दुनिया की सबसे लोकप्रिय किताबों में से एक The Little Prince अब गोंडी भाषा में प्रकाशित होने जा रही है। इस खास संस्करण का विमोचन ऑलियांज फ्रांसिस भोपाल में फ्रेंकोफोनी वीक के दौरान किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि परधान गोंड समाज की महिलाओं ने पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय कहानी से प्रेरित होकर चित्रकारी की है। आमतौर पर ये महिलाएं पारंपरिक जनजातीय चित्र बनाती थीं, लेकिन इस बार उन्होंने ‘द लिटिल प्रिंस’ के अलग-अलग दृश्यों पर अपनी शैली में 28 पेंटिंग्स तैयार की हैं।
रोशनी व्याम कर रही हैं प्रोजेक्ट का नेतृत्व
इस पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व परधान गोंड समाज की पहली NIFT ग्रेजुएट रोशनी व्याम कर रही हैं। उन्होंने अपनी संस्था ‘सुरतेली’ और ‘ढिगना कला माध्यम’ के जरिए ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा और उनके लिए 4 दिन की विशेष वर्कशॉप आयोजित की।जिसमें महिलाओं को किताब की कहानी सुनाई गई और हर सीन का मतलब समझाया गया। रोशनी व्याम ने अपनी 'सुरतेली' संस्था के जरिए इन महिलाओं को भीमबेटका की गुफाओं और नर्मदा के तटों पर ले जाकर उनकी खोई हुई रचनात्मकता को जगाया। एक समय जो महिलाएं केवल घर के काम और सीमित कला तक सिमटी थीं, आज वे 'विजिटिंग कार्ड' बना रही हैं और खुद को एक डिजाइनर और टीचर के रूप में देख रही हैं।
वर्कशॉप में 14 महिलाओं ने बनाई दो-दो पेंटिंग
वर्कशॉप में कुल 14 महिलाओं ने भाग लिया और कहानी के अलग-अलग दृश्यों पर दो-दो पेंटिंग्स बनाईं। इन सभी चित्रों की प्रदर्शनी किताब के लॉन्च के दिन लगाई जाएगी, जो दर्शकों को जनजातीय कला और अंतरराष्ट्रीय साहित्य का अनोखा संगम दिखाएगी। खास बात यह है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई किताब आने से पहले ही इन कलाकृतियों को लोगों के सामने पेश किया जा रहा है। रोशनी व्याम ने कहा- 'हमारी महिलाओं के मन में यह सीमित सोच थी कि हम सिर्फ पारंपरिक चित्र ही बना सकते हैं। लेकिन इस वर्कशॉप के जरिए उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय कहानी को अपनी आंखों से देखा और अपने ब्रश से उकेरा। यह उनके लिए विश्व स्तर पर पहचान बनाने का सुनहरा मौका है।'
80 साल पूरे होने पर गोंडी संस्करण
फ्रेंच लेखक Antoine de Saint-Exupéry की यह किताब पहली बार 1943 में प्रकाशित हुई थी। साल 2026 में इसके 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसका गोंडी अनुवाद तैयार किया गया है। यह किताब दुनिया की 600 से अधिक भाषाओं और बोलियों में अनुवादित हो चुकी है।
गोंड शैली में ढाले गए कहानी के पात्र
‘द लिटिल प्रिंस’ की कहानी सहारा रेगिस्तान में फंसे एक पायलट और दूसरे ग्रह से आए एक छोटे राजकुमार की मुलाकात पर आधारित है। इस गोंडी संस्करण में पात्रों और दृश्यों को परधान गोंड शैली में चित्रित किया गया है, जिससे किताब के कवर और इलस्ट्रेशन ट्राइबल आर्ट की मौलिकता और सुंदरता साफ दिखाई देगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य परधान गोंड कलाकारों की कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। आने वाले समय में इन पेंटिंग्स के साथ एक कॉफी टेबल बुक भी प्रकाशित करने की योजना है, जिसे फ्रांस की वह फाउंडेशन सपोर्ट कर रही है जो ‘द लिटिल प्रिंस’ के अधिकार रखती है।
सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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