सुनीता आर्या : घरेलू हिंसा से उठकर बनी अधिकारों की आवाज

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सुनीता आर्या : घरेलू हिंसा से उठकर बनी अधिकारों की आवाज

भोपाल। महिला सशक्तिकरण की बात अक्सर बड़े मंचों पर होती है, लेकिन समाज में कई ऐसी सच्ची कहानियां हैं जो बताती हैं कि सम्मान और अधिकार पाने के लिए महिलाओं को कितनी कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की रहने वाली सुनीता आर्या की कहानी ऐसा ही एक उदाहरण है। उन्होंने घरेलू हिंसा, सामाजिक भेदभाव और कानूनी संघर्षों का सामना करते हुए न सिर्फ अपने बच्चों की परवरिश की, बल्कि अब बच्चों और महिलाओं के अधिकारों के लिए भी काम कर रही हैं। 

बचपन से ही भेदभाव का सामना

सुनीता अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनका जन्म ऐसे माहौल में हुआ जहां बेटी का जन्म खुशी की बजाय चिंता का कारण माना जाता था। यही सोच उनके जीवन के शुरुआती दौर में भी दिखाई दी।

शादी के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न

साल 2007 में करीब 20 साल की उम्र में उनकी शादी हुई। परिवार ने शादी के लिए जमीन तक बेच दी। शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन जल्द ही हालात बदल गए। सुनीता के अनुसार, उनके जेठ का व्यवहार ठीक नहीं था और वह उन्हें परेशान करते थे। एक दिन घूंघट सरकने पर उनके साथ मारपीट की गई। पति ने भी उनका साथ नहीं दिया वे उस समय गर्भवती थीं। घटना के बाद वह मायके लौट आईं, जहां उन्होंने बेटे को जन्म दिया। उनके पति ने न अस्पताल में साथ दिया और न ही बच्चे की जिम्मेदारी उठाई। 

दूसरे रिश्ते में भी विश्वासघात 

कुछ साल बाद उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिनसे उनका रिश्ता बना। लेकिन यह रिश्ता भी भरोसेमंद साबित नहीं हुआ।पहले गर्भपात के लिए दबाव बनाया गया और दूसरी बार गर्भवती होने पर पितृत्व से इनकार कर दिया गया। सुनीता ने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई लड़ी। डीएनए टेस्ट के बाद अदालत ने बच्ची के पिता को जिम्मेदार माना। बाद में हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया।

बेटी की शिक्षा के लिए संघर्ष

कानूनी जीत के बावजूद उनकी परेशानियां खत्म नहीं हुईं। उनकी बेटी को स्कूल में दाखिला दिलाने में मुश्किलें आईं क्योंकि उसका जन्म लिव-इन संबंध में हुआ था। सुनीता ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए संबंधित आयोग में शिकायत की है।

समाज सेवा की ओर बढ़ाए कदम

2018 के बाद उन्होंने तय किया कि वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए भी काम करेंगी। उन्होंने बच्चों के अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर काम किया। वह बाल कल्याण समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं और कई सामाजिक अभियानों से जुड़ी रही हैं। सुनीता ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और एमए व एमएसडब्ल्यू की डिग्री हासिल की। अब वह कानून की पढ़ाई कर रही हैं ताकि जरूरतमंदों को बेहतर कानूनी मदद दे सकें। सुनीता कहती हैं कि उनकी प्रेरणा Dr. B. R. Ambedkar से मिलती है, जिनके विचारों ने उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की ताकत दी। सुनीता का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष देखा है, लेकिन अब वह अपने बच्चों और समाज के लिए जी रही हैं।

सन्दर्भ स्रोत : मूकनायक

छाया : सुनीता आर्या के फेसबुक अकाउंट से

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