सुप्रीम कोर्ट : महिला पढ़ी-लिखी तो भी

blog-img

सुप्रीम कोर्ट : महिला पढ़ी-लिखी तो भी
तलाक के बाद गुजारे भत्ते का हक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि तलाक के बाद पति अपनी पूर्व पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से केवल इस आधार पर नहीं बच सकता कि पत्नी शिक्षित है या उसे माता-पिता का सहयोग मिल रहा है। अदालत ने कहा कि विवाह केवल आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव, साथ और पारस्परिक सहयोग की संस्था है। 

पत्नी पढ़ी-लिखी है तब भी महिला को ये हक

जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि एक महिला सम्मानजनक और स्थिर जीवन की उम्मीद के साथ विवाह में प्रवेश करती है। अगर विवाह टूट जाता है, तो पति की जिम्मेदारी सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाती कि पत्नी पढ़ी-लिखी है। तलाक के बाद भी पत्नी उस जीवन स्तर के अनुरूप जीवन जीने की हकदार है, जिस तरह विवाह के दौरान रहती रही है।

क्या था मामला? 

यह फैसला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर आया। फैमिली कोर्ट ने महिला को 15,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। महिला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर कहा कि पति की मासिक आय करीब 1.60 लाख रुपये है, ऐसे में 15,000 रुपये पर्याप्त नहीं है। अदालत ने भरण-पोषण की राशि बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह कर दी। 

फैसले का होगा दूरगामी असर 

सुप्रीम कोर्ट पहले कई मामले में कह चुका है कि शादीशुदा लाइफ मे जो जीवनस्तर और लाइफ स्टाइल महिला की रही है वही स्टैंडर्ड कायम रखना होगा। महिला (पत्नी) अपनी शादीशुदा जिंदगी में ससुराल में एक स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग वाली जीवन शैली की आदि रही है। पत्नी का अधिकार है कि उसे वही लाइफ स्टाइल और जीवन शैली मिलनी चाहिए जो उसे पति के साथ मिला था। मौजूदा मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को फिर से अपने फैसले में बल दिया है। ऐसे में इन फैसलों का दूरगामी असर होने वाला है।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : 'दहेज हत्या समाज के लिए कलंक'
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : 'दहेज हत्या समाज के लिए कलंक'

दहेज केस में ने पलटा आदेश- कहा दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में उच्च न्यायालय को विवेक का इस्तेमाल करते समय ब...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला की सहमति
अदालती फैसले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला की सहमति , से बना शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं

कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट : मायके से मिली
अदालती फैसले

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट : मायके से मिली , संपत्ति पर पति का अधिकार नहीं

हाईकोर्ट ने कहा- निसंतान महिला का सबकुछ पिता के वारिस को मिलेगा

दिल टूटना दुखद लेकिन अपराध नहीं-
अदालती फैसले

दिल टूटना दुखद लेकिन अपराध नहीं- , बलात्कार मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने साफ किया कि अगर दो वयस्क अपनी मर्जी से लंबे समय तक रिश्ते में रहते हैं और बाद में पुरुष शादी करने से इनकार कर द...

सुप्रीम कोर्ट : सेना में महिला अधिकारियों
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : सेना में महिला अधिकारियों , को मिलेगा परमानेंट कमीशन

प्रणालीगत भेदभाव पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी -कोर्ट ने माना कि महिलाओं के साथ लंबे समय से सिस्टम में भेदभाव हुआ जिससे उनके...