कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी की ओर से पति और उसके परिवार पर लगाए गए निराधार और गंभीर आरोप मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बेबुनियाद आरोपों से न केवल सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होती है बल्कि अनुशासित बल (जैसे सीआईएसएफ) में कार्यरत व्यक्ति के करियर पर भी संकट आ सकता है। न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति सुप्रतिम भट्टाचार्य की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सीआईएसएफ के एक जवान का है जिसकी पत्नी ने उस पर अवैध संबंध रखने और परिवार पर उनकी दूसरी बेटी को जान से मारने की कोशिश करने जैसे संगीन आरोप लगाए थे। हाई कोर्ट ने पाया कि पत्नी के ये दावे विरोधाभासों से भरे थे। उदाहरण के तौर पर पत्नी ने आरोप लगाया कि 15 फरवरी 2019 को उसे ससुराल में प्रताडि़त किया गया जबकि जिरह के दौरान उसने खुद स्वीकार किया कि वह दिसंबर 2018 के बाद से अपने ससुराल गई ही नहीं थी।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “CISF एक अनुशासित बल है जहां ऐसे गंभीर आरोप करियर के लिए घातक साबित हो सकते हैं। पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार को सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा पहुंचाना क्रूरता है.” कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दोनों पक्ष पिछले 8 सालों से अलग रह रहे हैं और कोई भी साथ नहीं रहना चाहता जिससे स्पष्ट है कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है।



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