लिव इन में रहने वालों को तगड़ा झटका,

blog-img

लिव इन में रहने वालों को तगड़ा झटका,
‘शपथ पत्र’ पर सख्त हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने लिव इन रिलेशनशिप (Live in Relationship) को लेकर दिए जाने वाले शपथ पत्रों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, इस तरह के शपथ पत्र समाज में परिवारों के गौरव और सम्मान को प्रभावित करते हैं। साथ ही, इससे युवतियों में यह धारणा बनती है कि वे कानूनी रूप से किसी के साथ रह रही हैं, जिससे उनके अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं। मामले पर हाईकोर्ट सख्त नजर आया।

ये है मामला

कोर्ट ने सबलगढ़ (मुरैना) के नोटरी राघवेंद्र शर्मा द्वारा लिव इन रिलेशनशिप का शपथ पत्र सत्यापित करने को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए इसे क्षमा योग्य नहीं माना। कोर्ट ने विधि विधायी विभाग के प्रमुख सचिव को उनके आचरण की जांच कर तीन माह में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का यह आदेश शपथ पत्र के जरिए लिव इन रिलेशन की वैधता (legality of live in relationship) को लेकर अहम है। संभवत: अपने आप में यह पहला ऐसा मामला सामने आया है।

 

ये भी पढ़िए ...

दिल्ली हाईकोर्ट : लिव-इन रिलेशन का हवाला देकर नहीं बच सकता आरोपी

 

नोटरी की माफी भी नहीं हुई स्वीकार

याचिकाकर्ता ललित रजक ने कहा था कि साथी युवती उसके साथ लिव इन में थी और उससे चार माह का बच्चा भी है, लेकिन अपर कलेक्टर ने उसे सुधार गृह भेज दिया। उसे रिहा नहीं कर रहे। शपथ पत्र को मुरैना में नोटरी राघवेंद्र शर्मा ने प्रमाणित किया था। जब कोर्ट ने नोटरी से कानूनी आधार पूछा, तो उन्होंने विवाह और तलाक से इसे भिन्न बताते हुए माफी मांगी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

सन्दर्भ स्रोत : पत्रिका समाचार पत्र

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



बॉम्बे हाईकोर्ट : पत्नी घर का काम करने से कर सकती है इनकार
अदालती फैसले

बॉम्बे हाईकोर्ट : पत्नी घर का काम करने से कर सकती है इनकार

कोर्ट ने कहा - शादी सेवा अनुबंध नहीं बराबरी की साझेदारी

हिप्र हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला के साथ लिव-इन
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला के साथ लिव-इन , रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता नहीं

 प्रदेश हाईकोर्ट ने लिव-इन पार्टनर की ओर से शादीशुदा महिला की कस्टडी को लेकर दायर याचिका पर अहम फैसला दिया है। 

हिप्र हाईकोर्ट : विवाहेतर संबंधों को
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : विवाहेतर संबंधों को , नहीं मिल सकती 'न्यायिक मान्यता'

शादीशुदा महिला की कस्टडी के लिए याचिका खारिज हुई। हाई कोर्ट ने वैवाहिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया।

अहमदाबाद फैमिली कोर्ट: पति की सहमति के
अदालती फैसले

अहमदाबाद फैमिली कोर्ट: पति की सहमति के , बिना 'खुला' के जरिए तलाक की इजाजत,

अदालत ने एक दंपती की शादी को खत्म घोषित कर दिया है. इसके साथ ही नाबालिग बेटे की कस्टडी मां को सौंप दी गई है.

जयपुर फैमिली कोर्ट : सोशल मीडिया पर व्यवहार बना
अदालती फैसले

जयपुर फैमिली कोर्ट : सोशल मीडिया पर व्यवहार बना , मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

जयपुर फैमिली कोर्ट ने एक मामले में पत्नी के सोशल मीडिया व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति को तलाक की डिक्री प्रदान...