देश की न्याय व्यवस्था में तेजी लाने की दिशा में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। CJI ने देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखा है। उन्होंने निर्देश दिया है कि जजों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पत्र की सबसे खास बात महिला जजों की नियुक्ति को लेकर CJI का सख्त रुख है।
अपवाद नहीं, नियम के रूप में देखना चाहिए-सीजेआई
CJI सूर्यकांत ने अपने पत्र में जिक्र किया है कि उच्च न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब भी काफी कम है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम को महिला जजों की नियुक्ति को अपवाद के तौर पर नहीं, बल्कि सामान्य नियम के रूप में देखना चाहिए। मेधावी महिला वकीलों को बेंच का हिस्सा बनाना केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में संवेदनशीलता लाने के लिए अनिवार्य है।
'अब इच्छाशक्ति की जरूरत'
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बताया कि जिला अदालतों में महिला न्यायिक अधिकारियों की संख्या लगभग 36.3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जब निचली अदालतें इतना मजबूत है, तो इसका असर उच्च न्यायपालिका में भी दिखना चाहिए। उन्होंने हाईकोर्ट कॉलेजियम से आग्रह किया कि वे अपना दायरा बढ़ाएं। सीजेआई सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट उन महिला वकीलों के नामों पर भी विचार करें जो उनके राज्यों से ताल्लुक रखती हैं लेकिन वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही हैं।
खाली होने से पहले ही शुरू हो चयन प्रक्रिया
अक्सर देखा गया है कि जज के रिटायर होने के महीनों बाद तक पद खाली रहता है। इस पर भी सीजेआई ने सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि वैकेंसी होने का इंतजार न करें; पद खाली होने से पहले ही नामों की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जानी चाहिए।
क्या कहते हैं आंकड़े?
वर्तमान में स्थिति यह है कि देश के उच्च न्यायालयों में स्वीकृत 1122 पदों के मुकाबले केवल 814 जज कार्यरत हैं, यानी 308 पद अब भी खाली हैं। उच्च न्यायालयों में महिला जजों की कुल संख्या फिलहाल 116 है। हालांकि मद्रास, बॉम्बे, पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने इस दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है।



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