आईसीसी अंडर-19 टी-20 वर्ल्ड कप ग्वालियर की वैष्णवी

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आईसीसी अंडर-19 टी-20 वर्ल्ड कप ग्वालियर की वैष्णवी
और इंदौर की आयुषी शुक्ला का रहा शानदार प्रदर्शन

अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया लगातार दूसरी बार चैंपियन बनी है। भारतीय टीम को फिर से इस खिताब को जिताने में मध्यप्रदेश के इंदौर की आयुषी शुक्ला और ग्वालियर की वैष्णवी शर्मा का अहम योगदान रहा। वैष्णवी छह मैच में 4.35 की इकोनॉमी रेट से 17 विकेट चटकाकर टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज रहीं, वहीं आयुषी ने सात मैच में 14 विकेट चटकाकर उनका अच्छा साथ निभाया।

वैष्णवी की गेंदबाजी  ने मचाया तहलका 

वैष्णवी ने फाइनल मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में महज 23 रन देकर 2 विकेट चटकाए। वैष्णवी ने इस टूर्नामेंट के दौरान 7 मुकाबलों में 17 विकेट चटकाए। इसके साथ ही उन्होंने एक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। वे अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप के एक एडिशन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गई हैं। इससे पहले ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की मैगी क्लार्क के नाम था। हालांकि, वैष्णवी ने फाइनल से पहले ही 15 विकेट के साथ इस रिकॉर्ड को तोड़ चुकी थीं। लेकिन इस मुकाबले 2 विकेट लेकर अपनी उपलब्धि को मजबूत किया।

19 साल की वैष्णवी  मध्यप्रदेश के ग्वालियर में चंबल क्षेत्र की रहने वाली हैं। पहली बार इस क्षेत्र की कोई महिला क्रिकेटर वर्ल्ड कप जैसे इवेंट में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनी है। वैष्णवी के पिता नरेंद्र शर्मा पेशे से ज्योतिष हैं। उन्हीं के सहयोग से वैष्णवी ने 5 साल की उम्र से ही क्रिकेट की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी।

रिकॉर्ड के साथ किया था डेब्यू

वैष्णवी शर्मा ने एक रिकॉर्ड के साथ अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप में कदम रखा था। इसी टूर्नामेंट में मलेशिया के खिलाफ उन्हें डेब्यू कैप मिला था और पहले ही मैच में उन्होंने हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया था। इस टूर्नामेंट में ये कारनामा करने वाली वो पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई थीं। वैष्णवी ने 4 ओवर में सिर्फ 5 रन देकर 5 विकेट चटकाए थे।

वैष्णवी ने 2017 में मध्यप्रदेश की अंडर-16 टीम से घरेलू क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने इस स्तर एक से बढ़कर एक प्रदर्शन किए, जिसके बाद उन्हें मध्यप्रदेश की सीनियर टीम में भी मौका मिला। साल 2022 में वैष्णवी ने घरेलू क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट वाली गेंदबाज रही थीं। उनके दमदार प्रदर्शन को देखते हुए बीसीसीआई ने डालमिया अवार्ड से नवाजा था। बता दें वो भारतीय अंडर-19 टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं।

इंदौर की आयुषी शुक्ला ने दी गेंदबाजी को मजबूती

बाएं हाथ की स्पिनर आयुषी शुक्ला ने भी इस मैच में शानदार प्रदर्शन किया इस अहम मुकाबले में आयुषी ने 4 ओवर में 9 रन देकर 2 विकेट झटके। 7 मैचों में 14 विकेट लेकर वे सबसे अधिक विकेट लेने के मामले में दूसरे स्थान पर रहीं। आयुषी के पिता लालजी शुक्ला पंडिताई करते हैं। उन्हें क्रिकेट का बहुत शौक है। पिता का सपना था कि मेरे चार बच्चों में कोई एक क्रिकेटर बने। आयुषी को क्रिकेट का शौक पिता के साथ मैच देखकर ही लगा। वह गली में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलती थी। पिता ने जब आयुषी को क्रिकेट खेलते देखा तो उन्हें लगा क्यों न आयुषी को क्रिकेट सिखाया जाए।

खुद कराते थे प्रैक्टिस

पिताजी आयुषी को नेहरु स्टेडियम लेकर जाते थे। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं तो किसी क्लब में आयुषी को भेजना मुश्किल था। पिताजी खुद ही आयुषी को बॉल करते थे और सिखाते थे। करीब एक साल तक प्रैक्टिस के बाद कोच मनोज पांडे ने आयुषी को प्रशिक्षित किया।

20 हजार उधार लेकर बेटी को दिलाई किट

आयुषी के भाई अखिलेश ने बताया कि पिताजी पूजा पाठ कराकर घर खर्च चलाते हैं। एकेडमी ज्वाइन कराने के बाद आयुषी को नई किट दिलाना था, लेकिन इतना पैसा नहीं था कि उसे नई किट दिला सकें। पिताजी ने किसी के माध्यम से सेकंड हैंड किट 2500 रुपए में खरीदी ताकि आयुषी की प्रैक्टिस न रुके। जब वह किट बेकार हो गई तो उन्होंने 20 हजार उधार लिए और आयुषी को नई किट दिलाई।

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

 

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