17 साल की शिवकन्या ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जीता गोल्ड

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17 साल की शिवकन्या ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जीता गोल्ड

छाया: viral vo sports के फेसबुक पेज से 

• लॉकडाउन में जंगल में बनाया था ट्रैक, उसी पर करती रहीं प्रैक्टिस

• पिता दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं

 

भोपाल धार स्थित खारपुरा गांव की रहने वाली 17 साल की शिवकन्या मुकाती ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 25.1 सेकंड में 200 मीटर दौड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम करने में कामयाबी हासिल की है इससे एक दिन पहले उन्होंने 400 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीता था। मप्र अकादमी की प्लेयर शिवकन्या शुरुआत में खेल दिवस पर होने वाली दौड़ में भाग लिया करती थी। उसमें वह हमेशा अव्वल आती थीं, बस यहीं से उनके एथलीट बनने की शुरुआत हुई। 12वीं की पढ़ाई कर रही शिवकन्या को गाँव में उनके स्कूल के शिक्षक ने एथलेटिक्स की तरह दौड़ते हुए देखा और उन्हें मप्र एथलेटिक्स अकादमी जाने की सलाह दी। शिवकन्या ने वर्ष 2017 में भोपाल आकर ट्रायल दिया और उनका चयन हो गया।

 

इस मुकाम तक पहुँचने के लिए शिवकन्या ने काफी मेहनत की है। उनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं है स्थिति यह है कि उनके पास नए जूते खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। यूथ गेम्स के लिए प्रेक्टिस भी उन्होंने टूटे हुए जूतों में ही कीअभी भी उनकी प्राथमिकता जूते खरीदना नहीं हैवे कहती हैं ‘माता-पिता ने मेरी हौसला अफजाई करते हुए हमेशा मेरी बहुत मदद की है इसलिए पहले परिवार की मदद करना चाहती हूँ।‘ उनके पिता के पास मात्र 2 बीघा जमीन है, कुछ दिन पहले उनके पिता बहुत बीमार हुए और उनके इलाज के लिए आधी जमीन बेचना पड़ी। जमीन में इतनी पैदावार नहीं होती कि परिवार का अच्छे से गुजारा हो सके इसलिए पिता मजदूरी करने भी जाते हैं। शिवकन्या अपनी जीत का श्रेय कोच शिप्रा मसीह को देते हुए कहती हैं कि आज जो भी कर पाई हूं, उनकी वजह से ही कर पाई हूं। क्योंकि उन्होंने प्रैक्टिस के अलावा भी दूसरी परेशानियों में साथ दिया है। फिर चाहे वह खेल हो या घर की समस्याएं, वह हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। कोरोना के समय जब सभी अपने अपने घर लौट गए तब अपनी कोच की सलाह पर उन्होंने जंगल में ट्रैक बनाकर अपनी प्रेक्टिस जारी रखी।

 

सुबह-शाम तीन-तीन घंटे अभ्यास करने वाली शिवकन्या अपने इसी प्रदर्शन को बरकरार रख इंटरनेशनल स्तर खेलना चाहती हैं। खेलो इंडिया में जीत के बाद जो इनामी राशि मिलेगी उसे वे अपनी ट्रेनिंग पर ही खर्च करना चाहती हैं ताकि देश की ओर  से खेलने का उनका सपना पूरा हो सके। शिवकन्या धावक हेमा दास की तरह देश का नाम रोशन करना चाहती हैं। उनकी एक बहन और एक भाई माता-पिता के साथ गाँव में ही रहते हैं।

सन्दर्भ स्रोत - दैनिक भास्कर/ एमपी सन्देश न्यूज़ 24 डॉट इन

संपादन -मीडियाटिक 

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