भिंड जिले के रौन क्षेत्र में स्थित दबरेहा पंचायत आज ग्रामीण विकास और स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण बन चुकी है। जिस जगह कभी गंदगी और कचरे का अंबार लगा रहता था, वहीं आज लोग सेल्फी लेने और समय बिताने के लिए पहुंचते हैं। इस बदलाव के पीछे गांव की महिला सरपंच आरती कुशवाहा की मेहनत और दूरदर्शिता है।
2 साल में बदली गांव की पूरी सूरत
कुछ समय पहले तक दबरेहा पंचायत भी अन्य गांवों की तरह समस्याओं से जूझ रही थी- टूटी सड़कें, गंदगी और बुनियादी सुविधाओं की कमी। लेकिन पिछले दो वर्षों में गांव ने तेजी से विकास किया है। कच्ची और टूटी सड़कों की जगह अब पक्की सड़कें बन गई हैं। नालियों का निर्माण होने से गंदगी से निजात मिली है। इतना ही नहीं, सामुदायिक भवन और आंगनवाड़ी केंद्र का निर्माण होने के साथ ही गांव के प्रवेश पर सुंदर दरवाजा स्वागत के लिए तैयार किया गया है।
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गंदे तालाब से बना आकर्षक सेल्फी पॉइंट
गांव का प्राचीन तालाब, जो कभी गंदगी और दुर्गंध का केंद्र था, आज गांव की पहचान बन चुका है। पहले तालाब में मवेशी छोड़े जाते थे, आसपास कचरा जमा रहता था और दुर्गंध से लोग परेशान रहते थे। लेकिन अब तालाब की साफ-सफाई और फेंसिंग की गई। स्टॉप डैम का निर्माण, बैठने की व्यवस्था, सुंदर हरियाली और सजावट के साथ ही सेल्फी पॉइंट का निर्माण किया गया है। जिससे अब यह स्थान गांव और आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। गांव की सरपंच आरती कुशवाहा ने इस बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने सबसे पहले तालाब की फेंसिंग करवाई ताकि गंदगी रोकी जा सके। इसके बाद लगातार नए आइडिया लागू किए गए। उनका कहना है “युवा सरपंच होने के कारण कुछ अलग करने की सोच थी, और आज उसका परिणाम देखकर खुशी होती है।” इतना ही नहीं, तालाब अब पानी से भरा रहता है जिसका उपयोग सिंचाई में हो रहा है साथ ही भूजल स्तर में सुधार आया है
अशोक स्तंभ बना एकता का प्रतीक
गांव में एक अशोक स्तंभ भी बनवाया गया है। ग्राम सभा में अलग-अलग महापुरुषों की प्रतिमा लगाने के सुझाव आए थे, लेकिन किसी एक समाज का प्रतिनिधित्व न हो, इस सोच के साथ राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ पर सहमति बनी।
दबरेहा पंचायत यह साबित कर रही है कि सही सोच, नेतृत्व और प्रयास से कोई भी गांव बदल सकता है। स्वच्छता, सुंदरता और विकास का यह मॉडल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी भारत
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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