खंडवा। खंडवा जिले के छोटे से गांव जलकुआं की रहने वाली कलाबाई बामने ने अपने हौसले और नवाचार से एक मिसाल कायम की है। जंगल की जड़ी-बूटियों से शुरुआत कर उन्होंने आज एक ऐसी कंपनी खड़ी कर दी है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की तैयारी में है।
जंगल के खजाने को बनाया अवसर
कलाबाई ने अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों औषधीय जड़ी-बूटियों की क्षमता को पहचाना और उसे आय का स्रोत बनाने का निर्णय लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने महिलाओं के साथ मिलकर कृषि नमामि आजीविका फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की। इस पहल के जरिए जड़ी-बूटियों की खेती और संग्रहण को संगठित रूप दिया गया, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बने।
500 से अधिक महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
कलाबाई ने अपने मिशन को व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने 500 से अधिक महिलाओं को जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण दिया और रोजगार से जोड़ा। आज इन महिलाओं की सालाना आय 1 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
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मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
कलाबाई ने नवाचार करते हुए कुसुम (सैफ्लावर) की जैविक खेती को बढ़ावा दिया। इससे तैयार प्राकृतिक रंग और औषधीय उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। जापान और जर्मनी जैसे देशों में इसके उत्पादों की मांग बढ़ी है। 100 एकड़ के सफल डेमो के बाद अब कंपनी को 1000 एकड़ में विस्तार का प्रस्ताव मिला है और जल्द ही निर्यात की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। एक साधारण महिला से ‘लखपति दीदी’ बनने तक का सफर तय करने वाली कलाबाई आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका मानना है कि “जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है।”
सन्दर्भ स्रोत/ छाया : ईटीवी भारत



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