हल चलाने वाले की बेटी ने चलाए चप्पू , पहली बार में ही जीता सोना

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हल चलाने वाले की बेटी ने चलाए चप्पू , पहली बार में ही जीता सोना

छाया:दैनिक भास्कर

कयाकिंग में 60 मेडल जीत चुकी हैं इंटरनेशनल प्लेयर सुषमा

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के धामखेड़ा गाँव के किसान हरिनारायण वर्मा की बेटी सुषमा वर्मा इन दिनों खासी चर्चा में हैं। दरअसल सुषमा ने कर्नाटक के उडुप्पी में आयोजित नेशनल ड्रैगन बोट चैम्पियनशिप में दो गोल्ड समेत चार मेडल जीते हैं। ख़ास बात यह है कि इस होनहार खिलाड़ी ने किसी नेशनल ड्रैगन बोट चैम्पियनशिप में पहली बार हिस्सा लेकर ही यह कारनामा कर दिखाया है। हालांकि इससे पहले वे गुजरात नेशनल गेम्स समेत अन्य नेशनल कयाकिंग-केनोइंग टूर्नामेंट में 60 मेडल जीत चुकी हैं। सुषमा ने 11 वर्ष की उम्र में वर्ष 2015 में मप्र वाटर स्पोर्ट्स अकादमी ज्वाइन की थी। उस समय उन्हें कयाकिंग-केनोइंग के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी। उनके किसी रिश्तेदार जो खुद इस खेल से जुड़े हुए हैं, ने भोपाल में वाटर स्पोर्ट्स अकादमी और उसके ट्राॅयल के बारे में बताया था।

 

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छोटी झील में रोज 4-4 घंटे प्रैक्टिस करती हैं सुषमा

सुषमा को अपने पहले ट्रायल में ही अकादमी में प्रवेश मिल गया था। तब से लेकर अभी तक वे बराबर सुबह और शाम के सत्र में छोटी झील में चार-चार घंटे साथी खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करती हैं। उनकी लगन और मेहनत का ही नतीजा था कि दो साल बाद ही वर्ष 2017 में संघाई वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए चुन ली गई। उसमें वे कोई पदक तो नहीं जीत पाई, लेकिन इंटरनेशनल खिलाड़ी का तमगा जरूर मिल गया। उस टूर्नामेंट में वे के-4 में उतरी थी और उन्हें पांचवीं रैंक मिली थी। इसके बाद वर्ष 2020 में उन्होंने इंटरनेशनल टूर्नामेंट भोपाल में भागीदारी की। पिछले वर्ष गुजरात नेशनल गेम्स में सिल्वर मेडल जीता, जो उनका 59वां नेशनल मेडल था। सुषमा बताती हैं चूंकि कयाकिंग और ड्रैगन बोट चलाने में ज्यादा फर्क नहीं है, इसलिए ड्रैगन बोट में गोल्ड जीतने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। कयाकिंग में तो सिंगल, डबल्स और चार खिलाड़ी चप्पू चलाते हैं। ड्रेगन बोट में एक साथ 10-10 और 20 प्लेयर रेस में भाग लेते हैं। इसलिए इसमें मनोबल काफी ऊंचा रहता है और कठिन से कठिन चुनौती भी आसान लगने लगती है। यही वजह रही कि मैंने पहली ही बार में दो गोल्ड सहित 4 मेडल जीते। सुषमा अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने कोच देती हैं।

सन्दर्भ स्रोत - दैनिक भास्कर

संपादन – मीडियाटिक डेस्क 

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