शिक्षा से वंचित बच्चों के जीवन में ज्ञान का

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शिक्षा से वंचित बच्चों के जीवन में ज्ञान का
उजियारा फैला रहीं भोपाल की अलंकृता

छाया : देशबन्धु

भोपाल। कहते हैं शिक्षा एक ऐसा माध्यम  है, जिसके जरिए आप अपने जीवन को बेहतर कर सकते हैं, लेकिन अभावों में पल रहे कई बच्चे शिक्षा से महरूम रह जाते हैं। शिक्षा से वंचित ऐसे बच्चों के जीवन में शिक्षा का प्रकाश फैला रहीं हैं भोपाल की अलंकृता जोसफ।

पेशे से शिक्षक अलंकृता अपने अध्यापन के फर्ज के साथ समाजसेविका के कर्तव्य का निर्वहन भी रही हैं। वे बिना किसी मदद से 11 साल से वंचित बच्चों को पढ़ा रही हैं ताकि वे अपना जीवनयापन बेहतर कर सकें। अलंकृता का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके बूते हम अपना और दूसरों का जीवन संवार सकते हैं। इसी बात ध्यान में रखकर वंचितों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया।

एक बच्चे की पढ़ने की इच्छा से मिली प्रेरणा

अलंकृता ने बताया कि उनके माता-पिता स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और बचपन से उन्होंने दूसरों की मदद करते देखा है। वे पहले मेडिकल फील्ड में ही करियर बनाना चाहती थीं, उन्होंने पीएमटी क्लियर भी की, लेकिन इसे छोड़ उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चुना।

वर्ष 2014 में एक मॉल के बाहर मिले बच्चे की बातों ने उन्हें अन्दर तक झकझोर दिया। पढ़ाई के बारे में जब उससे पूछा तो उसने बताया पैसों की तंगी के चलते वह पढ़ नहीं सकता, लेकिन बोला- कोई पढ़ाए तो जरूर पढूंगा। अलंकृता ने उसी दिन ऐसे बच्चों को पढ़ाने-लिखाने और उन्हें हुनर सिखाने का संकल्प लिया। यहीं से उनका सफर शुरू हुआ, जो अब कई बच्चों और परिवारों की जिंदगी बदल चुका है।

50 बच्चों से अधिक को पढ़ा चुकी हैं

अलंकृता ने बताया कि उनके पैरेंट्स स्पेशल ओलंपिक्स भारत से जुड़े रहे हैं। एक दिन माँ ने सर्टिफिकेट लिखने को कहा, यहीं से उनका जुड़ाव ऐसे बच्चों से हुआ। उन्होंने पढ़ाना शुरू किया जो शुरुआत में मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे सीखने लगे। वे बच्चों को वैज्ञानिक तरीकों से जैसे पृथ्वी का घूमना, पानी का उबलना आदि समझाती हैं। 2010 से अब तक 50 से अधिक बच्चों को पढ़ा चुकी हैं।

एक भी बच्चा काबिल बन जाए तो बड़ी बात

अलंकृता कहती हैं कि अगर आप किसी के लिए, कुछ करना चाहते हैं तो यह मत सोचिए कि कितने लोग हैं। अकेले व्यक्ति या बच्चे के लिए प्रयास करें। आपको नहीं पता कि आपका पढ़ाया-सिखाया वह बच्चा क्या कर जाएगा। मैंने जिन बच्चों को पढ़ाया, उनसे अब कोई संपर्क नहीं है, लेकिन हो सकता है कि उनमें से कुछ बच्चे अच्छा कर रहे हों। मेरा मानना है कि हर बच्चे में कुछ न कुछ विशेषताएं होती है।

बता दें कि अलंकृता को हैंडराइटिंग और पेंटिंग में कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। शिक्षा के लिए हाल ही उन्हें एक्सीलेंस अवॉर्ड मिला, जिसमें 350 अभ्यर्थियों में से उनका चुनाव हुआ था।

सन्दर्भ स्रोत : समाचार पत्र पत्रिका

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