनकी मृत्यु 10 अगस्त 2005 को हो गई।
इसके बाद रीटा शर्मा ने तलाकशुदा और आश्रित बेटी होने के आधार पर पेंशन का दावा किया। केंद्र सरकार का तर्क था कि चूंकि रीटा का तलाक 12 दिसंबर 2006 को हुआ यानी मां की मृत्यु के बाद, इसलिए उसे पेंशन का अधिकार नहीं है। हाई कोर्ट ने पाया कि 1999 से ही रीटा शर्मा अपने पति से अलग रह रही थीं और पूरी तरह मां पर आश्रित थीं।
अदालत ने कहा, जब रीटा शर्मा अपनी मां मोतिया देवी पर जीवित रहते ही आश्रित थीं, तो केवल इस आधार पर उन्हें पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि तलाक का आदेश मां की मृत्यु के बाद पारित हुआ। इस प्रकार हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी।
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