दहेज में मिली मशीन से उद्यमी बनीं बुरहानपुर की किरण

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दहेज में मिली मशीन से उद्यमी बनीं बुरहानपुर की किरण

बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जुनून हो, तो आप न सिर्फ अपने जीवन को बदल सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है किरण रायकवार ने, जो बुरहानपुर के सीलमपुरा गांव की निवासी हैं। किरण ने दहेज में मिली सिलाई मशीन से घर से सिलाई का काम शुरू किया था, आज कॉस्ट्यूम डिजाइन की एक बड़ी उद्यमी बन गईं हैं और उन्होंने 2 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है। 

किरण का मानना है कि यह सब संभव हुआ क्योंकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा अपने सपनों को सच करने के लिए मेहनत की। आज, वह उन महिलाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं, जो यह मानती हैं कि एक घरेलू महिला का जीवन में आगे बढ़ना मुश्किल है। 

सास की मदद से हुनर को मिली दिशा 

किरण बताती हैं कि शादी से पहले उन्होंने दो बार संविदा शिक्षक की परीक्षा पास की थी, लेकिन वैकेंसी नहीं होने के कारण वह नौकरी नहीं पा सकी। शादी के दौरान उन्हें दहेज में एक सिलाई मशीन मिली थी। कपड़े डिजाइन करने का शौक था, लेकिन संसाधन और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और उसी सिलाई मशीन से अपने जीवन की शुरुआत की।  किरण की सास कुंदन बाई ने उनके हुनर को पहचाना और उन्हें बढ़ावा दिया। पति कैलाश रायकवार ने भी पूरा समर्थन दिया। इसके बाद किरण ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनका जुनून और मेहनत उन्हें सफलता की ओर ले गए। आज किरण बुरहानपुर की सबसे बड़ी कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग गारमेंट्स उद्यमी बन चुकी हैं।  

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किरण का महिलाओं के लिए संदेश है "सपने देखो, मेहनत करो, और सफलता पाओ। सफलता पाने तक रुकिए मत। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके पीछे लंबी मेहनत और संघर्ष की आवश्यकता होती है।" उनका कहना है कि कई महिलाएं यह सोचती हैं कि उनके पास वह सब नहीं है जो उन्हें चाहिए होता है, लेकिन असल सफलता यह है कि जीवन में आई बाधाओं को पार करना ही असली जीत है। 

किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य और सामाजिक कार्य 

किरण रायकवार वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य भी हैं और नाबालिगों के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। इसके अलावा, विवाह से पहले उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई छोड़ी थी, जिसे वह अब फिर से जारी कर रही हैं। किरण ने नेशनल हॉकी प्लेयर के रूप में भी अपनी पहचान बनाई थी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी हारना नहीं सीखा, और यही मानसिकता उनके जीवन के संघर्षों में मददगार साबित हुई। 

सन्दर्भ स्रोत : पत्रिका 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क

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