सिंगापुर मैराथन में भोपाल की निकिता

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सिंगापुर मैराथन में भोपाल की निकिता
होरा का शानदार प्रदर्शन, जीते तीन पदक

छाया : इन्स्टाग्राम अकाउंट - कॉफीएडिक्ट जिमरेट

भोपाल। एडवोकेट, एंटरप्रेन्योर और एथलीट निकिता होरा ने सिंगापुर में आयोजित सिंगापुर मैराथन 2025 में शानदार प्रदर्शन किया। यह मैराथन दो दिवसीय नए फॉर्मेट में आयोजित की गई थी। पहले दिन 5 किमी रेस और दूसरे दिन पूर्ण मैराथन (42.195 किमी) आयोजित हुई। निकिता ने डबल चैलेंज में भाग लिया। उन्होंने 5 किमी रेस में 875 प्रतिभागियों में दूसरी सबसे तेज धावक का खिताब हासिल किया। वहीं पूर्ण मैराथन 3 घंटें 56 मिनट में पूरी की और 571 रनर्स में दुनियाभर की महिलाओं में 21वें स्थान पर रहीं। उन्हें इवेंट में तीन मेडल (5 किमी, 42 किमी और डबल चैलेंज) मिले। 

बता दें कि 30 वर्षीय निकिता पेशे से वकील है और वर्तमान में पिता के कोयला व्यापार और लॉजिस्टिक्स के व्यवसाय को संभाल रही है। मैराथन रनिंग के अलावा वे एक पावरलिफ्टर और हाइब्रिड एथलीट भी है। वे लगातार चार महीने से किसी ने किसी इवेंट में भाग ले रही हैं और प्राइज जीत रही हूं। उन्होंने सितंबर में मुंबई हायरॉक्स, अक्टूबर में दिल्ली में हाफ मैराथन, नवंबर में चंडीगढ़ में योद्धा और दिसंबर में सिंगापुर मैराथन की।

हाइब्रिड एथलीट

निकिता बताती हैं, वे एक हाइब्रिड एथलीट हैं। इसका अर्थ है आम मैराथन में सिर्फ रनिंग होती है, लेकिन कुछ इवेंट्स ऐसे होते हैं, जिसमें रनिंग, पावरलिफ्टिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी होती है। ये इंटरनेशनल लेवल के इवेंट्स अब इंडिया में भी हायरॉक्स और योद्धा नाम से होने लगे हैं। उन्होंने मुंबई और दिल्ली के हायरॉकस और चंडीगढ़ के योद्धा में भाग लिया है। योद्धा में वे सेकेंड रनरअप थी। 

धीरे-धीरे स्पीड रनिंग बनी पैशन

बता दें कि निकिता कोयला व्यापार और लॉजिस्टिक्स के व्यवसाय में काम करने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने ओपी जिंदल ग्लोबल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत से लॉ किया है। इस दौरान उन्होंने ऑक्सफॉर्ड से इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स इन बिजनेस एंटिटीज और बिजनेस लॉ एंड एंटरप्रेन्योरशिप का कोर्स किया। इसके बाद पुणे में कुछ समय नौकरी की। पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वे वापस भोपाल आईं और पिता के व्यापार से जुड़ गईं। इस दौरान स्ट्रेस इटिंग हैबिट्स की वजह से उनका वजन 89 किलो पहुंच गया। दोस्तों की सलाह पर उन्होंने रनिंग कम्युनिटी जॉइन की और धीरे-धीरे ये उनका पैशन बन गया। इसके बाद उन्होंने गति पर काम शुरू किया। इन्होंने प्रोटीन, कार्ब के इंटेक, सोने के पैटर्न पर काम किया। स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग की। पूरी तरफ लाइफ स्टाइल बदली, नतीजा आज वजन 59 किलो है। इसके लिए उन्होंने खान-पान पर कंट्रोल किया, रनिंग, वेटलिफ्टिंग की है। निकिता कहती हैं। यह मिथ है कि वजन कम करने के लिए चावल, रोटी, केला छोड़ना चाहिए। मैं ये सारी चीजें खाती हूं। केला तो एनर्जी गेन करने में सबसे ज्यादा मददगार होता है, तभी तो हर इवेंट के बाद एथलिट्स को केला खाने के लिए दिया जाता है। लोगों को लगता है कि जिसे वजन बढ़ाना है, उसे केला खाना चाहिए। ऐसा नहीं है। हां, ये जरूर है कि मैंने तैलीय चीजें छोड़ दी हैं।

सन्दर्भ स्रोत : पत्रिका समाचार पत्र

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