इंदौर की मानसी बनीं पालोमार वेधशाला की पहली महिला प्रमुख 

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इंदौर की मानसी बनीं पालोमार वेधशाला की पहली महिला प्रमुख 

इंदौर।  कैलिफ़ोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान (कैलटेक) ने प्रो.मानसी मनोज कासलीवाल को पालोमर वेधशाला का निदेशक नियुक्त किया है। इस पद पर पहुँचने वाली वे पहली महिला और भारतीय मूल की दूसरी हस्ती हैं। उनसे पूर्व 2006-18 तक इस पद पर श्रीनिवास कुलकर्णी कार्यरत थे। 

पालोमार वेधशाला संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में सैन डिएगो काउंटी के निकट स्थित पालोमार पर्वतमाला पर स्थापित एक खगोलीय अनुसंधान वेधशाला है, जहाँ से अन्तरिक्ष में होने वाली घटनाओं की निगरानी की जाती है। इस वेधशाला का संचालन केलिफोर्निया प्रोद्योगिकी संस्थान(कैलटेक) द्वारा किया जाता है। 

पालोमार वेधशाला में कई शक्तिशाली अन्तरिक्ष अनुसंधान दूरबीनें स्थापित हैं, जैसे  200-इंच (5.1 मीटर) हेल टेलीस्कोप,  48-इंच (1.2 मीटर) सैमुअल ओशिन टेलीस्कोप (ज़्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी , ज़ेडटीएफ को समर्पित ), पालोमर 60-इंच (1.5 मीटर) टेलीस्कोप,  और 30-सेंटीमीटर (12-इंच) गैटिनी-आईआर टेलीस्कोप।

मानसी कैलटेक की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खगोलशास्त्री हैं, जिन्हें ब्रह्माण्ड में होने वाले विस्फोटों जैसे - सुपरनोवा और आपस में टकराने वाले न्यूट्रॉन तारों पर आधारित महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा मल्टी मैसेंजर ऑब्ज़र्वेशन सहित क्षणिक खगोल विज्ञान में भी उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। खगोल भौतिकी में विविधता को बढ़ावा देने के लिए कासलीवाल अनुसंधानकर्ताओं को मार्गदर्शन भी देती हैं।

इंदौर में जन्मी मानसी 15 वर्ष की आयु में अमेरिका चली गईं। उन्होंने 2005 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 2011 में कैलटेक से खगोल विज्ञान में अपनी पीएचडी पूरी की। कार्नेगी वेधशालाओं में पोस्ट डॉक्टरल शोध के बाद, वे कैलटेक लौट आईं, वर्तमान में मानसी यहीं प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

पालोमार वेधशाला में कसलीवाल का अनुसंधान दल  ब्रह्माण्ड में होनेवाली आतिशबाजियों अर्थात  तारों के जीवन चक्र और तत्वों के निर्माण को दर्शाने वाली तेज़ रौशनी की खोज और उनका विश्लेषण करता है। वे कहती हैं, “प्राथमिक खोज उपकरण के तौर पर पालोमार वेधशाला में हमारे पास दो रोबिटिक, वाइल्ड फील्ड इन्फ्रारेड ऑप्टिकल कैमरे हैं । हम दुनिया भर के खगोलशास्त्रियों के साथ मिलकर विद्युत् चुम्बकीय समकक्षों से लेकर गुरुत्वाकर्षण से जुडी तरंगीय घटनाओं तक से सम्बंधित खोजों का सर्ववर्णिक (panchromtically) विश्लेषण करते हैं।

डॉ. मानसी का शोधकार्य तेज़ी से बदलती ब्रह्मांडीय घटनाओं का अध्ययन करने वाले "क्षणिक खगोलशास्त्र" पर केंद्रित है। वे GROWTH (Global Relay of Observatories Watching Transients Happen) प्रोजेक्ट का नेतृत्व करती हैं, जो दुनिया भर में स्थित दूरबीनों के नेटवर्क को समन्वित करता है ताकि ये क्षणिक घटनाएं कैद की जा सकें। कासलीवाल ने पालोमार ट्रांजिएंट फैक्टरी और ज़्विकी सुविधा (Zwicky Facility) के डिज़ाइन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से उन्होंने हज़ारों सुपरनोवा और अन्य खगोलीय घटनाओं की खोज की है।

उनका योगदान मल्टी-मेसेंजर खगोलशास्त्र में भी है, जिसमें उन्होंने लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) द्वारा खोजी गई गुरुत्वीय तरंगों पर अनुवर्ती अवलोकन किए हैं। उन्होंने इन्फ्रारेड-संवेदनशील दूरबीनों का भी विकास किया है जो ब्रह्मांडीय विस्फोटों की रासायनिक संरचना और विकास को उजागर करती हैं।

वर्ष 2022 में, उन्हें ब्रह्मांडीय घटनाओं के विद्युत-चुंबकीय फॉलो-अप में नेतृत्व के लिए "न्यू होराइजन्स इन फ़िज़िक्स" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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