डॉ. अनामिका जैन की पहल : होलकर साइंस कॉलेज में अब

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डॉ. अनामिका जैन की पहल : होलकर साइंस कॉलेज में अब
लड़कियों के लिए लगेंगी सेल्फ डिफेंस की कक्षाएं

छाया :  गवर्नमेंट होलकर साइंस कॉलेज

• 133 साल पुराने होलकर साइंस कॉलेज में पहली महिला प्राचार्य

इंदौर। 133 साल पुराने होलकर साइंस कॉलेज में राज्य शासन द्वारा पदस्थ पहली महिला प्रिंसिपल मेजर डॉ. अनामिका जैन छात्राओं के लिए ख़ास तरह की कक्षाएं लगाने जा रहीं हैं। कॉलेज में अब पढ़ाई से अलग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के अलावा लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस की कक्षाएं भी शुरू होगी, जहां उन्हें कराटे, बॉक्सिंग आदि में प्रशिक्षित किया जाएगा।

बकौल डॉ. अनामिका मैंने विभागाध्यक्ष रहते हुए ही सोच रखा था कि जब भी कहीं प्रिंसिपल बनी तो पढ़ाई से इतर बच्चों के लिए कुछ ख़ास करूंगी। अब उसी सोच को अमलीजामा पहनाने का वक्त आ गया है। जल्द ही हमारे कॉलेज में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ख़ास बात यह है कि ये इन कक्षाओं में शहर के किसी भी कॉलेज की छात्राएं यहां निःशुल्क प्रशिक्षण ले सकेगी। इतना ही नहीं, रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर, एनसीसी अधिकारी और विशेषज्ञों की मदद से हम सेना में जाने के लिए एसएसबी इंटरव्यू की तैयारी भी कराई जायेगी।

नैक की ‘ए’ ग्रेडिंग पा चुका यह कॉलेज हर मायने में श्रेष्ठ है। हम इसमें प्लेसमेंट सुधार के लिए और काम करेंगे। बड़ी कंपनियां बुलाएंगे और कंपनियों के आने पहले बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं भी लगाएंगे। कैमेस्ट्री लैब से निकलने वाला कैमिकल युक्त पानी को लेकर भी चिंता है। यह पानी सीधे जमीन में जाकर वहां की मिट्टी और पौधों को नष्ट करता है। इसके लिए हमने एक लैब में ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया है, जहां ये पानी पहले एक टैंक में सुरक्षित होता है और फिर उसे डाइल्यूट कर जमीन में डाला जाता है। इस तरह के प्लांट हम कॉलेज की सारी लैब में शुरू करवाएंगे।

पढ़ाना रहेगा जारी

डॉ. अनामिका कहती हैं मैं भले ही अब प्राचार्य बन गई हूं, लेकिन अपने मूल विषय कैमिस्ट्री की कक्षाएं लेती रहूंगी। साथ ही एनसीसी कैडेट्स के लिए भी परेड व अन्य गतिविधियों पर नजर रहेगी जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर पाएं। कॉलेज में कैडेट्स की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि बच्चे पढ़ाई व एनसीसी दोनों मैनेज कर सकें।

उल्लेखनीय है कि डॉ. जैन कॉलेज समय में एनसीसी कैडेट रहीं। नौकरी में आने के बाद 1997 में कमीशंड प्राप्त किया और 2015 तक एनसीसी अधिकारी रहीं। शुरुआत लेफ्टिनेंट पद से हुई और रैंक मेजर तक रहीं। उन्होंने दो बार राजपथ परेड पर मप्र टीम का प्रतिनिधित्व किया। डीजी कमंडेशन के साथ ही 2014 में रक्षा मंत्री पदक भी मिला।

सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर 

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